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राजधानी में तेजी से बढ़ते अपराध है गंभीर चिंता का विषय

उत्तराखंड राज्य अपराध की दृष्टि से शांत माना जाता है परंतु बीते कुछ वर्षों से प्रदेश की राजधानी समेत अन्य जिलों में भी अपराध तेजी से अपने पैर पसार रहा है, जो की गंभीर चिंता का विषय है। तेजी से बढ़ रहे इन अपराधों को रोकने में कहीं ना कहीं पुलिस भी नाकामयाब साबित होती दिख रही है।
राजधानी में तेजी से बढ़ते अपराध है गंभीर चिंता का विषय
हरिद्वार, संजय चौहान (पंजाब केसरी) :उत्तराखंड राज्य अपराध की दृष्टि से शांत माना जाता है परंतु बीते कुछ वर्षों से प्रदेश की राजधानी समेत अन्य जिलों में भी अपराध तेजी से अपने पैर पसार रहा है, जो की गंभीर चिंता का विषय है। तेजी से बढ़ रहे इन अपराधों को रोकने में कहीं ना कहीं पुलिस भी नाकामयाब साबित होती दिख रही है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 तक उत्तराखंड राज्य अपराध के मामलों में कुल राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को मिलाकर 36 में से 32 स्थान पर था, जो की सुरक्षा की दृष्टि से श्रेष्ठ है परंतु अब राज्य में प्रतिवर्ष अपरोधों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है जो की रुकने का नाम नहीं ले रही।
एनसीआरबी की वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में साइबर क्राइम के मामले में 195% का उछल देखने को मिला है। जिससे राज्य देशभर के साइबर धोखाधड़ी के मामले में चौथे स्थान पर आता है। साथ ही महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में भी उत्तराखंड राज्य देश के 15वें स्थान पर आता है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी 10,086,292 थी। जो की वर्ष 2022 तक लगभग 11,090,425 हो चुकी है। आबादी बढ़ने के मुख्य कारणों में से एक है यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। दरहसल, सीएम योगी द्वारा यूपी के असामाजिक तत्वों को चेतावनी देने के बाद असामाजिक तत्व प्रदेश छोड़कर उत्तराखंड में आ रहे है।
जिससे उन असामाजिक तत्वों के जाने से यूपी में तो अपराध में गिरावट देखी गई, परंतु उत्तराखंड में जनसंख्या बढ़ने के साथ अपराधिक मामले में बढ़ोतरी हो रही हैं। हिंसक अपराधों में वर्ष 2020 में 12.1% का उछल आया है।
वहीं वर्ष 2022 में महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों में 30% व आपराधिक मामलों में 36% का इजाफा देखा गया है। जिसमें हत्याएं, अपहरण, बलात्कार, छेड़छाड़, झांसा, अपमानजनक विषय, दहेज हत्या, महिलाओं की तस्करी, यौन उत्पीड़न जैसे जघन्य अपराध शामिल है।
देहरादून में हुई कई वारदात और घटनाओं में मुख्य आरोपी या तो उत्तर प्रदेश निवासी है या वहां से ताल्लुकात जरूर सकता है। अपराधियों ने कबूला है कि वह यूपी से लाकर देहरादून व हरिद्वार में अवैध तरीके से हथियारों की ऊंचे दामों में तस्करी करते हैं। 
निरंतर बाहरी लोगों की संख्या बढ़ने से अपराध की दरों में भी बढ़ोतरी हो रही है। आखिर कैसे बढ़ रही बाहरी लोगों की संख्या? रोजाना नए फेरीवालों और ठेलेवालों को हम नजरअंदाज कर देते हैं परंतु यही हमारी सबसे बड़ी भूल है जिसका लाभ यह लोग उठाते हैं। दिनचर्या में उपयोग की वस्तु इन अनजान फेरीवालों और ठेलीवालों से खरीद कर, हम इनके ठिकाने का आशियाना बुन रहे हैं।
अनजान व्यक्ति को देखकर हमे पुलिस को इत्तला करना चाहिए परंतु हम अपने इस फर्ज से मुंह मोड़ लेते है और हमारे द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही से ही उस बाहरी व्यक्तियों को यह शरण मिल जाती है और पेट पालने के लिए फिर वहा व्यक्ति अपराध का सहारा लेता है।
कहां से आ रहे राज्य में अपराधी? 
वर्ष 2017 में उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने से प्रदेश के आपराधिक मामलों में गिरावट देखी गई है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में यूपी में अपराध की संख्या 65,000 के करीब थी परंतु वर्ष 2020 तक योगी सरकार में यह आंकड़ा गिरकर 51,983 के पास पहुंच गया था। सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेशभर के असामाजिक तत्वों में भय व सकताई दिखाना के कारण प्रदेश के सभी असामाजिक तत्व जान बचाना के लिए राज्य छोड़कर यूपी से सटे उत्तराखंड की ओर पलायन करने लगे। जिससे उत्तराखंड के अपराधिक मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है, वर्ष 2016–20 तक के आंकड़ों पर नजर डाले तो उसमे 256.6% का उछल देखने को मिला है। 2016 में अपराधों की संख्या 16,074 थी जो की वर्ष 2020 तक बढ़कर 57,332 के पार पहुंच गई है। 
क्या नशा बन रहा अपराध की मुख्य वजह? 
तेजी से बढ़ते इन अपराधों का सीधा तालुक नशे से है। नशे के कारण ही देहरादून समेत राज्य के अन्य जिलों में भी आपराधिक गतिविधियां बढ़ने लगी है। सूत्रों के मुताबिक केवल राजधानी देहरादून में ही बीते 3 साल में अपराध के मामलों में 70.79% की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही अपराध का स्तर 32.79 पहुंच गया है। नशे की लत एक ऐसी बीमारी है जो न केवल इसके आदि व्यक्तियों को बल्कि सम्पूर्ण समाज को खोखला कर देती है। अधिकांश युवा इस वक्त नशे की चपेट में है, नशा की पूर्ति न हो पाना ही अपराध की मुख्य वजहों में से एक है। जब नशीले पदार्थों के लिए नशाखोरो के पास पैसे नहीं होते तब वह पैसे की खातिर अपराध करने से भी नही कतराते।
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