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Shukrawar puja vidhi in Hindi: शुक्रवार का व्रत रखने से घर में आएगी सुख-शांति, जानिए क्या है पूजा की विधि

03:28 PM Aug 29, 2025 IST | Kajal Yadav
Shukrawar puja vidhi in Hindi

Shukrawar puja vidhi in Hindi: सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी, मां संतोषी और मां काली का माना जाता है। इस दिन विधि विधान के साथ पूजन पाठ करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और देवियों की कृपा लोगों पर बनी रहती है।

सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता का माना जाता है। इसमें से एक दिन यानी शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का माना जाता है, लेकिन इस दिन लक्ष्मी माता की ही नहीं बल्कि संतोषी माता की पूजा के लिए भी काफी शुभ माना गया है।

इस धर्म में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन की प्राप्ति होती है। साथ ही संतोषी माता की पूजा करने से भी जीवन में कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। आइए जानते हैं कि शुक्रवार के दिन व्रत रखने और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में क्या बदलाव आते हैं (Shukrawar puja vidhi in Hindi) और जीवन में किस-किस चीज़ की प्राप्ति होती है।

शुक्रवार व्रत पूजा महत्व (Shukrawar puja vidhi in Hindi)

लक्ष्मी माता को धन और वैभव की देवी माना जाता है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार का दिन बेहद बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन वैभव लक्ष्मी व्रत रखने के भी कई विधि विधान हैं। (Shukrawar vrat puja mahattva) लक्ष्मी माता के व्रत में एक ही बार भोजन ग्रहण किया जाता माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।

शुक्रवार को व्रत के दौरान सुबह और शाम दोनों समय माता लक्ष्मी के सामने दीपक जलाना चाहिए (Shukrawar puja vidhi in Hindi) और उन्हें फल, फूल और मिठाई चढ़ाकर अपने सुखी जीवन की कामना करना चाहिए।

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Shukrawar puja vidhi in Hindi

शुक्रवार व्रत कथा (Shukrawar puja vidhi in Hindi)

एक गांव में एक बूढ़ी औरत रहती थी जिसके सात बेटे थे। उनमें से छह मेहनती थे और एक आलसी। बूढ़ी मां उन छह बेटों का बचा हुआ खाना सातवें बेटे को देती। (Shukrawar vrat puja mahattva) एक दिन सातवां बेटा अपनी पत्नी से बोला – "देखो, मेरी मां मुझसे कितना प्यार करती है।" पत्नी ने हंसते हुए कहा – "हां क्यों नहीं, सबका जूठा बचा हुआ खाना तुम्हें ही तो देती है।" इस पर पति बोला – "जब तक अपनी आंखों से न देख लूं, विश्वास नहीं करूंगा।" पत्नी ने मुस्कुराकर कहा – "तो जब देख लोगे तभी मानोगे?"

कुछ समय बाद एक बड़ा त्योहार आया। घर में सात तरह के व्यंजन और चूरमे के लड्डू बने। बेटे ने पत्नी की बात परखने के लिए सिर दर्द का बहाना किया और रसोई में पतला कपड़ा ओढ़कर सो गया, ताकि सब देख सके। (Shukrawar vrat katha) उसके छह भाई आए। मां ने उनके लिए आसन बिछाए, सातों व्यंजन परोसे और आग्रह करके खिलाया।

फिर उनके बचे हुए लड्डू इकट्ठे करके एक नया लड्डू बनाया और सातवें बेटे को बुलाया – "उठ बेटा, तेरे भाई खा चुके, अब तू भी खा ले।" इस पर बेटे ने कहा – "मां, अब मैं खाना नहीं खाऊंगा, मैं परदेस जा रहा हूं।" मां ने जवाब दिया – "तो कल की बजाय आज ही चला जा।" वह घर छोड़कर चला गया।

जाते-जाते उसने अपनी पत्नी को गोशाला में देखा और अपनी अंगूठी देते हुए कहा – "मेरे पास कुछ नहीं है, बस इसे रख लो और अपनी कोई निशानी मुझे भी दो।" पत्नी ने मजाक में गोबर लगे हाथ उसकी पीठ पर मार दिए।

