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अर्जुन तेंदुलकर पर लगे नेपोटिजम के आरोप, पापा सचिन ने ऐसे की ट्रोलर्स की बोलती बंद

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर को बीते दिनों ही आईपीएल नीलामी में मुंबई इंडियंस ने उनके बेस प्राइज 20 लाख रुपए में खरीदा था।
अर्जुन तेंदुलकर पर लगे नेपोटिजम के आरोप, पापा सचिन ने ऐसे की ट्रोलर्स की बोलती बंद
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर को बीते दिनों ही आईपीएल नीलामी में मुंबई इंडियंस ने उनके बेस प्राइज 20 लाख रुपए में खरीदा था। ऐसे में मुंबई इंडियंस के इस फैसले पर कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अर्जुन की खूब आलोचना तक की थी। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने तो नेपोटिज्म तक की बात कह डाली है। 



दरअसल लोगों का मानना है कि अर्जुन तेंदुलकर का चयन इस वजह से किया गया है,क्योंकि वो दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के बेटे हैं। अब इस पूरे मुद्दे पर वनडे और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले सचिन का कहना है कि खेलों में किसी भी खिलाड़ी को उसकी पृष्ठïभूमि नहीं बल्कि मैदान पर प्रदर्शन पहचान दिलाता है। 


याद दिला दें महान क्रिकेटरों की लिस्ट में शुमार सचिन ने कई बडे रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करने के बाद  साल 2013 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। इस बीच सचिन ने कहा कि जब भी हम डे्रसिंग रूम में जाया करते हैं तो वाकई में यह मायने नहीं रखता है कि आप कहां से आए हैं। आप देश के किस हिस्से से आए हैं और आपका किससे क्या मतबल है। यहां पर सभी के लिए समान स्थिति होती है। खेल में मैदान पर आपके प्रदर्शन के अलावा किसी अन्य चीज को मान्यता नहीं मिलती है। 


आगे सचिन तेंदुलकर ने कहा कि खेल नई पहल से लोगों को एकजुट करता है,उन्होंने कहा कि आप एक इंसान के रूप में वहां हैं। ऐसा व्यक्ति जो  टीम में योगदान देना चाहता है। हम यही तो करना चाहते हैं, अपने अनुभवों को साझा करना। विभिन्न स्कूलों और बोर्ड का हिस्सा होने के नाते मैं अलग-अलग तरह के प्रशिक्षकों से मिलता हूं। मैं स्वयं बहुत कुछ सीखता हूं और ये वे अनुभव हैं जिन्हें मैं शेयर करना चाहता हूं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की सलाह दी।


इसके सात ही तेंदुलकर ने यह भी कहा अपने सपनों का पीछा करते रहें, सपने सच होते हैं। कई बार हमें लगता है कि अब कुछ नहीं हो सकता लेकिन ऐसा कभी नहीं होता, इसलिए अतिरिक्त प्रयास करें और आप अपने लक्ष्य हासिल कर लोगे। उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता रमेश तेंदुलकर को याद किया जो कि प्रोफेसर थे। तेंदुलकर ने कहा कि जब हम पहुंच के बारे में बात करते हैं तो मुझे अपने पिताजी याद आते हैं जो प्रोफेसर थे और मुंबई के एक छोर से दूसरे छोर तक यात्रा करते थे और वह लगातार अपने विद्यार्थियों को पढ़ाने में व्यस्त रहे।

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