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राजस्थान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा, कोर्ट स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकता। सदन में क्या कब और कैसे करना है? ये तय करने का अधिकार स्पीकर का है।
राजस्थान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राजस्थान मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद सोमवार को होगी। विधानसभी स्पीकर सीपी जोशी के वकील कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि स्पीकर को फैसले लेने से रोकना न्यायसंगत नहीं है। 
कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा, कोर्ट स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकता। सदन में क्या कब और कैसे करना है? ये तय करने का अधिकार स्पीकर का है। कोर्ट फैसले का समय बढ़ाने के लिए स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकता। जब तक अंतिम निर्णय स्पीकर द्वारा नहीं लिया जाता है, तब तक कोर्ट से कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता है।
सूयरेमे कोर्ट ने कपिल सिब्बल से पूछा, "किस आधार पर अयोग्यता मांगी गई थी?" इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि क्योंकि ये पार्टी विधायक दल की मीटिंग में शामिल नहीं हुए। बिना बताए अनुपस्थित रहकर ये सरकार को अस्थिर करने की साजिश कर रहे थे।अपने मोबाइल भी बंद कर रखे थे। इनको ईमेल से भी नोटिस भेजे गए। अपनी पार्टी के खिलाफ फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहे थे "।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपसे (राजस्थान) हाई कोर्ट ने केवल 24 जुलाई तक इंतजार करने का अनुरोध किया है। स्पीकर के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आदेश में 'निर्देश' शब्द को हटाए, कोर्ट ऐसा नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा तो समस्या केवल शब्द के साथ है? आदेश में 'अनुरोध' होता है। 
जस्टिस अरुण मिश्रा ने सिब्बल से पूछा, "क्या एक व्यक्ति द्वारा चुने गए व्यक्ति अपनी असहमति व्यक्त नहीं कर सकते?" असंतोष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र में क्या किसी को इस तरह बंद किया जा सकता है? सिब्बल ने कहा कि एक फैसले से पहले जब तक निलंबन या अयोग्यता नहीं होती तब तक कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता।
कोर्ट ने सचिन पायलट और 18 विधायकों की ओर से हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी से जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राजस्थान हाईकोर्ट राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के अयोग्य ठहराए जाने के नोटिस के खिलाफ कांग्रेस विधायकों की याचिका पर आदेश पारित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि अगर लोग बार-बार चुने जाएंगे और अयोग्य होते रहेंगे, तो लोकतंत्र का क्या होगा। जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा कि हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की और उसके बाद फैसला दे दिया, हमें फैसले की भाषा पर आपत्ति है।
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