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PGI चंडीगढ़ में राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े का समापन, लोगों को बताया नेत्रदान का महत्व

Punjab News: चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलाया गया राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और इससे जुड़े कई तरह के भ्रम दूर करने की कोशिश की गई।
04:57 PM Sep 05, 2026 IST | Pankhil Verma
Punjab News: चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलाया गया राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और इससे जुड़े कई तरह के भ्रम दूर करने की कोशिश की गई।
pgi चंडीगढ़ में राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े का समापन  लोगों को बताया नेत्रदान का महत्व
Punjab News (credit social media )

Punjab News: चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलाया गया राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और इससे जुड़े कई तरह के भ्रम दूर करने की कोशिश की गई। पखवाड़े के दौरान स्कूलों, कॉलेजों और नर्सिंग संस्थानों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को नेत्रदान के बारे में समझाने के लिए पोस्टर, स्लोगन, निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिताएं कराई गईं।

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इसके साथ ही जागरूकता सत्र भी हुए, जिनमें विशेषज्ञों ने बताया कि मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति की आंखें दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकती हैं। युवाओं को अभियान से जोड़ने के लिए रॉक गार्डन से सुखना लेक तक वॉक और जागरूकता रैली भी निकाली गई। इसके अलावा नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों तक नेत्रदान का संदेश पहुंचाया गया।

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लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प

अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया गया। इच्छुक लोगों से प्लेज यानी नेत्रदान संकल्प फॉर्म भरवाए गए। इसका उद्देश्य लोगों को मृत्यु के बाद आंखें दान करने के लिए पहले से संकल्प लेने के लिए प्रोत्साहित करना था। डॉ. पारुल चावला गुप्ता ने बताया कि नेत्रदान को लेकर लोगों में कई तरह की गलतफहमियां हैं। उन्होंने कहा कि ‘प्लेज’ व्यक्ति की मृत्यु से पहले लिया जाने वाला संकल्प है, जबकि वास्तविक नेत्रदान मृत्यु के बाद किया जाता है।

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डॉ. उषा सिंह ने बताया कि मृत्यु के बाद आंखों को जल्द से जल्द सुरक्षित करना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर मृत्यु के कुछ घंटों के भीतर नेत्रदान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंखें दान करने से मृत व्यक्ति के चेहरे का रूप खराब नहीं होता। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि इन गलत धारणाओं पर भरोसा न करें और जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए नेत्रदान का संकल्प लें।

एक दान से कई मरीजों को मिल सकती है रोशनी

पीजीआई के विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से कॉर्निया की अलग-अलग परतों का उपयोग अलग-अलग मरीजों के इलाज में किया जा सकता है। यानी एक व्यक्ति के नेत्रदान से एक से अधिक लोगों की दृष्टि बहाल करने में मदद मिल सकती है। पीजीआई में कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सफलता दर करीब 73 प्रतिशत बताई गई है। यह उन मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद है, जिनकी आंखों की रोशनी कॉर्निया से जुड़ी समस्या के कारण चली गई है।

डॉ. पारुल चावला गुप्ता ने केराटोकोनस से पीड़ित एक मरीज के सफल कॉर्नियल ट्रांसप्लांट का उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज मिलने पर कई मरीजों की दृष्टि वापस लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दान की गई आंखों से जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी और रोशनी मिल सकती है।

सम्मानित किए गए नेत्रदान से जुड़े लोग

पखवाड़े के समापन समारोह में नेत्रदान करने वाले परिवारों, कॉर्निया प्राप्त करने वाले मरीजों और अभियान के दौरान जागरूकता फैलाने वाले छात्रों व संस्थाओं को सम्मानित किया गया। उनके योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया गया। पीजीआई ने लोगों से अपील की कि वे नेत्रदान के बारे में सही जानकारी हासिल करें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें।

हेल्पलाइन से मिलेगी जानकारी

नेत्रदान का संकल्प लेने या इससे जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए लोग पीजीआई आई बैंक से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए पीजीआई की हेल्पलाइन 7087008200 पर संपर्क किया जा सकता है। नेत्रदान संकल्प के लिए उपलब्ध क्यूआर कोड का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

नेत्रदान केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति की जिंदगी में रोशनी लौटाने का माध्यम है। इसी संदेश के साथ पीजीआई में आयोजित जागरूकता पखवाड़े का समापन हुआ।

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