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6 महीने में 914 लोगों को मिला फ्री कैशलेस इलाज! पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी स्ट्रोक मरीजों के लिए वरदान

06:34 PM Jul 15, 2026 IST | Amit Kumar
6 महीने में 914 लोगों को मिला फ्री कैशलेस इलाज  पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी स्ट्रोक मरीजों के लिए वरदान
Punjab Stroke Treatment Scheme (credit social media )

Punjab Stroke Treatment Scheme: पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। खासकर स्ट्रोक (ब्रेन स्ट्रोक) जैसे मामलों में यह योजना मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक मदद देने के काम कर रही है। पिछले 6 महीनों में इस योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का करीब 4.15 करोड़ रुपये की लागत से कैशलेस इलाज किया गया। इससे मरीजों को इलाज के लिए अपनी जेब से एक भी पैसा नहीं लगाना पड़ा है।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि  स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। अगर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू कर दिया जाए तो उसकी जान बचने और जल्दी ठीक होने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है।  इलाज में थोड़ी भी देरी मरीज की हालात को  सीरियस बना सकती है। इस बीच  पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि किसी भी परिवार को पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। मुख्यमंत्री सेहत योजना का उद्देश्य यही है कि जरूरत पड़ने पर मरीजों को बिना आर्थिक चिंता के तुरंत इलाज मिल सके।

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6 महीने में 914 मरीजों को मिला लाभ

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आंकड़ों के मुताबिक,  पिछले6  महीनों में स्ट्रोक से झूझ रहे  914 मरीजों का कैशलेस इलाज  किया गया। इस दौरान उनके ट्रीटमेंट पर कुल 4.15 करोड़ रुपये खर्च हुए। इन मरीजों में एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले सामने आए, जिनके इलाज पर लगभग 14.27 लाख रुपये खर्च किए गए।  इसके अलावा एक्यूट स्ट्रोक के भी बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया गया। वहीं, हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले कम रहे, लेकिन इन मरीजों के इलाज का खर्च ज्यादा रहा क्योंकि इनमें एक्स्ट्रा मेडिकल प्रोसेस  की जरूरत पड़ी।

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बता दें कि स्ट्रोक के सही इलाज के लिए मरीज की तुरंत जांच होना जरूरी होता है।  इसलिए सीटी स्कैन और MRI जैसी मॉडर्न जांच तकनीकों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया। कई गंभीर मरीजों को ट्रेकियोस्टॉमी, खून  चढ़ाने और अन्य स्पेशल मेडिकल सर्विस  की भी आवश्यकता पड़ी, जिससे इलाज  का खर्च बढ़ गया। एक्सपर्ट  का कहना है कि समय पर सही जांच और मॉडर्न ट्रीटमेंट  मिलने से मरीज की रिकवरी बेहतर होती है और लंबे समय तक होने वाली विकलांगता का खतरा भी कम हो सकता है।

दुनिया में मौत और विकलांगता की बड़ी वजह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्ट्रोक दुनिया में मौत और स्थायी विकलांगता के प्रमुख वजहों  में शामिल है। वहीं, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) का भी मानना है कि अगर  मरीज को समय रहते इलाज मिल जाए तो उसकी हालात में  काफी सुधार हो सकता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि  हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग, मोटापा और अन्फिट लाइफस्टाइल  स्ट्रोक के बड़े कारण हैं। इन जोखिमों को कंट्रोल  करके इस बीमारी की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का टारगेट  राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना  है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए  से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी मरीज का इलाज केवल आर्थिक परेशानी की वजह से न रुके। स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति में समय पर इलाज मिलना जीवन बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

स्ट्रोक से बचने के आसान उपाय

  • ब्लड प्रेशर को हमेशा कंट्रोल  में रखें।
  • डायबिटीज की रेगुलर  जांच और सही इलाज कराएं।
  • स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाएं।
  • रोजाना एक्सर्साइज करें और संतुलित भोजन करें।
  • शरीर में अचानक कमजोरी, बोलने में दिक्कत या चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा होने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें।

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अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

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