पटाखा फैक्ट्री में छापा, लाखों के पटाखे जब्त

पश्चिमी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी द्वारा दीपावली पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद दिल्ली में कुछ  कथित कारोबारी पटाखे बेचने का प्रयास कर रहे हैं। उनपर दिल्ली पुलिस की पैनी नजर है। इसी के तहत नरेला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस ने एक पटाखा फैक्ट्री व गोदाम में छापा मारकर करीब 50 लाख रुपए के पटाखे व सामग्री व कच्चा माल बरामद किया है। 

पुलिस ने फैक्ट्री मालिक सहित 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान राजकुमार गोयल और दीपक के रुप में हुई है। राजकुमार गोयल फैक्ट्री मालिक है, जबकि दीपक टैंपो चालक है। जोकि काफी समय से पटाखों को फैक्ट्री से ले जाकर सप्लाई कर रहा था। दोनों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने फैक्ट्री व टैंपों लोढ हुए 14 टन तैयार पटाखे, 10 टन कच्चा मेट्रियल, 10 मशीनें, पैकिंग सामग्री और एक टाटा ऐश वाहन बरामद किया है। 

पुलिस फैक्ट्री मालिक से पूछताछ कर रही है। फैक्ट्री मालिक ने पटाखों पर प्रतिबंध के बाद ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए चोरी-छूपे पटाखों को बनाने का काम कर रखा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलाके स्थित फैक्ट्री व गोदामों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जिससे इस तरह की गतिविधियों के बारे में पता लग सके। डीसीपी गौरव शर्मा के अनुसार, नरेला इंडस्ट्रियल पुलिस इलाके में गश्त कर रही थी। उन्होंने वाहन चैकिंग के दौरान एक टेंपो को पकड़ा था। जिसके चालक ने मौके से फरार होने की कोशिश की। 

टैंपो की तलाशी लेने पर  45 पेटी ज्वलनशील व प्रतिबंधित पटाखे भरे हुए थे। चालक दीपक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे गोदाम व फैक्ट्री का पता चला। वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। उसके बाद दीपक की निशानदेही पर पुलिस टीम ने फैक्ट्री व गोदाम में छापा मारा। मौके से काफी संख्या में प्रतिबंधित पटाखे मिले। पुलिस को 669 बड़े पटाखों से भरे हुए बड़े कार्टून साथ ही फैक्ट्री में 10 टन पटाखे बनाने का मेटेरियल बरामद हुआ। साथ ही वहां पर पटाखे बनाने में प्रयोग होने वाले 3 बड़े एसिड के ड्रम, 10 मशीनें, जो पटाखे बनाने के काम में प्रयोग की जा रही थी। 

पुलिस ने आईपीसी धारा 285, 286 के तहत मामला दर्ज कर फैक्ट्री मालिक राज कुमार गोयल को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी ने बताया कि इन पटाखों की सप्लाई दिल्ली से हरियाणा के सोनीपत में होनी थी। जांच में पता चला है कि तीन महीने पहले ही फैक्ट्री में पटाखा बनाने का काम शुरु हुआ था। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो मौके पर आग बुझाने के उपकरण तक नहीं थे। अगर मौके पर आग लगती तो शायद पिछले साल बवाना इलाके में जिस तरह से गुपचुप तरीके से पटाखे बनाते समय ब्लास्ट हुआ, जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई। इस फैक्ट्री में भी बवाना की तरह उससे भी बड़ा हादसा हो सकता था।  
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