निरंकारी शब्द को कापी राइट करवाना किसी का कोई अधिकार नहीं –लोंगोवाल

लुधियाना- अमृतसर : शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने निरंकारी मिशन दिल्ली की ओर से निरंकारी शब्द का कापी राइट लेने पर सख्त एतराज प्रगट किया है। निरंकारी दरबार दिल्ली द्वारा ‘निरंकारी शब्द ’ पर अदालत के माध्यम से कॉपी राइट का अधिकार मांगे जाने पर सिखों ने कड़ा एतराज जताया है जबकि दूसरी तरफ तीस हजारी अदालत में जज विशाल सिंह के सामने पेश किए गए हलफनामे में निरंकारीयों ने दावा करते हुए शब्द निरंकारी दरबार द्वारा इजाद किया गया बताया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी इस शब्द का प्रयोग करने का अधिकार नहीं। हलफनामे में निरंकारी दरबार ने कहा है कि निरंकारी शब्द की अध्यात्मिक व्याख्या गुरू गं्रथ साहिब और निरंकारी लहर के प्रमुख बाबा दयाल भी नहीं कर सकें। यह व्याख्या सिर्फ हम ही कर सकते है। निरंकारी मंडल ने दावा कि इस शब्द पर उनका ही अधिकार है। औरकोई भी शख्स और संस्था निरंकारी शब्द का प्रयोग उनकी इजाजत के बिना नहीं कर सकता।

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एसजीपीसी की ओर से जारी एक विज्ञपत्ति के लोंगोवाल ने कहा कि मीडिया के माध्यम से सामने आया है कि निरंकारी मिशन की ओर से निरंकारी शब्द को कापी राइट करवा लिया है। इस शब्द को कापी राइट करवाने से सिख भावनाओं को ठेस पहुंची है। निरंकारी मिशन की ओर से की गई इस कार्रवाई को उन्होंने एक घटिया कार्रवाई बताया है।

उन्होंने कहा कि यह किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा कि पावन गुरबाणी के किसी शब्द को कोई संस्थान कापी राइट करवा ले। इस मुद्दे पर कानूनी माहिरों की राय लेकर अगली कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि गुरबाणी का एक एक शब्द को सिख संगत के साथ साथ सारे विश्व में रहने वाले गुरु नानक नाम लेवा संगत के लिए इलाही है। कुछ लोग जानबूझ कर सिखों की भावनाओं के साथ खेलने की कोशिशों में लगे रहते है। शब्द गुरु को मानने वाली संगत इसे किसी भी कीमत पर बर्दाशत नही करेगी। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसी हरकतें करके मानवता के अंदर मतभेद खड़े करते है उन से सिख संगत को सुचेत रहना चाहिए।

– सुनीलराय कामरेड

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