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हैदराबाद एनकाउंटर मामले में SC ने जांच समिति को दिया 6 महीने का और समय

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज वी एस सिरपुरकर की अध्यक्षता वाले जांच समिति ने जांच पूरी करने के लिए और समय की मांग की थी। समिति ने कोरोना वायरस को जांच में देरी का कारण बताया है।
हैदराबाद एनकाउंटर मामले में SC ने जांच समिति को दिया 6 महीने का और समय
सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद एनकाउंटर मामले में जांच कर रही समिति को 6 महीने का और समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज वी एस सिरपुरकर की अध्यक्षता वाले जांच समिति ने जांच पूरी करने के लिए और समय की मांग की थी। समिति ने कोरोना वायरस को जांच में देरी का कारण बताया है।
मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रमासुब्रमण्यम की खंडपीठ ने आयोग की ओर से वकील के. परमेश्वर द्वारा दायर अर्जी का निपटारा करते हुए जांच आयोग को अंतिम जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए छह माह का और समय दिया। 
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कोविड-19 महामारी के कारण आयोग की बैठकें नियमित नहीं हो सकी है, क्योंकि आयोग के तीनों सदस्य देश के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं, जबकि जांच का स्थान बिल्कुल अलग क्षेत्र में है। यह भी दलील दी गयी कि आयोग के तीनों सदस्यों की उम, काफी अधिक है, इसलिए उन्हें कोरोना काल में बाहर निकलने से संक्रमण का खतरा अधिक है। 
इस वजह से जांच पूरी नहीं हो सकी है। आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कम से कम छह माह का और समय देने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने मान लिया। इस बीच याचिकाकर्ताओं में से एक भरत यादव के वकील प्रदीप यादव ने कोर्ट से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि देश के किसी भी हिस्से में भविष्य में हिरासत में मौत की घटना न हो। 
इस पर न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि कोई कोर्ट यह कैसे सुनिश्चित कर सकती है कि भविष्य में किसी की मौत हिरासत में नहीं होगी। हिरासत में कुछ लोगों की प्राकृतिक मौत भी हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘आप एक वकील हैं और वकील के तौर पर आपकी बहुत बड़ जिम्मेदारी है। हम कैसे यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हिरासत में कोई भी मौत नहीं होगी।’’ 
गौरतलब है कि तेलंगाना के हैदराबाद में पिछले वर्ष दिसम्बर में दुष्कर्म एवं हत्या की घटना के चार आरोपियों की मुठभेड़ में मौत हो गयी थी, जिसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी एस सिरपुरकर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच आयोग गठित किया गया था। आयोग में बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रेखा पी. सुन्दर बालडोटा और केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक डी.आर कार्तिकेयन भी शामिल हैं।
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