सिख ऐतिहासिक दस्तावेज : शिरोमणि कमेटी द्वारा कायम की गई जांच पड़ताल कमेटी पुन: हुई सक्रिय

लुधियाना-अमृतसर :  35 साल पहले गुरू की नगरी अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब में हुए आप्रेशन ब्लू स्टार के वक्त सिख रेफरेंस लाइबेरी से लापता हुए इतिहासिक और धार्मिक प्राचीन दस्तावेजों पर उठ रहे विवादों को हल करने के लिए सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि कमेटी द्वारा कायम की गई जांच पड़ताल कमेटी पुन: सक्रिय हुई है। 

शिरोमणि कमेटी के मुख्य कार्यालय में नियुक्त किए गए जांच कमेटी के सदस्यों की आवश्यक बैठक हुई, जिसमें पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष कृपाल सिंह बंडूगर, बीबी जगीर कौर, कमेटी सचिव डॉ रूप सिंह, दल मेघ सिंह और गुरूनानक देव यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ अमर सिंह शामिल हुए। बैठक के दौरान अलग-अलग तथ्यों की जांच पड़ताल की गई। 

दरअसल 1984 में हुए ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना द्वारा कथित तौर पर अपने कब्जे में लिए गए साहित्य के बारे में कई दिनों से विवाद खड़ा हुआ है। सेना ने समस्त दस्तावेज वापिस करने के दावे किए है। इसी बीच श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के हस्तलिखित पावन स्वरूप विदेश में बेचे जाने के आरोप भी लगे है। 

शिरोमणि कमेटी के कार्यालय में हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कई तथ्यों की जांच पड़ताल की गई। इस अवसर पर शिरोमणि कमेटी के सिख रेफरेंस लाइब्रेरी से जुड़े वर्तमान और कई पूर्व अधिकारियों से विस्तार बातचीत हुई। हालांकि इस बैठक में महत्वपूर्ण मुददा था किंतु इस बारे में मीडिया को कोई अधिक जानकारी नहीं दी गई। 

बैठक के उपरांत शिरोमणि कमेटी के पूर्व प्रधान प्रो. कृपाल सिंह बंडूगर ने बताया कि सिख भावनाओं के साथ जुड़ा यह महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुददा है। इसके हर तथ्य पर गंभीरता के साथ जांच पड़ताल की जा रही है और जल्द ही किसी नतीजे पर जांच को ले जाया जाएंगा। उन्होंने कहा कि इस कमेटी की अगली बैठक 19 जुलाई को होगी। 

यहां उल्लेखनीय है कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सिख रेफरेंस लाइब्रेरी के हुए नुकसान संबंधित रिपोर्ट तैयार करने के लिए नियुक्त की गई स्पैशल कमेटी को कई सिख बुद्धिजीवियों ने रदद किया हुआ है। उनका दावा है कि यह सबकुछ सिखों की आंखों में धूल झोंकने का यत्न है। सिख बुद्धिजीवियों का यह भी कहना था कि शिरोमणि कमेटी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल द्वारा नियुक्त कमेटी के सदस्य वही लोग है, जिन्हें पिछले 2 दशकों से शिरेामणि कमेटी में तैनात किया गया था और उनपर ही दस्तावेजों की गुमशुदगी के आरोप लगे है। 

- सुंनीलराय कामरेड
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