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Punjab News Today: भगवंत मान सरकार ने दिया कर्मचारियों को जन्माष्टमी का तोहफा, महंगाई भत्ता बढ़ाकर 60 प्रतिशत होगा

भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए 85,000 कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डी.ए.) 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग करने का निर्णय लिया है।
11:46 AM Sep 05, 2026 IST | Himanshu Negi
भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए 85,000 कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डी.ए.) 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग करने का निर्णय लिया है।
punjab news today  भगवंत मान सरकार ने दिया कर्मचारियों को जन्माष्टमी का तोहफा  महंगाई भत्ता बढ़ाकर 60 प्रतिशत होगा
Punjab News Today

पंजाब सरकार के कर्मचारियों को जन्माष्टमी का तोहफा देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए 85,000 कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डी.ए.) 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग करने का निर्णय लिया है। इससे इन कर्मचारियों का डी.ए. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर हो जाएगा। यह निर्णय सरकार द्वारा अनेक अवसरों और मंचों पर दोहराए गए एकसमान रुख को दर्शाता है, जिसके अनुसार लाभ प्राप्त करने के हकदार कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिलना चाहिए और जो कर्मचारी इन लागू प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते, उन्हें यह लाभ नहीं मिलना चाहिए।

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इस निर्णय के साथ सरकार ने एक बार फिर यह सुनिश्चित किया है कि पंजाब सरकार के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में बने रहें। यह निर्णय 2020 के बाद के नियमों के तहत भर्ती हुए उन कर्मचारियों पर लागू होता है, जिनका वेतन केंद्र सरकार के 7वें वेतन आयोग के पैटर्न पर आधारित है और जिन्हें न्यायालय के आदेशों के माध्यम से संशोधित नहीं किया गया है।

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D.A 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की सिफारिश

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कैबिनेट सब-कमेटी ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए डी.ए. 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की सिफारिश की है, जिसे अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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इस निर्णय की घोषणा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तथा आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा ने पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। यह कदम 17 जुलाई 2020 से पहले भर्ती हुए और अधिक वेतन प्राप्त कर रहे कर्मचारियों तथा इस तिथि के बाद केंद्र के 7वें सी.पी.सी. वेतन पैटर्न के तहत भर्ती हुए कर्मचारियों के बीच के अंतर को समाप्त करता है।

कर्मचारी सुशासन की रीढ़

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “कर्मचारी सुशासन की रीढ़ हैं। भगवंत मान सरकार हमेशा हर कर्मचारी के अधिकारों और सम्मान के लिए उनके साथ खड़ी रही है। आज जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर हम एक और वादा पूरा कर रहे हैं और वर्ष 2020 के बाद भर्ती हुए नए कर्मचारियों को वही डी.ए. देना सुनिश्चित कर रहे हैं, जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।”

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यह मुद्दा नए भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतन ढांचे में किए गए बदलाव के कारण उत्पन्न हुआ। उन्होंने आगे कहा, “दिसंबर 2020 में पंजाब कैबिनेट ने 17 जुलाई 2020 के बाद की गई नई भर्तियों और नियुक्तियों के लिए वेतन स्केल/मैट्रिक्स को केंद्र सरकार के 7वें वेतन आयोग के स्केल के बराबर करने की मंजूरी दी थी। इसके साथ कर्मचारियों की दो व्यापक श्रेणियां बन गईं—मौजूदा कर्मचारी, जो पंजाब में पहले से ही अधिक वेतन ढांचे के अंतर्गत आते हैं और 2020 के बाद भर्ती हुए नए कर्मचारी, जिनका शुरुआती वेतन केंद्र सरकार के 7वें सी.पी.सी. पैटर्न पर आधारित है।”

अमन अरोड़ा का बयान

श्री अमन अरोड़ा ने कहा, “17 जुलाई 2020 से पहले भर्ती हुए कर्मचारियों को पंजाब के उच्च मूल वेतन स्केल का लाभ मिल रहा है। हालांकि, इस तिथि के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन स्केल पैटर्न के तहत लाया गया था, लेकिन उन्हें पंजाब का केवल 42 प्रतिशत डी.ए. ही मिल रहा है। इस बड़े अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।”

