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एथेनॉल पर अफवाहों से बचें, इंजन को कोई नुकसान नहीं : हरदीप सिंह पुरी

09:16 PM Jul 04, 2026 IST | Avinay
एथेनॉल पर अफवाहों से बचें  इंजन को कोई नुकसान नहीं   हरदीप सिंह पुरी
Jodhpur : एथेनॉल पर अफवाहों से बचें, इंजन को कोई नुकसान नहीं : हरदीप सिंह पुरी

प्रगनेश सिंह

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Jodhpur : केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर फैल रही आशंकाओं को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि एथेनॉल से इंजन खराब होने या वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसी बातें सिर्फ अफवाह हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में दशकों से एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग हो रहा है और भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह भ्रम फैलाया गया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से इंजन खराब हो जाएगा या फ्यूल पंप प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह गलत है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण वाहन निर्माता कंपनियां स्वयं दे रही हैं।

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उन्होंने बताया कि मारुति सुजुकी करीब 2.8 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग करती है, जिनमें 2023 से पहले बने लगभग 1.5 करोड़ वाहन भी शामिल हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रित ईंधन से इंजन खराब होने की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है।

उन्होंने कहा कि एथेनॉल कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि दुनिया में सौ वर्षों से इसका इस्तेमाल हो रहा है। भारत में भी इसकी परिकल्पना वर्षों पहले की गई थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे तेजी से लागू किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री पूरी ने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद देश में दूसरी बार बड़ी रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित की गई है। आने वाले महीनों में कई नई रिफाइनरियां भी शुरू होंगी, जिससे देश की रिफाइनिंग क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

दुनिया के कई देशों में रिफाइनिंग क्षमता घट रही

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में रिफाइनिंग क्षमता घट रही है। अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में कोई नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी नहीं बनी, यूरोप में क्षमता लगातार कम हो रही है और चीन में छोटी रिफाइनरियां बंद हो रही हैं, जबकि भारत लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।

पुरी ने कहा कि भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा अभी भी आयात करता है, इसलिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से 'समुद्र मंथन' अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत अगले तीन वर्षों में समुद्र में बड़े पैमाने पर नए तेल और गैस कुओं की खोज की जाएगी। इसके लिए हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बड़े पैमाने पर नए भंडार मिले तो भारत की आयात निर्भरता काफी घट सकती है।

सरकार अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर समान रूप से काम कर रही

उन्होंने कहा कि भविष्य केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार एथेनॉल, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोफ्यूल और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर समान रूप से काम कर रही है, ताकि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पूरा किया जा सके।

मंत्री ने कहा कि वैश्विक संकटों के दौरान भी भारत ने ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं होने दी। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कहीं कमी नहीं आई और सरकार ने समय रहते उत्पादन बढ़ाकर आम उपभोक्ताओं को राहत दी। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत मॉडल बनकर उभर रहा है।

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