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Kota Medical College Maternal Death Case: कोटा में डिलीवरी के बाद 4 महिलाओं की मौत, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर लगी रोक, 11 दवाओं के सैंपल भी फेल

10:47 AM May 26, 2026 IST | Bhawana Rawat
kota medical college maternal death case  कोटा में डिलीवरी के बाद 4 महिलाओं की मौत  ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर लगी रोक  11 दवाओं के सैंपल भी फेल
Kota Medical College Maternal Death Case

Kota Medical College Maternal Death Case: राजस्थान में प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को ब्लीडिंग रोकने दी जाने वाली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। राज्य के डिपार्टमेंट ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए ऑक्सीटोसिन आधारित एक इंजेक्शन के विशेष बैच की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। ये खुलासा ऐसे समय पर हुआ, जब कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद 4 महिलाओं की मौत का मामला सामने आया था। जानकारी के अनुसार, इन महिलाओं को भी इसी बैच का इंजेक्शन लगाया गया था।

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इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन कंपोनेंट निर्धारित मात्रा से कम

राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की जांच में सामने आया कि इंजेक्शन में मौजूद ऑक्सीटोसिन कंपोनेंट निर्धारित मात्रा से कम था, जो प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए जरुरी होता है। ऐसे में संबंधित बैच को "नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी" मानते हुए, उसकी बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही मेडिकल स्टोरों से इसका स्टॉक हटाने के निर्देश जारी किए हैं।

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Kota Preganant Women Deaths: अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?

Kota Medical College Maternal Death Case
Kota Preganant Women Deaths (Image- Social Media)

अस्पताल प्रशासन ने महिलाओं की मौत का सीधा संबंध इस इंजेक्शन से मानने से फ़िलहाल मना कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, मामले की बारीकी से जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की गई है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य मेडिकल रिपोर्टों के विश्लेषण के बाद ही किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने से पहले कोई भी दावा करना जल्दबाज़ी होगी।

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11 दवाओं के सैंपल हो चुके हैं फेल

इस घटना के बाद राजस्थान में दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बीते दस दिनों में ही राज्य में बिकने वाली 11 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं, जिनमें बुखार, एलर्जी, एंटीबायोटिक, पेट के संक्रमण और इमरजेंसी पेनकिलर जैसी ज़रूरी दवाइयां शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, ये दवाएं राजस्थान समेत हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र की कंपनियों में बनी थीं। अब इन कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की नियमित और कड़ी जांच बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इसमें हुई एक छोटी सी लापरवाही भी मरीज़ों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

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Bhawana Rawat

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भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।

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