वह आगे बढ़ता गया और दूर के एक नगर में पहुंचा। वहां एक साहूकार की दुकान थी। उसने साहूकार से नौकरी मांगी। साहूकार को नौकर की जरूरत थी, इसलिए उसने कहा – "काम देखकर तुझे वेतन मिलेगा।" युवक ने स्वीकार कर लिया। उसने ईमानदारी, लगन और मेहनत से काम किया। कुछ ही समय में वह सभी नौकरों से आगे निकल गया। साहूकार ने प्रभावित होकर तीन महीने बाद ही उसे मुनाफे में हिस्सेदार बना दिया। बारह साल की मेहनत में ही वह बड़ा धनवान बन गया।

इधर उसकी पत्नी पर सास-ससुर अत्याचार करने लगे। उसे घर का सारा काम करवाकर जंगल से लकड़ी लाने भेजते। खाने को भूसी की रोटी और नारियल के खोपर में पानी मिलता। एक दिन लकड़ी लाते समय उसने रास्ते में कुछ स्त्रियों को व्रत करते देखा।

(Shukrawar vrat puja mahattva) उसने उनसे पूछा – "बहनों, यह किसका व्रत है और इसे करने से क्या मिलता है?" एक स्त्री ने बताया – "यह संतोषी माता का व्रत है। इससे गरीबी दूर होती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पति परदेश गया हो तो जल्दी लौट आता है, संतानहीन को संतान मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।"

उसने पूछा – "यह व्रत कैसे किया जाता है?" स्त्रियों ने समझाया – "हर शुक्रवार श्रद्धा से गुड़ और चने का प्रसाद बनाओ। कथा सुनो या सुनाओ। अगर कोई न हो तो दीपक जलाकर और जल का पात्र रखकर स्वयं पढ़ लो, पर नियम मत तोड़ना। कार्य सिद्ध होने पर उद्यापन करना। (Shukrawar vrat puja mahattva) उद्यापन में खाजा, खीर और चने का साग बनाकर आठ बालकों को भोजन कराना। दक्षिणा देना और उस दिन घर में खटाई नहीं बनानी।"

यह सुनकर वह बहुत प्रसन्न हुई। उसने लकड़ियां बेचकर मिले पैसों से गुड़ और चना खरीदा और माता के मंदिर जाकर प्रार्थना की – "मां, मैं अज्ञानी हूं, नियम ठीक से नहीं जानती। आप मेरे दुख दूर करो।"

माता ने उसकी प्रार्थना सुन ली। अगले ही शुक्रवार उसके पति का पत्र आया और उसके बाद पैसे भी आने लगे। यह देखकर जेठानी और घर के लोग जलने लगे और ताने देने लगे। वह भोली-भाली बहू कहती – "पत्र आए, पैसे आए तो हम सबके लिए अच्छा है।" आंखों में आंसू लिए वह माता के मंदिर जाकर बोली – "मां, मुझे धन नहीं चाहिए। मुझे तो अपने पति का साथ चाहिए।" माता प्रसन्न होकर बोलीं – "जा बेटी, तेरा पति जल्दी आएगा।"

संतोषी माता ने स्वप्न में उसके पति को समझाया – "तेरी पत्नी बहुत कष्ट झेल रही है। घर लौट जा।" उसने कहा – "मां, मेरे पास तो व्यापार का बहुत काम है, कैसे जाऊं?" माता ने उसे उपाय बताया – "सुबह स्नान कर दीपक जलाकर दुकान पर बैठ जाना, सारा लेन-देन पूरा हो जाएगा।" उसने वैसा ही किया और चमत्कार से सारा माल बिक गया। बहुत धन मिल गया और वह पत्नी से मिलने घर लौटने लगा।

