वेतन आयोग बकाया विवाद पर पंजाब सरकार की सफाई, हरपाल चीमा ने पूर्व सरकारों को ठहराया जिम्मेदार
Punjab News: पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के वेतन आयोग से जुड़े सभी कानूनी और संवैधानिक रूप से मान्य बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पिछली शिरोमणि अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण पंजाब पर वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय बोझ आया। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार अब तक इस राशि में से 6,000 करोड़ रुपये से अधिक कर्मचारियों को दे चुकी है।
पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब पहले से ही देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां सरकारी कर्मचारियों को सबसे अधिक वेतन दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कई पदों पर राज्य सरकार का वेतनमान केंद्र सरकार से भी बेहतर है। ऐसे में सरकार कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रख रही है, लेकिन उसे पिछली सरकारों से मिले वित्तीय बोझ का भी सामना करना पड़ रहा है।
2016 में तैयार हुई थी वेतन आयोग की रिपोर्ट

वित्त मंत्री ने बताया कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के समय तैयार कर ली गई थी। हालांकि उस समय इसे लागू नहीं किया गया। इसके बाद कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जुलाई 2021 में इस रिपोर्ट को लागू किया गया, लेकिन 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान नहीं किया गया। इसी वजह से राज्य पर 14,191 करोड़ रुपये की अतिरिक्त देनदारी बन गई।
हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में वेतन आयोग लागू तो किया, लेकिन कर्मचारियों के बकाये के भुगतान के लिए एक भी रुपया जारी नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद यह पूरा वित्तीय भार आम आदमी पार्टी सरकार को उठाना पड़ा। इसके बावजूद मौजूदा सरकार ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए भुगतान की प्रक्रिया शुरू की।
हाईकोर्ट की मंजूरी से बनी भुगतान योजना

वित्त मंत्री ने बताया कि कई कर्मचारियों ने बकाये की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद पंजाब सरकार ने एक चरणबद्ध भुगतान योजना तैयार की, जिसे हाईकोर्ट ने भी मंजूरी दी। इस योजना के तहत अब तक 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि कर्मचारियों को दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना के अनुसार आगे भी भुगतान करती रहेगी।
महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर हाईकोर्ट के हालिया फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार इस फैसले का गहराई से अध्ययन कर रही है। उनके अनुसार एकल पीठ के फैसले में कुछ संवैधानिक पहलुओं और पहले दिए जा चुके न्यायिक फैसलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। इसलिए सरकार कानूनी विशेषज्ञों की सलाह लेकर आगे की रणनीति तय करेगी।
जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की कानूनी टीम फैसले की समीक्षा कर रही है। यदि आवश्यक हुआ तो राज्य सरकार इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि राज्य के हितों और कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जा सके। चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक मूल वेतन दे रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का तर्क है कि यदि पहले से ही कर्मचारियों को अधिक मूल वेतन दिया जा रहा है, तो उसी समय केंद्र सरकार के बराबर सबसे अधिक महंगाई भत्ता देना वित्तीय रूप से संभव नहीं होता। यही बात सरकार ने अदालत के सामने भी रखी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में नए भर्ती कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के नियमों के तहत शामिल करने का फैसला लिया था। इसलिए मौजूदा स्थिति के लिए पिछली सरकारों की नीतियां भी जिम्मेदार हैं।
सरकार ने कर्मचारियों को दिया भरोसा
प्रेस वार्ता के अंत में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार कर्मचारियों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी बकाये संवैधानिक और कानूनी रूप से सही होंगे, उनका भुगतान पूरी पारदर्शिता और योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों से मिले भारी वित्तीय बोझ के बावजूद आम आदमी पार्टी सरकार राज्य की आर्थिक स्थिति को संतुलित रखते हुए कर्मचारियों की सभी वैध देनदारियों का समाधान करने के लिए लगातार काम कर रही है।
Amit Kumar
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अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

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