श्रीकृष्ण उजाला करो

आज युग पुरुष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व है। समूचा राष्ट्र कृष्णमय हुआ है। कभी-कभी सभी के मन में एक स्वाभाविक जिज्ञासा पैदा होती है कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व इतना अलौकिक क्यों था? वे मात्र नंद-यशोदा अथवा देवकी-वासुदेव नन्दन ही नहीं थे अथवा वे मात्र गोपो के साथ गाय चराने वाले, गोपियों के घर दही और माखन चोर ही नहीं थे अपितु श्रीकृष्ण तो भारत के राज्यों को संगठित कर विराट भारत का निर्माण करना चाहते थे। वे एक ऐसे विशाल भारत का निर्माण करना चाहते थे जिसमें किसी का करुण क्रंदन न सुनाई पड़े। जिसमें कोई शोषित, दलित आदि उत्पीड़न न हो, जिसमें हो करुणा, दया और मानवता।

श्री कृष्ण का पृथ्वी पर जन्म दुष्टों के दमन और सनातन धर्म तथा मानवता की रक्षा के लिये हुआ था। उन्होंने साम-दाम-दंड और सभी नीतियों को अपनाया, अनेकों दुष्टों का दमन किया। अनेक प्रतिद्वंद्वियों को विवाह सूत्र में बांध कर सामाजिक मैत्री की स्थापना की। स्वयं भी मित्र और शत्रु वंशों में विवाह कर प्रेम की प्रतिष्ठा की लेकिन जब सभी प्रयास के बावजूद युद्ध की आवश्यकता महसूस की गई तो फिर महाभारत हुआ तब श्रीकृष्ण के आदर्शों को स्वीकार करने वाली शक्तियां पांडवों के साथ हो गई और कौरवों को पराजित होना पड़ा। जब कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन सगे-संबंधियों से युद्ध लड़ने को लेकर संशय में फंसे तो योगेश्वर श्री कृष्ण की वाणी ही उन्हें संशय से निकाल पाई थी।

 उन्होंने युद्ध के मैदान में ही अर्जुन को जो उपदेश दिया वह आज भी संशयग्रस्त मानव के लिये उपयोगी है। अर्जुन उनके संवाद सुनकर ही कर्म की ओर प्रवृत हुआ था। गीता के उपदेश मानव के विचार, प्रश्न और जिज्ञासाओं को शांत कर देते हैं। श्रीकृष्ण कर्म प्रधान राष्ट्रभाव के प्रतीक हैं। इसलिये गीता अपने भीतर से अध्यात्म यात्रा भी है। गीता अवसाद से मुक्ति दिलाती है, आपके भीतर अन्य भाव जगाती है, आपको कर्म प्रधान बनाती है, जीवन का रास्ता दिखाती है। यदि भारतीय धर्म से विमुख नहीं होते तो अपराध भी कभी नहीं बढ़ते।

 श्रीकृष्ण की सबसे बड़ी विशेषता उनके अवतारी जीवन की यह रही कि उन्होंने बचपन से ही आवश्यक होने पर अपनी अलौकिक शक्तियों के प्रयोग से जनमानस में अपने अलौकिक होने का उद्घोष किया। उन्होंने कभी भी प्रयास नहीं किया कि लोग उन्हें राजकुमार समझें। उन्होंने स्वयं को सामान्य व्यक्ति के रूप में पेश किया लेकिन जब आवश्यकता पड़ी तो चमत्कार कर डाला। वह मैनेजमेंट यानि प्रबन्धन के बड़े गुरु हैं। उन्होंने अनुशासन से जीने, व्यर्थ की चिंता न करने और भविष्य की बजाये वर्तमान पर ध्यान केन्द्रित करने का मंत्र दिया।

 भगवान कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की गरीबी देखी तो उसकी झोपड़ी की जगह महल बना दिया। जब यमुना का पानी विषाक्त होता देखा तो सौ सिर वाले कालिया नाग का मर्दन कर दिया। श्री कृष्ण ऐसे महामानव थे जो युगों के बाद जन्म लिया करते हैं। फिर भी यदि वह आज आ जाये तो वे क्या सोचेंगे और क्या करेंगे? आज समूचा भारत वर्ष श्रीकृष्ण की जय-जयकार कर रहा होगा लेकिन समाज में धर्म के नाम पर व्याभिचार के अड्डे बने हुये हैं। समय के अंतराल के बाद ढोंगी बाबाओं के कारनामे सामने आ रहे हैं। आज समाज में जगह-जगह कालिया नाग बैठे हैं, जो भ्रष्टाचार करके भी कानून से खिलवाड़ करना चाहते हैं।

 ऐसे कालिया नागों में से कुछ को ही जेल भेजा जा सका है। राष्ट्रीय परिस्थितियों में जम्मू-कश्मीर आज भी सत्ता के लिये चुनौती बना हुआ है। पाकिस्तान रूपी राक्षस आतंकवाद को फैलाने में जुटा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कंधे पर सवार होकर वह कश्मीर समस्या का अंतर्राष्ट्रीयकरण करना चाहता है। सीमाओं पर गोला-बारूद बरसा कर हमारे जवानों की शहादत ले रहा है। भारत में घुसपैठिये आतंकी हमलों की आशंका बनी रहती है। श्रीकृष्ण कब तक चुप रहेंगे? उन्होंने शिशुपाल की सौ गालियां सहन करने के बाद सुदर्शन चक्र उठा लिया था।

 आज के दिन समूचे राष्ट्र को यही प्रार्थना करनी चाहिये-हे श्रीकृष्ण आप एक बार फिर धरती पर आइये और अपने चरणाें से इस धरती को पावन कीजिये। पाकिस्तान रूपी कालिया नाग का मर्दन करें और जम्मू-कश्मीर में उजाला करें ताकि कश्मीरी अवाम का अंधकार दूर हो। जिस दिन कश्मीर में स्थितियां शांत हो गई, उस दिन समूचे भारत में नई सुबह हो जायेगी। डल झील की लहरें पूरे भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित करेंगी।  चिनार के उड़ते पत्ते नया वातावरण सृजित करेंगे। यदि युद्ध की जरूरत भी पड़ी तो श्रीकृष्ण भारतीय सेना के सारथी बनेंगे। हे भागवान श्रीकृष्ण उजाला करो। सभी कृष्ण प्रेमियों को जन्माष्टमी पर्व पर बहुत-बहुत शुभकामनायें।
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