उधर उसकी पत्नी रोज लकड़ी लाती थी और संतोषी माता के मंदिर पर विश्राम करती थी। माता ने कहा – "तेरा पति लौट रहा है। लकड़ियों के तीन गट्ठर बना – एक नदी किनारे, एक मेरे मंदिर पर और एक अपने सिर पर रख। (Shukrawar vrat puja mahattva) जब तेरे पति आए तो चौक में गट्ठा डालकर कहना – लो सासूजी, लकड़ी का गट्ठा लो, भूसी की रोटी दो, नारियल के खोपर में पानी दो।" उसने वैसा ही किया। थोड़ी देर बाद उसका पति आया और घर पहुंचा।

वहां बहू ने गट्ठा डालकर आवाज लगाई। सास चौंक गई और बोली – "बहू, ऐसा क्यों कहती है? देख, तेरा पति लौट आया है।" पति ने पत्नी को पहचान लिया और मां से कहा – "अब मैं अलग घर में रहूंगा।" मां ने चाबी देकर अलग घर दे दिया और दोनों सुख से रहने लगे।

कुछ समय बाद पत्नी ने उद्यापन करने की इच्छा जताई। जेठानी ने अपने बच्चों को सिखा दिया कि भोजन के समय खटाई मांगना। लड़कों ने वैसा ही किया और उद्यापन अधूरा रह गया। माता नाराज हुईं और उसका पति जेल भेज दिया गया। बहू रोते हुए मंदिर गई और क्षमा मांगी। माता ने कहा – "तूने भूल की है। अब जाकर तेरा पति रास्ते में मिल जाएगा।" वह बाहर आई और सचमुच पति लौट आया।

अगले शुक्रवार उसने फिर उद्यापन किया। इस बार उसने जेठ के बच्चों की बात न मानी और ब्राह्मणों के बच्चों को भोजन कराया। (Shukrawar vrat puja mahattva) माता प्रसन्न हुईं और नौ महीने बाद उसे सुंदर पुत्र हुआ।

वह पुत्र को लेकर रोज मंदिर जाने लगी। एक दिन माता स्वयं उसके घर आईं, पर भयानक रूप में। सास ने डरकर कहा – "चुड़ैल आ गई, इसे भगाओ।" लेकिन बहू ने पहचान लिया – "यह तो मेरी संतोषी माता हैं।" उसने तुरंत किवाड़ खोल दिए। माता के प्रभाव से घर में सब जगह बालक-बालक ही दिखने लगे।

सबने माता से क्षमा मांगी और कहा – "हमसे भूल हुई, हमें क्षमा करें।" माता प्रसन्न हुईं और आशीर्वाद दिया कि जो भी यह कथा सुने या पढ़े, उसकी सभी इच्छाएं पूरी हों।

ऐसे करें पूजा (Shukrawar puja vidhi in Hindi)

शुक्रवार के दिन संतोषी मां की पूजा करने से जीवन में खुशहाली आती है। माना जाता है कि अगर कोई भी 16 शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत करता है, (Shukrawar vrat puja mahattva) तो इससे उसकी सारी चिंताएं दूर होती हैं।

शुक्रवार के दिन संतोषी मां की पूजा करने से जीवन में सुख और शांति का वास होता है और किसी भी रोग से छुटकारा पाने के लिए इस पूजा को ज़रूर करना चाहिए। इस व्रत में खट्टी चीजों का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए (Shukrawar vrat puja mahattva) नहीं तो जीवन में समस्या आने लगेगी।

Shukrawar puja vidhi in Hindi

शुक्रवार के दिन सफ़ेद चीजों का दान ज़रूर करें

1. शुक्रवार के दिन सफेद चीजों का दान करना काफी शुभ माना जाता है। इसमें चावल, मिश्री, दूध, दही, चीनी और सफेद मिठाई आदि भी शामिल करना चाहिए, (Shukrawar vrat puja mahattva) इस दिन इन चीजों का दान करने से मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं।

2. शुक्रवार को गुड़ या खीर का दान करने से भी घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में बांटना बहुत पुण्य का काम होता है।

3. शादीशुदा महिलाओं को इस दिन सोलह श्रृंगार का सामान दान करना चाहिए। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

4. इस दिन गाय को पालक खिलाना या पहली रोटी खिलाना भी बहुत शुभ माना गया है, क्योंकि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास होता है।

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