+

राजभर ने भाजपा विधायक पर लगाया जातीय हिंसा भड़काने का आरोप

राजभर ने कहा कि दुर्जनपुर में अधिकारियों की मौजूदगी में हुई हत्या की घटना दिल दहला देने वाली है।अपराधी को सजा मिलनी चाहिए।
राजभर ने भाजपा विधायक पर लगाया जातीय हिंसा भड़काने का आरोप
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह पर जातीय हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मुख्तार अंसारी व अतीक अहमद से बड़े माफिया सत्तारूढ़ दल में हैं।
ओमप्रकाश राजभर शुक्रवार को बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव में गये थे, जहां विगत 15 अक्‍टूबर को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के चयन के दौरान हुए विवाद में में जय प्रकाश पाल की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी। दुर्जनपुर में पाल परिवार से मिलने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दुर्जनपुर हत्याकांड में मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह का बचाव कर रहे भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह पर जातीय हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि सुरेंद्र सिंह भाजपा के इशारे पर लगातार बेतुका बयानबाजी कर रहे हैं।
उन्होंने इसके साथ ही कहा कि सुरेंद्र सिंह के स्थान पर किसी दूसरे दल के नेता ने बयानबाजी कर दिया होता तो अब तक उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो गया होता। उन्होंने आरोप लगाया कि हाथरस कांड से लेकर बलिया जिले के दुर्जनपुर कांड तक भाजपा अपने नेताओं को बचाने के लिए घटना को उलझा रही है।
राजभर ने कहा कि दुर्जनपुर में अधिकारियों की मौजूदगी में हुई हत्या की घटना दिल दहला देने वाली है। अपराधी को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध में कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा में मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद व आजम खान से बड़े माफिया हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
बिहार में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन(एआईएमआईएम) नेता असदुद्दीन ओवैसी,बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मुखिया मायावती व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के दल के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे पूर्व मंत्री राजभर ने कहा कि उनके गठबंधन से भाजपा का सर्वनाश हो रहा है। बिहार चुनाव में 18 सभा कर चुके राजभर ने दावा किया कि गठबंधन बिहार में ताकत के रूप में उभरेगा तथा गठबंधन के समर्थन के बगैर अगली सरकार नहीं बनेगी।

बिहार चुनाव : वादों की झड़ी और नौकरी - रोजगार की 'बारिश', क्या मिल पायेगा जनता का विश्वास ?

facebook twitter instagram