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Punjab News: पंजाब में प्राइवेट स्कूलों पर CM मान का बड़ा एक्शन! 5% से ज्यादा फीस बढ़ाने पर रोक, लौटानी होगी अतिरिक्त वसूली

08:27 PM Jun 03, 2026 IST | Amit Kumar
punjab news  पंजाब में प्राइवेट स्कूलों पर cm मान का बड़ा एक्शन  5  से ज्यादा फीस बढ़ाने पर रोक  लौटानी होगी अतिरिक्त वसूली
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Punjab News: पंजाब में निजी स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस से परेशान लाखों अभिभावकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली सरकार ने निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी निजी स्कूल हर साल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा।

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सरकार का कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों और उनके परिवारों को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए लिया गया है। नए नियम लागू होने के बाद फीस बढ़ोतरी की मनमानी पर रोक लगेगी और स्कूलों की जवाबदेही भी तय होगी।

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Punjab News: हर साल सिर्फ 5 फीसदी तक बढ़ सकेगी फीस

सरकार द्वारा प्रस्तावित नए कानून के अनुसार राज्य के सभी निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की एक निश्चित सीमा का पालन करना होगा। अब स्कूल अपनी वार्षिक फीस में अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही वृद्धि कर पाएंगे। यह नियम केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि स्कूलों द्वारा लिए जाने वाले अन्य अनिवार्य शुल्क, फंड और चार्जेज पर भी लागू होगा। सरकार का मानना है कि कई संस्थान अलग-अलग नामों से अतिरिक्त शुल्क लेकर अभिभावकों पर आर्थिक दबाव डालते हैं। नए नियम ऐसे सभी रास्तों को बंद करने का प्रयास करेंगे।

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तीन साल में ज्यादा फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर कार्रवाई

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सरकार ने उन स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर ली है जिन्होंने पिछले तीन वर्षों के दौरान फीस में अत्यधिक वृद्धि की है। यदि किसी स्कूल ने इस अवधि में कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है तो उससे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को लौटानी होगी। इसके साथ ही ऐसे मामलों की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर स्कूलों के खिलाफ जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि इस संबंध में एक नया कानून आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने इसे देश में निजी स्कूल फीस नियंत्रण से जुड़ा सबसे सख्त कानून बताया है। सरकार का दावा है कि कानून लागू होने के बाद किसी भी निजी स्कूल को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलेगी और सभी संस्थानों को तय नियमों का पालन करना होगा।

मुख्यमंत्री को मिले अभिभावकों के सैकड़ों फोन

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि हाल ही में उन्हें निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर अभिभावकों के बड़ी संख्या में फोन और शिकायतें मिली थीं। उन्होंने कहा कि कई परिवार स्कूल फीस के कारण आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और अभिभावकों को राहत मिले, इसलिए सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की लूट-खसोट अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया कानून लागू होने के बाद किसी भी स्कूल को विशेष छूट नहीं दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा संस्थान केवल उचित खर्चों के आधार पर फीस तय करें और शिक्षा को मुनाफा कमाने का साधन न बनाया जाए।

2019 के संशोधन को बताया समस्या की जड़

मुख्यमंत्री के अनुसार फीस बढ़ोतरी की समस्या 2019 में किए गए कानूनी संशोधनों के बाद ज्यादा बढ़ी। पहले कानून में फीस बढ़ाने की सीमा तय थी, लेकिन बाद में कुछ बदलावों के जरिए स्कूलों को अधिक फीस बढ़ाने की छूट मिल गई। हालांकि स्कूलों को फीस वृद्धि की जानकारी सार्वजनिक करने की शर्त रखी गई थी, लेकिन इसका प्रभावी पालन नहीं हुआ। नतीजा यह हुआ कि कई स्कूलों ने लगातार फीस बढ़ाई और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।

पहले क्या थे नियम?

