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Anti Drug Campaign in Punjab: मानसिक स्वास्थ्य लीडर दे रहे पंजाब के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को मज़बूती, फेलोज़ के लिए अगस्त से आवेदन

पंजाब सरकार ने फरवरी 2026 में नशे के विरुद्ध देश की पहली फेलोशिप ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी)’ शुरू की थी। युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
11:46 AM Jul 31, 2026 IST | Himanshu Negi
पंजाब सरकार ने फरवरी 2026 में नशे के विरुद्ध देश की पहली फेलोशिप ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी)’ शुरू की थी। युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
anti drug campaign in punjab  मानसिक स्वास्थ्य लीडर दे रहे पंजाब के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को मज़बूती  फेलोज़ के लिए अगस्त से आवेदन
Anti Drug Campaign in Punjab

नशे की लत से निपटने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मज़बूत करते हुए पंजाब सरकार ने फरवरी 2026 में नशे के विरुद्ध देश की पहली फेलोशिप ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी)’ शुरू की थी। इस कार्यक्रम के पहले बैच के 13 फेलो अब पूरे पंजाब में कार्यरत हैं और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

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एलएमएचपी फेलो मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाले ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग प्रदान कर रहे हैं तथा नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई में स्वास्थ्य एवं समुदाय-प्रथम दृष्टिकोण को मज़बूत कर रहे हैं। यह राज्य की मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है कि रिहैबिलिटेशन, पंजाब के नशा विरोधी अभियान का मूल आधार बना रहे।

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दूसरे बैच के लिए आवेदन प्रक्रिया

अब, पंजाब सरकार इस कार्यक्रम के दूसरे बैच के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रही है —10 फेलो और 7 सीनियर एसोसिएट— इसका उद्देश्य राज्य के सभी 23 ज़िलों में प्रशिक्षित युवा पेशेवरों का एक मज़बूत नेटवर्क तैयार करना है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन तथा राज्य की डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (DITSU) के निकट सहयोग से संचालित एलएमएचपी का उद्देश्य ऐसे कुशल मानसिक स्वास्थ्य नेताओं की टीम तैयार करना है।

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जो पूरे राज्य में साक्ष्य आधारित नशे की रोकथाम और रिहैबिलिटेशन गतिविधियों का प्रभावी संचालन कर सकें। एलएमएचपी फेलो मनोविज्ञान, जनस्वास्थ्य और सामाजिक कार्य जैसे विविध क्षेत्रों से आने वाले पेशेवर हैं, जिन्होंने दो वर्षों तक राज्य के नशा विरोधी अभियान में योगदान देने का संकल्प लिया है। कठोर चयन प्रक्रिया के बाद चुने गए इन फेलोज़ को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहयोग, पुनः नशे की ओर लौटने की रोकथाम (रिलैप्स प्रिवेंशन), कार्यक्रम प्रबंधन, सामुदायिक आधारित रिहैबिलिटेशन तथा नेतृत्व क्षमता का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण, कार्यक्रम के चयन एवं ज्ञान सहयोगी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (टीआईएसएस), मुंबई के सहयोग से आयोजित किया जाता है।

कार्यक्रम का उद्देश्य

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य नेतृत्व और संवेदनशीलता का समन्वय स्थापित कर परिवारों को फिर से जोड़ना तथा पूरे राज्य में नई आशा का संचार करना है। उन्होंने कहा, “युद्ध नशेआं विरुद्ध केवल नशे के ख़िलाफ़ अभियान नहीं, बल्कि पंजाब के युवाओं को वापस सही राह पर लाने का एक जन आंदोलन है।

एक ओर हम नशा तस्करों और ड्रग नेटवर्क के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हम यह सुनिश्चित करने के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध हैं कि नशे के शिकार प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्ण जीवन में लौटने का अवसर मिले और युवाओं को नशे की गिरफ़्त में जाने से रोका जा सके। ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ इस विश्वास का प्रतीक है कि पंजाब को नशा मुक्त तभी बनाया जा सकता है, जब कानूनी कार्रवाई ,उपचार और रोकथाम—तीनों एक मज़बूत स्वास्थ्य व्यवस्था और सामुदायिक सहयोग के साथ मिलकर काम करें।”

नशे की लत एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या

उन्होंने आगे कहा कि नशे की लत एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है। विभिन्न ज़िला अस्पतालों तथा नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन केंद्रों में अपनी नियुक्ति के दौरान ये फेलो नशे की समस्या को केवल व्यक्तिगत बीमारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती के रूप में समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं। वे परिवारों के साथ संवाद करते हैं, नशे से उत्पन्न पारिवारिक संकटों को कम करने में मदद करते हैं, मरीज़ों को उपचार से जोड़ते हैं, पुनः नशे की ओर लौटने से रोकने में सहयोग करते हैं तथा इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन को बढ़ावा देते हैं। साथ ही, वे सामाजिक बदनामी की भावना को कम करने, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और नशा मुक्ति कार्यक्रम पूरा करने के बाद भी मरीज़ों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देते हैं।

‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान

ज़िला स्तर पर नेतृत्व प्रदान करने के अलावा, एलएमएचपी के पहले बैच के फेलो स्वास्थ्यकर्मियों को सहयोग देने, सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने और नशे के विरुद्ध अभियान में प्रभावी कार्यप्रणालियों को संस्थागत रूप देने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ का पहला बैच समाज में नशे और मादक पदार्थों के सेवन को समझने तथा उससे निपटने के तरीके में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। पंजाब अपने ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के केंद्र में मानसिक स्वास्थ्य को रखते हुए यह मानता है कि नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई केवल इसकी आपूर्ति रोकने तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के मन को स्वस्थ बनाने, परिवारों को फिर से जोड़ने और संवेदनशीलता व देखभाल के साथ उन्हें नई ज़िंदगी देने का प्रयास भी है।

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Himanshu Negi

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हिमांशू नेगी को देश-विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने GGSIPU से संबद्ध LLDIMS कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन (BJMC) की पढ़ाई की है। इसके बाद HNBGU Central University से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MAJMC) पूरा किया और पत्रकारिता की शुरुआत की। दैनिक जागरण और IJCP Pvt Ltd. में इंटर्नशिप करने के बाद उन्होंने सुदर्शन टीवी चैनल में 9 PM शो के लिए प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

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