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के कर्मचारी पहले से ही अपने केंद्र सरकार के समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं। कई महत्वपूर्ण कैडरों के कर्मचारियों को पंजाब-विशिष्ट वेतन स्केल के तहत केंद्र सरकार के समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत अधिक वेतन मिल रहा है। अमन अरोड़ा ने कहा, “लेकिन 2020 के बाद के वेतन ढांचे के तहत भर्ती किए गए कर्मचारियों के लिए स्थिति अलग है, क्योंकि उन्हें पुराने वेतन पैटर्न की तर्ज पर उच्च पंजाब एंट्री वेतन स्केल नहीं मिलता। इसलिए यह तर्क कि कम डी.ए. की भरपाई अधिक मूल वेतन के माध्यम से हो सकती है, इस श्रेणी पर बहुत कम लागू होता है।”

अमन अरोड़ा ने जोर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली ‘आप’ सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि पंजाब सरकार के किसी भी कर्मचारी को केंद्र सरकार के उसके समकक्ष कर्मचारी से कम वेतन न मिले। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल के वर्षों में बड़े स्तर पर भर्ती की है, जिससे राज्य के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। अमन अरोड़ा ने कहा, “हमारी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब के कर्मचारियों को उनके केंद्र सरकार के समकक्षों की तुलना में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। वर्ष 2020 के बाद के कर्मचारियों के लिए डी.ए. में वृद्धि इसी असमानता को दूर करने की दिशा में एक ईमानदार कदम है।”

विपक्ष पर हमला

‘आप’ पंजाब प्रधान ने कहा, “पंजाब सरकार ने 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के डी.ए. के संबंध में अपना पक्ष पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में राज्य की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से प्रस्तुत किया है। इस मुद्दे को कैबिनेट मंत्रियों ने 3 सितंबर, 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी सार्वजनिक रूप से दोहराया था।”

विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए अमन अरोड़ा ने कांग्रेस पंजाब सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन समानता की मांग करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला दे रही हैं, को चुनौती दी और कहा, “यदि वे वास्तव में अनुच्छेद 14 में विश्वास रखते हैं तो पंजाब के मामलों में हस्तक्षेप करने से पहले उन्हें अपनी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर लाने के लिए कहना चाहिए।”

भगवंत मान सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए डी.ए. बढ़ाया

पंजाब पहले से ही ऐसे वेतन स्केल का पालन करता रहा है, जो केंद्र सरकार की तुलना में काफी अधिक हैं। कई महत्वपूर्ण कैडरों में तो वेतन उनके केंद्रीय समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के 7वें वेतन आयोग के पैटर्न के तहत लाया गया था, जबकि उन्हें 42 प्रतिशत डी.ए. मिलता रहा। इससे इस श्रेणी के लिए कम डी.ए. दर एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई।

पंजाब सरकार ने अब 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती किए गए उन कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डी.ए. देने का निर्णय लिया है, जिनका वेतन केंद्रीय 7वें सी.पी.सी. पैटर्न पर आधारित है और जिन्हें अदालत के आदेशों के माध्यम से संशोधित नहीं किया गया है। फैक्ट शीट के अनुसार, 85,000 कर्मचारी इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। इनमें शिक्षक, कांस्टेबल, क्लर्क, नर्स, स्वास्थ्य कर्मचारी, मेडिकल अधिकारी, पटवारी और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।

इस निर्णय से 2020 के बाद भर्ती किए गए लगभग 85,000 कर्मचारियों को लाभ होगा। इनमें 11,685 कांस्टेबल, 20,603 शिक्षक, 5,144 क्लर्क, 2,355 नर्स, 2,267 चपरासी, 1,467 मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर, 1,248 मेडिकल अधिकारी (जनरल), 1,214 पटवारी और 1,129 जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।

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Himanshu Negi

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हिमांशू नेगी को देश-विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने GGSIPU से संबद्ध LLDIMS कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन (BJMC) की पढ़ाई की है। इसके बाद HNBGU Central University से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MAJMC) पूरा किया और पत्रकारिता की शुरुआत की। दैनिक जागरण और IJCP Pvt Ltd. में इंटर्नशिप करने के बाद उन्होंने सुदर्शन टीवी चैनल में 9 PM शो के लिए प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

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