राजघाट पर सोलर प्लांट से जगमगाएगी राजधानी

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार राजधानी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कई प्रयास कर रही है। उनमें से एक है बिजली उत्पादन के लिए प्रयोग किए जाने वाले थर्मल पावर को बंद कर सोलर पावर को बढ़ावा देना। इसी के तहत गुरुवार को दिल्ली कैबिनेट ने अहम फैसला लिया है। वर्षों से दिल्ली में बिजली पैदा करने वाला राजघाट थर्मल पावर प्लांट को बंद कर वहां 45 एकड़ जमीन पर सोलर पार्क विकसित किया जाएगा। 

इससे 5000 किलोवॉट बिजली का उत्पादन होगा, जिससे राजघाट के आसपास का इलाका सोलर लाइट से जगमगाएगी। बता दें कि दिल्ली सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में यह घोषणा की थी कि वह दिल्ली को सोलर पावर से युक्त बनाकर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके तहत पहला प्रयोग सचिवालय में किया गया। इसके तहत सचिवालय में खपत होने वाले आधे से ज्यादा होने वाली बिजली की आपूर्ति सोलर पावर से हो रही है। 

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में पर्यावरण में सुधार की दिशा में कैबिनेट ने गुरुवार को एक अहम फैसला लिया है। राजघाट कोल प्लांट को अब आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया जाएगा। वैसे, प्रदूषण के कारण 2015 से ही यहां प्रोडक्शन बंद कर दिया गया था। अब कैबिनेट ने इसे आधिकारिक तौर पर बंद करने का फैसला ले लिया है। राजघाट कोल प्लांट की जगह 45 एकड़ में एक सोलर पार्क बनाया जाएगा। 

जल्द उतरेगी  एक हजार इलेक्ट्रिक बसें
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार 1000 इलेक्ट्रिक बसों को लाने पर भी काम कर रही है। इन 1000 इलेक्ट्रिक बसों का टेंडर 2 अगस्त को खुल जाएगा। जनवरी से अप्रैल तक ये सारी बसें दिल्ली की सड़कों पर आ जाएंगी। इस तरह दिल्ली के लोगों के लिए मई-जून तक 9500 बसें मौजूद रहेंगी।

2020 तक सड़कों पर दौड़ेंगी 9,500 बसें, 1000 डीटीसी लो फ्लोर बसों को मंजूरी
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सार्वजनिक परिवहन और प्रदूषण से जुड़े दो अहम फैसले लिए गए। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए दिल्ली की सड़कों पर चार हजार नई बसें उतारी जाएंगी। डीटीसी के बेड़े में जनवरी से मई 2020 के बीच एक हजार लो फ्लोर बसें और जुड़ जाएंगी। जुलाई से दिसंबर के बीच दिल्ली की सड़कों पर क्लस्टर की एक हजार स्टैंडर्ड फ्लोर बसें आ जाएंगी। क्लस्टर की एक हजार लो-फ्लोर बसें भी दिसंबर से अप्रैल के बीच दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने लगेंगी। 

एक हजार इलेक्ट्रिक बसें भी जनवरी से अप्रैल तक आ जाएंगी। बैठक के बाद उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि दिल्ली की सड़कों पर मई-जून 2020 तक 9500 बसें मौजूद रहेंगी। अभी दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर को मिलाकर 5,500 बसें हैं। मई-जून तक इस बेड़े में चार हजार बसों का और इजाफा हो जाएगा। मंत्रिमंडल ने इसके लिए गुरुवार को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि इन एक हजार बसों के अलावा पिछले एक दो साल में तीन हजार बसें खरीदने की तैयारी की थी। 

दिल्ली सरकार क्लस्टर के लिए एक हजार स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदने की प्रकिया पर भी काम कर रही थी। अब इससे संबंधित सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है। उन्होंने बताया कि आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 650 बसों के टेंडर को मंजूरी दे दी गई है। इन बसों के लिए 15 दिन में वर्क अवार्ड हो जाएगा। यह बसें दिसंबर से अप्रैल के बीच आ जाएंगी। दिसंबर में 165 बसें आएंगी और अप्रैल तक सभी 650 बसें दिल्ली की सड़कों पर होंगी। बाकी 350 बसों का टेंडर 19 जुलाई को खुल जाएगा। 

बसें खरीदने की मंजूरी दिल्ली की जनता के साथ धोखा : तिवारी 
दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने गुरुवार को दिल्ली सरकार द्वारा एक हजार इको फ्रैंडली बसें खरीदने की मंजूरी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह दिल्ली की जनता के साथ धोखा है। क्योंकि फरवरी, 2020 तक विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने हैं और केजरीवाल सरकार की बिदाई तय है। ऐसे में केजरीवाल सरकार आगामी नई सरकार के निर्णय कैसे ले सकती है। 

तिवारी ने कहा कि दिल्ली की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और लोग अधिक किराया खर्च करके निजी वाहनों से चलने को मजबूर हैं। तिवारी ने कहा कि दिल्ली में एक लाख लोगों पर मात्र 17 बसें ही उपलब्ध हैं और उनकी हालत भी खस्ता होती जा रही है। 
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