राजोआना की रिहाई के लिए शिरोमणि अकाली दल का प्रतिनिधि मंडल प्रधानमंत्री से मिलेगा - सुखबीर सिंह बादल

लुधियाना-अमृतसर : शिरोमणि अकाली  दल का  एक  विशेष प्रतिनिधिमंडल भाई राजोआना की  रिहाई की  मांग को लेकर  जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेगा। यह बात शिरोमणि अकाली  दल के  प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने अबोहर में एक  पत्रकार  सम्मेलन के  दौरान कही। शिरोमणि अकाली दल (ब) जत्था लुधियाना शहरी के डेलीगेट इजलास आज गुरूद्वारा साहिब मॉडल टाउन में हुआ, जिसमें पार्टी के अबज़रर्व डॉ दलजीत सिंह चीमा और सहायक अबज़रर्व प्रकाश चंद गर्ग की उपस्थिति में अकालियों ने पटियाला की  केंद्रीय जेल में बंद भाई बलवंत सिंह राजोआना की  फांसी की  सजा माफ करने  का  प्रस्ताव पेश किया। बैठक में डैलीगेट  चुनने के  लिए डॉ चीमा को  अधिकार सौंपे गए। इस अवसर पर पूर्व अकाली कैबिनेट  मंत्री महेश इंद्र सिंह ग्रेवाल, जत्थेदार हीरा सिंह गाबडिय़ा और रंजीत सिंह ढिल्लो भी उपस्थित थे। 

उधर दमदमी टकसाल के प्रमुख और संत समाज के प्रधान संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा ने पटियाला की केंद्रीय जेल में बंद भाई बलवंत सिंह राजोआना को  कोई  माफी ना दिए जाने के बारे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में दिए गए बयान पर पुन: विचार करने  के  लिए कहा  है। प्रो. सरचांद सिंह द्वारा जारी बयान में बाबा हरनाम सिंह खालसा ने कहा  कि 550वें प्रकाश  पर्व के  मौके  पर केंद्र सरकार  द्वारा 8 सिख कैदियों को  रिहा करने और भाई राजोआना को  फांसी की  सजा में राहत दिए जाने के  फैसले से सिख कौम ने तसल्ली  और खुशी प्रकट की थी। सिख कौम यही समझती थी कि प्रकाश पर्व के अवसर पर भाई राजोआना की  फांसी की सजा उम्र कैद  में तबदील की जा चुकी है, लेकिन  पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान ने सिख कौम  को  निराश करते  हुए बड़ा झटका  दिया है। 

इधर शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री डा. दलजीत सिंह चीमा ने कहा है कि बलवंत सिंह राजोआना के केस में गृहमंत्री के बयान से सिख भाईचारे को बहुत ठेस पहुंची है क्यूंकि 24 साल से अधिक समय राजोआना जेल में काट चूका है, उसने पैरोल भी नहीं काटी जोकि तीस साल से अधिक समय हो चूका है। क़ानून के मुताबिक दो सजायें  एक साथ नहीं हो सकती है। जिसमें उम्र कैद भी हो चुकी है और अब फांसी की सजा की बात की जा रही है। यह बहुत गलत है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मानवता के आधार पर फांसी की सजा रद करके उन्हें जेल से तुरंत रिहा करके घर भेजना चाहिए। ऐसा नहीं होता तो कानून के ऊपर से विश्वास खत्म हो जाएगा। 


अमरेंद्र सिंह पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिन पुलिस वालों ने घर से उठाकर युवाओं को झूठे पुलिस मुकाबले में मार दिया, उनको तो डेढ़ साल बाद ही रिहा करवा दिया। लेकिन अब राजोआना केस में वह अलग स्टैंड अपना रहे है जोकि  दोगली नीति है। जबकि रोजाआना तीस साल से अधिक  समय जेल काट चुके है। एमपी बिट्टू अपना निजी स्वार्थ छोड़े क्यूंकि यह कोई  मजाक नहीं है और यह लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है। वहीं उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल के संघटनात्मक चुनाव के तहत लुधियाना शहरी की मीटिंग आज की गई है। इसके तहत जिला डेलीगेट बनाये जाएंगे। पार्टी संविधानिक  प्रक्रिया के तहत नीचे से लोकतान्त्रिक ढंग से भर्ती करके  चुनाव होते है। 14 दिसंबर को  राज्य का  डेलीगेट इजलास अमृतसर में होगा जहां पार्टी प्रधान चुना जाएगा। 

-सुनीलराय कामरेड

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