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शिवसेना से होगा सीएम , एमवीए प्रयोग कोई गलत नहीं - ठाकरे

शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा कि उनके नेतृत्व में महा विकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन का प्रयोग गलत नहीं था और लोगों ने उसका स्वागत किया था।
शिवसेना से होगा सीएम , एमवीए प्रयोग कोई गलत नहीं - ठाकरे
शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा कि उनके नेतृत्व में महा विकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन का प्रयोग गलत नहीं था और लोगों ने उसका स्वागत किया था। शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए साक्षात्कार के दूसरे भाग में ठाकरे ने कहा कि वह महाराष्ट्र में न केवल स्थानीय निकाय बल्कि विधानसभा चुनाव भी चाहते हैं।
भाजपा उन लोगों को सबकुछ दे रही हैं जो दूसरी पार्टी से आंए हैं - उद्धव ठाकरे 
उन्होंने दावा किया कि शिवसेना का मुख्यमंत्री फिर से होगा और वह पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य का दौरा करेंगे। ठाकरे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उन लोगों को सब कुछ दे रही है जो दूसरी पार्टियों से आए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री (शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे) पद से लेकर नेता प्रतिपक्ष (जो अभी राकांपा के अजित पवार के पास है) का पद भी ऐसे लोगों को दिया है।
भाजपा ने अपना वादा नहीं निभाया, इसलिए एमवीए गठबंधन करना पड़ा 
उन्होंने कहा, “दिल्ली शिवसेना से शिवसेना को लड़ाना चाहती है और मराठी भाषी लोगों को बांटना चाहती है। अगर वर्तमान शासक विपक्ष से डरते हैं तो यह उनकी अक्षमता है। लोकतंत्र में कोई भी दल स्थायी विजेता नहीं होता।” ठाकरे ने कहा कि लोगों ने एमवीए के प्रयोग का स्वागत किया था और तीन दलों का यह गठबंधन इसलिए करना पड़ा क्योंकि भाजपा ने उनसे किया वादा नहीं निभाया था।
पार्टी  के आधार व कार्यकर्ताओं के विस्तार के लिए कार्य करूंगा 
सामना के कार्यकारी संपादक और राज्यसभा सदस्य संजय राउत को दिए साक्षात्कार में ठाकरे ने कहा, “शिवसेना का फिर से मुख्यमंत्री होगा। मैं पार्टी के आधार और कार्यकर्ताओं के विस्तार के लिए काम करूंगा। मैं अगस्त से राज्य का दौरा शुरू करूंगा। मैं चाहता हूं कि अधिक से अधिक लोग पार्टी के सदस्य बनें।”
सीएम का पद चुनौती के रूप में स्वीकारना पड़ा 
उन्होंने कहा, “मैंने भाजपा से 2019 में क्या मांगा था?… ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद और इस पर सहमति बनी थी। यह पद मेरे लिए नहीं था। मैंने (अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक) बालासाहेब से वादा किया था कि मैं शिवसेना के नेता को मुख्यमंत्री बनाऊंगा। मेरा वादा अब भी अधूरा है।” ठाकरे ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री का पद एक चुनौती के रूप में स्वीकार करना पड़ा।
 
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