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राजद ने रघुवंश प्रसाद के पत्र पर उठाए सवाल, तो भाजपा और जदयू के नेताओं ने राजद पर निशाना साधा

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रघुवंश के अस्पताल से लिखे पत्र पर ही सवाल उठा दिए हैं, जिसको लेकर भाजपा और जदयू के नेताओं ने राजद पर निशाना साधा है।
राजद ने रघुवंश प्रसाद के पत्र पर उठाए सवाल, तो भाजपा और जदयू के नेताओं ने राजद पर निशाना साधा
पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का कल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। जिसके बाद सोमवार को उनके पैतृक गांव पानापुर शाहपुर में अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है। इससे पहले ही रघुवंश प्रसाददो दिन पूर्व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र को लेकर अब बिहार में सियासत गर्म हो गई है। 
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रघुवंश के अस्पताल से लिखे पत्र पर ही सवाल उठा दिए हैं, जिसको लेकर भाजपा और जदयू के नेताओं ने राजद पर निशाना साधा है। राजद के विधायक भाई वीरेंद्र ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह द्वारा लिखे पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) से कैसे पत्र लिख सकता है। उन्होंने इसे एक साजिश बताया। 
इधर, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने रघुवंश को साधु संत प्रवृत्ति का व्यक्ति बताते हुए कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही रघुवंश प्रसाद सिंह से भेंट की थी। उस समय वे नीतीश सरकार और मोदी सरकार की आलोचना कर रहे थे जबकि लालू प्रसाद की प्रशंसा की थी। 
उन्होंने कहा, मैं तो पहले ही कहा है कि यह पत्र एक साजिश है। 
इधर, जदयू के नेता और बिहार के मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि राजद अब समाजवादी नेता के निधन के बाद अमर्यादित टिप्पणी कर रही है। जिंदा रहने पर तो राजद के नेता ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने जब अपनी भावना एक पत्र के माध्यम से व्यक्त की, तो अब राजद नेता उसी पर सवाल उठा रहे हैं। 
भाजपा ने राजद के नेताओं के बयान पर राजद को अनपढ़ और गवारों की जमात तक करार दे दिया। भाजपा के प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने कहा कि रघुवंश सिंह जब जिंदा थे तब तेजप्रताप यादव उन्हें लोटा भर पानी बताया और आज उनके जैसे विद्वान व्यक्ति की लेखनी पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। 
उल्लेखनीय है कि रविवार को रघुवंश प्रसाद सिंह का दिल्ली एम्स में निधन हो गया था। इससे पहले उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा था जिसमें वैशाली गढ़ पर गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी को तिरंगा फहराने की मांग सहित कई अन्य मांगें रखी थी।


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