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राजस्थान पुलिस की बड़ी लापरवाही: 26 साल पहले मर चुके शख्स के वारंट पर सिपाही को भेजा जेल, 166 दिन बाद रिहाई

राजस्थान पुलिस की एक बड़ी लापरवाही के कारण बेकसूर सिपाही को 166 दिन जेल में काटने पड़े। पुलिस ने 26 साल पहले मर चुके एक आरोपी के स्थायी वारंट पर नाम के भ्रम में लखनऊ में तैनात सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद एसपी ने कोर्ट में माफी मांगी, तब जाकर सिपाही की रिहाई हो सकी।
03:42 PM Aug 19, 2026 IST | Rohit Singh
राजस्थान पुलिस की एक बड़ी लापरवाही के कारण बेकसूर सिपाही को 166 दिन जेल में काटने पड़े। पुलिस ने 26 साल पहले मर चुके एक आरोपी के स्थायी वारंट पर नाम के भ्रम में लखनऊ में तैनात सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद एसपी ने कोर्ट में माफी मांगी, तब जाकर सिपाही की रिहाई हो सकी।
राजस्थान पुलिस की बड़ी लापरवाही  26 साल पहले मर चुके शख्स के वारंट पर सिपाही को भेजा जेल  166 दिन बाद रिहाई
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Rajasthan News : राजस्थान की सवाई माधोपुर पुलिस की गंभीर लापरवाही के कारण उत्तर प्रदेश पुलिस के एक बेकसूर सिपाही को 166 दिनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा।

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पुलिस ने करीब 26 साल पहले मर चुके एक आरोपी के स्थायी गिरफ्तारी वारंट पर लखनऊ में सुरक्षा में तैनात सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था। यह कार्रवाई सिर्फ एक जैसे नाम होने के आधार पर बिना सही जांच-पड़ताल के की गई।

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राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताते हुए सिपाही को राहत दी है और भविष्य में सतर्कता बरतने की सख्त हिदायत दी है।

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कैसे घटा मामला

मामला सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी सदर थाने से जुड़ा है। दर्ज मुकदमे के मुताबिक, असली आरोपी अखिलेश त्रिपाठी देवरिया का रहने वाला था और उसने लखनऊ के अलीगंज पते पर फर्जी फर्म बनाकर धोखाधड़ी की थी।आरोपी की मौत 17 सितंबर 1998 को ही हो चुकी थी।

इसके बावजूद राजस्थान पुलिस ने बिना पिता का नाम और पता मिलाए, 15 फरवरी 2026 को गोमतीनगर निवासी और आंबेडकर नगर के मूल निवासी सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को उठा लिया और अगले दिन जेल भेज दिया।

सिपाही ने गिरफ्तारी के समय ही पुलिस अधिकारियों से कहा था कि उन्हें गलतफहमी हुई है और उनका इस केस से कोई लेना-देना नहीं है। वारंट में पिता का नाम भी अलग था, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। आखिरकार हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद मामला साफ हुआ। सुनवाई के दौरान सवाई माधोपुर की पुलिस अधीक्षक (SP) ज्येष्ठा मैत्रेयी ने अदालत में पेश होकर विभागीय गलती स्वीकार की और माफी मांगी।

रिहाई के बाद भी ड्यूटी के लिए भटक रहा पीड़ित

1 अगस्त को जेल से छूटने के बाद भी पीड़ित सिपाही की मुसीबतें खत्म नहीं हुई हैं। हाईकोर्ट के आदेश और सभी कानूनी दस्तावेज होने के बावजूद लखनऊ में कमांडेंट और डीआईजी स्तर पर उन्हें दोबारा ड्यूटी पर जॉइन नहीं कराया जा रहा है। बेकसूर सिपाही अब दोबारा नौकरी शुरू करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।

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Rohit Singh

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रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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