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चीन मुद्दे को लेकर फिर केंद्र पर हमलावर हुई कांग्रेस, सुरजेवाला ने PM पर लगाया भ्रम जाल पैदा करने का आरोप

रणदीप सुरजेवाला ने कहा, भारत की सरजमीं पर चीनी कब्ज़ा नामंजूर है। खेद की बात यह है कि मोदी सरकार व प्रधानमंत्री चीनी दुस्साहस और कब्जे को लेकर केवल मीडिया के माध्यम से भ्रम का जाल पैदा करने में लगे हैं।
चीन मुद्दे को लेकर फिर केंद्र पर हमलावर हुई कांग्रेस, सुरजेवाला ने PM पर लगाया भ्रम जाल पैदा करने का आरोप
कांग्रेस ने एक बार फिर चीनी मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते कहा कि भारत की सरजमीं पर चीनी कब्जे का दुस्साहस लगातार बना है। चीन डेपसाँग प्लेंस व पैंगोंग त्सो लेक इलाके में न केवल जबरन कब्जा बनाए है ,बल्कि चीन के अतिरिक्त सैन्य निर्माण से साफ तौर से खतरे का आभास है।
उन्होंने कहा, भारत की सरजमीं पर चीनी कब्ज़ा नामंजूर है। खेद की बात यह है कि मोदी सरकार व प्रधानमंत्री चीनी दुस्साहस और कब्जे को लेकर केवल मीडिया के माध्यम से भ्रम का जाल पैदा करने में लगे हैं, न कि निर्णायक तौर से यथास्थिति बनाए रखने का दृढ़ निर्णय लेने के. मोदी सरकार द्वारा फैलाया जा रहा भ्रमजाल न देश सेवा हो सकता और न ही राष्ट्रभक्ति।
उन्होंने प्रेस रिलीज़ में लिखा, चीनी घुसपैठ के बारे भ्रमजाल की इस स्थिति के स्पष्ट तथ्य इस प्रकार हैं, जो मोदी सरकार के विपरीतार्थक बयानों की झूठ को जगजाहिर करते हैं। 
1. 19 जून, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि - ‘‘न तो हमारी सीमा में कोई घुसा है, न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।’’
2. 26 जून, 2020 की शाम को ही चीन में भारत के राजदूत ने भारत की न्यूज एजेंसी को कहा कि भारत उम्मीद करता है कि ‘चीन अपनी जिम्मेदारी समझ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल में चीनी तरफ पीछे हट जाएगा।
3. 17 जून, 2020 को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने लिखित तौर से स्वीकार किया कि चीन ने ‘गलवान घाटी’ में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पार भारत की तरफ निर्माण किया है।’
4. 20 जून व 25 जून, 2020 को विदेश मंत्रालय ने अपने बयानों में स्वीकार किया कि चीन ने मई-जून, 2020 में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है।
5. 17 और 18 जुलाई, 2020 के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के दौरे के बाद 17 जुलाई, 2020 को भारत-चीन की परस्पर वार्ता पर ट्वीट किया और कहा कि, ‘‘जो कुछ भी अब तक बातचीत की प्रगति हुई है, उससे मामला हल होना चाहिए। कहां तक हल होगा, इसकी गारंटी नहीं दे सकता।’’
उन्होंने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों से ये साफ है कि चीन अब डेपसांग व दौलत बेग ओल्डी इलाके में निर्माण कर रहा है, जहां उन्होंने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पार कब्जा कर रखा है। सुरजेवाला ने आगे कहा कि यही नहीं चीन पेट्रोलिंग पॉइंट 10 से 13 भारतीय क्षेत्र में बाधा पैदा कर रहा है।
सुरजेवाला ने कहा कि पैंगोंग त्सो लेक इलाके में अभी भी चीन ने फिंगर 8 से फिंगर 4 तक की पहाड़ियों पर भारतीय सीमा के 8 किलोमीटर अंदर कब्जा कर रखा है। वहां 3000 के करीब चीनी सैनिक मौजूद हैं। इसके विपरीत भारत के फिंगर 4 पर स्थिति आईटीबीपी के एडमिनिस्ट्रेटिव बेस से मोदी सरकार भारतीय सेना को पीछे हटा फिंगर 3 व 2 के बीच में ले आई है।
मोदी सरकार से 5 सवाल करते हुए उन्होंने लिखा-
1. देश के लगभग हर समाचार पत्र, आर्मी जनरल व सैटेलाइट तस्वीरों और अब रक्षा मंत्री के खुद के बयान द्वारा प्रधानमंत्री के हमारी सीमा में घुसपैठ न होने के दावे को क्यों झुठलाया जा रहा है? क्या प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक को चीनी घुसपैठ के बारे में सही तथ्य नहीं बताए?
2. देश के रक्षा मंत्री के इस बयान का क्या मतलब है कि चीन से बातचीत के द्वारा हल की कोई गारंटी नहीं है? क्या चीनी कब्जे को स्वीकार करते हुए मोदी सरकार ने यह मान लिया है कि वो इसका हल नहीं निकाल सकते?
3. क्या चीन अब भी डेपसांग सेक्टर व दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में निर्माण कर रहा है? भारत की सीमा में हो रहे इस चीनी निर्माण के बारे हमारी सरजमीं की रक्षा के लिए मोदी सरकार क्या कदम उठा रही है?
4. क्या चीन ने अभी भी फिंगर 4 से फिंगर 8 के पैंगोंग त्सो लेक इलाके में कब्जा बना रखा है? चीनी सेना का यह कब्जा छुड़वाने के लिए मोदी सरकार की क्या रणनीति है?
5. मई, 2020 से पहले की यथास्थिति बनाने और चीन को भारतीय सीमा से पीछे धकेलने में कितना समय और लगेगा. आगे रास्ता क्या है?



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