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गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ जांच का विरोध करने वाली याचिका पर राजस्थान HC ने गहलोत सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें सहकारी समिति घोटाला मामले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अन्य के खिलाफ जांच का निर्देश देने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।
गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ जांच का विरोध करने वाली याचिका पर राजस्थान HC ने गहलोत सरकार से मांगा जवाब
राजस्थान हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें सहकारी समिति घोटाला मामले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अन्य के खिलाफ जांच का निर्देश देने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।

हाई कोर्ट ने हालांकि, निचली अदालत के आदेश पर रोक नहीं लगाई है। निचली अदालत ने विशेष अभियान समूह (एसओजी) को 884 करोड़ रुपये के संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले के सिलसिले में शेखावत की भूमिका की जांच का आदेश दिया था। यह आदेश शेखावत से संबंधित बताए जाने वाले नवप्रभा बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के अंशधारक निदेशक केवल चंद डकालिया की याचिका पर दिया गया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मुंबई से याचिकाकर्ता की तरफ से मामले में जिरह की। उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से पांच अगस्त तक अपना जवाब देने को कहा है। शहर की एक एडीजे अदालत ने पिछले हफ्ते निर्देश दिया था कि संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाला मामले में रुपयों के लेन-देन की पड़ताल एसओजी द्वारा की जानी चाहिए।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पवन कुमार ने 21 जुलाई को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को निर्देश दिया था कि वह घोटाले से संबंधित शिकायत एसओजी को भेजे। संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले की शिकायत में शेखावत, उनकी पत्नी और अन्य लोगों का नाम है। इस घोटाले में हजारों निवेशकों के कथित तौर पर करीब 884 करोड़ रुपये डूब गये।

एसओजी की जयपुर शाखा बीते एक साल से मामले की जांच कर रही है। इस मामले में 23 अगस्त 2019 को एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले के संबंध में एसओजी द्वारा दायर आरोप-पत्र में शेखावत का नाम आरोपियों में शामिल नहीं था। जांच में पाया गया कि रुपयों का लेन-देन नवप्रभा बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है।

बाद में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने शेखावत का नाम आरोप-पत्र में शामिल किये जाने के अनुरोध को खारिज कर दिया था। आवेदक इसके बाद अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में गया, जिसने निर्देश दिया कि उनकी शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए।

मजिस्ट्रेट की अदालत में दी गई शिकायत में शिकायतकर्ता गुलाम सिंह और लाबू सिंह ने दावा किया था कि एफआईआर में रुपयों के जिस लेन-देन का जिक्र है वो उन कंपनियों से जुड़ा है जिनका संबंध मंत्री से है। बाड़मेर में रहने वाले दोनों लोगों ने आरोप लगाया कि एसओजी ने लेकिन शेखावत या कंपनी की भूमिका की जांच नहीं की। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि एसओजी ने जानबूझ कर शेखावत और कुछ अन्य लोगों को बचाया जो आरोप-पत्र में शामिल नहीं थे।
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