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महाकालेश्वर मंदिर में 'भगदड़ जैसी स्थिति' के दृश्यों ने सरकार की विफलता को दिखाया : कांग्रेस

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 प्रोटोकॉल लागू करने और भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम रहने से प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को 'भगदड़ जैसी स्थिति' उत्पन्न हुई।
महाकालेश्वर मंदिर में 'भगदड़ जैसी स्थिति' के दृश्यों ने सरकार की विफलता को दिखाया : कांग्रेस
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 प्रोटोकॉल लागू करने और भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम रहने से प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को 'भगदड़ जैसी स्थिति' उत्पन्न हुई।
महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ होने से गेट नम्बर चार पर लगे बैरिकेड को प्रतीक्षा में लगे दर्शनर्थियों ने सोमवार सुबह करीब 8.30 बजे के आसपास धकेल कर गिरा दिया था। इससे मंदिर में जाने वाले लोगों में भगदड़ मच गई। हालांकि, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था।
मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सत्तारूढ़ भाजपा कोविड-19 स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने के बारे में बड़े-बड़े दावे करते हैं। लेकिन ये दावे खोखले साबित हुए, क्योंकि श्रद्धालुओं को महाकाल मंदिर में प्रवेश की अनुमति देते समय किसी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वहां भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों को एक दूसरे को धक्का देते हुए देखा गया और कोविड-19 प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई गई।’’
पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार के कुप्रबंधन के कारण प्रदेश में इस महामारी से पहले ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को मंदिर में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश देने के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी करना चाहिए, ताकि मंदिर में ऐसी भीड़ न हो।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 175 किलोमीटर की दूरी पर धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर, भगवान शिव के देश में स्थापित 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक है।
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