पंजाब में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस व्यवस्था "पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट 2016" के तहत संचालित होती है। इस कानून में यह व्यवस्था थी कि स्कूल हर साल फीस में सीमित बढ़ोतरी ही कर सकते हैं। साथ ही कैपिटेशन फीस और मुनाफाखोरी पर भी रोक लगाई गई थी। लेकिन समय के साथ नियमों के कमजोर क्रियान्वयन के कारण स्थिति बदलती गई।

शिकायतों की होगी दोबारा जांच

सरकार ने संकेत दिए हैं कि फीस बढ़ोतरी से संबंधित सभी लंबित शिकायतों की समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में अभिभावकों ने पहले शिकायत दर्ज कराई थी, उन्हें दोबारा जांच के दायरे में लाया जा सकता है। सरकार चाहती है कि पुराने मामलों में भी न्याय सुनिश्चित किया जाए और यदि किसी स्कूल ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। मौजूदा व्यवस्था के तहत अभिभावकों को फीस बढ़ोतरी के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार पहले से प्राप्त है। इसके लिए जिला स्तर पर एक नियामक संस्था बनाई गई है। यह संस्था शिकायत मिलने के बाद निर्धारित समय सीमा में जांच करती है और संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुनाती है। संस्था को कई मामलों में दीवानी अदालत जैसी शक्तियां भी प्राप्त हैं।

रेगुलेटरी बॉडी की भूमिका होगी मजबूत

नए ढांचे के तहत नियामक संस्था को और अधिक शक्तियां दिए जाने की संभावना है। यह संस्था स्कूलों की फीस संरचना की निगरानी करेगी और यह जांचेगी कि बढ़ाई गई फीस वास्तव में आवश्यक खर्चों के कारण है या नहीं। यदि किसी स्कूल द्वारा अनुचित तरीके से फीस बढ़ाने का मामला सामने आता है तो संस्था हस्तक्षेप कर सकेगी और आवश्यक कार्रवाई कर पाएगी। सरकार केवल फीस वृद्धि ही नहीं बल्कि स्कूलों द्वारा एकत्र किए गए धन के उपयोग पर भी नजर रखने की तैयारी कर रही है। नियामक संस्था यह सुनिश्चित करेगी कि विद्यार्थियों से लिए गए पैसे का उपयोग शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और स्कूल विकास जैसे कार्यों में ही किया जाए। धन का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा।

नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना

सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के लिए सख्त दंड का प्रावधान भी रखा है। पहली बार नियम तोड़ने पर स्कूलों पर हजारों रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई संस्थान बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर और अधिक आर्थिक दंड लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि केवल चेतावनी देने के बजाय सख्त आर्थिक कार्रवाई से ही नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सकता है। यदि कोई स्कूल लगातार नियमों की अनदेखी करता है और बार-बार उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तीसरी बार गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर स्कूल की मान्यता या संबद्धता रद्द करने तक का प्रावधान रखा गया है। इससे निजी स्कूलों पर नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा।

वित्तीय ऑडिट कराने पर भी विचार

सरकार निजी स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के लिए विशेष ऑडिट व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की एक समिति बनाई जा सकती है जो स्कूलों के पिछले तीन से पांच वर्षों के खातों की जांच करेगी। इसमें फीस वसूली, खर्च, कर्मचारियों के वेतन, बुनियादी ढांचे पर निवेश और अन्य वित्तीय गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। सरकार का मानना है कि वित्तीय ऑडिट से यह पता लगाया जा सकेगा कि स्कूलों द्वारा की गई फीस बढ़ोतरी वास्तव में जरूरी थी या नहीं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि फीस बढ़ोतरी का कोई उचित आधार नहीं था और केवल मुनाफा कमाने के उद्देश्य से शुल्क बढ़ाया गया था, तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अभिभावकों और विद्यार्थियों को क्या होगा फायदा?

नए नियम लागू होने के बाद सबसे बड़ा लाभ अभिभावकों और विद्यार्थियों को मिलेगा। फीस में अचानक और अत्यधिक बढ़ोतरी पर रोक लगने से परिवारों का आर्थिक बोझ कम होगा। इसके अलावा शिकायत दर्ज कराने और न्याय पाने की प्रक्रिया भी मजबूत होगी। अभिभावकों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी शिकायतों पर सुनवाई होगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कोशिश

सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य निजी स्कूलों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना है। फीस निर्धारण से लेकर धन के उपयोग तक सभी प्रक्रियाओं पर निगरानी रखी जाएगी। इससे शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ेगी और अभिभावकों तथा स्कूलों के बीच विश्वास मजबूत होगा। बता दें, कि पंजाब  सरकार द्वारा प्रस्तावित नया फीस नियंत्रण कानून निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वार्षिक फीस वृद्धि को 5 प्रतिशत तक सीमित करने, अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस कराने, वित्तीय ऑडिट कराने और नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई जैसे प्रावधानों से लाखों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह कानून शिक्षा को व्यवसाय बनने से रोकने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

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