राजनाथ ने डीआरडीओ और घरेलू रक्षा उद्योगों के बीच सामंजस्य बनाने की अपील की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और घरेलू रक्षा उद्योगों को आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करने के लिए साथ मिल कर नए तरीके तलाशने चाहिए। 

डीआरडीओ ने आज हैदराबाद में डीआरडीओ और रक्षा उद्योगों के बीच समन्‍वय बैठक 2019 का आयोजन किया था। बैठक को भेजे वीडियो संदेश में रक्षामंत्री ने रक्षा प्रणालियों एवं प्रौद्योगिकी के स्‍वदेशी विकास को प्रोत्‍साहित करने के लिए किए जा रहे समन्‍वय का स्‍वागत किया। 

उन्‍होंने कहा कि डीआरडीओ रक्षा प्रणाली विकास के क्षेत्र में आत्‍मनिर्भरता प्राप्‍त करने के लिए महत्‍वपूर्ण कदम उठा रहा है। 

उन्‍होंने कहा कि डीआरडीओ ने प्रक्षेपास्‍त्र, लड़ाकू विमान, नौसना प्रणाली, राडार, ‘सोनार’ तथा शस्त्र प्रणा‍ली के क्षेत्र में अनुसंधान, डिजाइन और विकास की दिशा में योगदान किया है। 

रक्षामंत्री ने कहा कि रक्षा उत्‍पादन की नीति के अन्‍तर्गत रक्षा मंत्रालय ने 2025 तक एयरोस्‍पेस, रक्षा सेवाओं और सामग्रियों के लिए 26 अरब डॉलर खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें से लगभग 10 अरब डॉलर का उपयोग 20-30 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने में किया जाएगा। 

रक्षा क्षेत्र में नवाचार और आत्‍मनिर्भरता को प्रोत्‍साहित करने के सरकार के कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए सिंह ने रक्षा नवाचार और उन्‍हें अपनाने में उत्‍कृ‍ष्‍टता की आवश्‍यकता पर बल दिया। 

उन्‍होंने कहा कि निकट भविष्‍य में 25 ‘‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’’ आधारित उत्‍पादों को शामिल करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों, उद्योग, अनुसंधान संस्‍थानों और सेवाओं को एक साथ मिलकर काम करने की आवश्‍यकता है। 

रक्षा मंत्री ने 1,800 से अधिक उद्योगों के फूलने-फलने में योगदान देने को लेकर डीआरडीओ की सराहना की। 
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