धीमी जांच के कारण आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में नहीं रख सकते : कोर्ट

दिल्ली की एक अदालत ने एक रिश्वत मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि धीमी जांच प्रक्रिया होने के कारण किसी आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने जीएसटी पंजीकरण को रद्द नहीं करने के लिए एक दुकान के मालिक से रिश्वत प्राप्त करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए कर अधिकारी को राहत देते हुए जमानत दे दी। 

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश राज कुमार चौहान ने कहा, "जांच की धीमी प्रक्रिया के लिए अभियुक्त को अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। अभियुक्त अपनी गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।" 

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अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये का जमानती बांड और इतनी ही राशि की जमानत राशि देने का भी निर्देश दिया। 
सुनवाई के दौरान वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारी पारस गोयल ने अपने वकील विजय अग्रवाल के माध्यम से दलील दी कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। 

अग्रवाल ने कहा, "यह आरोप लगाया गया है कि मेरे मुवक्किल ने नौ तारीख को एक नंबर से फोन किया था, जबकि तथ्य यह है कि उक्त फोन नंबर को उस महीने की 21 तारीख को खरीदा गया था।" अभियोजन पक्ष की ओर से दी गई शिकायत में मामला यह है कि गोयल ने कथित तौर पर एक दुकान के मालिक अनुज कुमार से उसके व्यवसाय के पंजीकरण को रद्द नहीं करने के लिए एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। 

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