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सुप्रीम कोर्ट मराठा आरक्षण मामले पर 15 जुलाई को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट मराठा आरक्षण मामले पर 15 जुलाई को करेगा सुनवाई
देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र में शिक्षा और नौकरी में मराठा समुदाय के लिये आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी राज्य के कानून से संबंधित याचिकाओं पर 15 जुलाई को सुनवाई होगी। महाराष्ट्र में नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के मामलों में मराठा समुदाय के लये आरक्षण की व्यवस्था के लिये राज्य में सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षण कानून, 2018 लागू किया गया था।

बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल अपने फैसले में इस कानून को सही ठहराते हुये कहा था कि 16 फीसदी का आरक्षण न्यायोचित नहीं है और इस कानून के तहत रोजगार के लिये 12 प्रतिशत तथा शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिये 13 फीसदी आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए।

उच्च न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील लंबित हैं। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ ने इस मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुये कहा कि इन याचिकाओं पर 15 जुलाई को विचार किया जायेगा। इस मामले में पेश कुछ वकीलों ने पीठ से कहा कि इन याचिकाओं पर न्यायालय में सुनवाई की आवश्यकता है क्योंकि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हो सकता है कि इस पर उचित तरीके से न्याय नहीं हो सके।

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पीठ ने कहा कि फिलहाल तो न्यायालय में सुनवाई संभव नहीं होगी और वह अगले सप्ताह इस मामले में अंतरिम राहत के पहलू पर विचार करेगी। कोविड-19 महामारी संक्रमण की वजह से शीर्ष अदालत अभी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ही मुकदमों की सुनवाई कर रही है।

न्यायालय ने छह एमबीबीएस डॉक्टरों की एक अलग याचिका पर पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था। इस याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि 12 प्रतिशत का मराठा आरक्षण मेडिकल के पीजी और डेन्टल पाठ्यक्रमों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 में लागू नहीं होगा। न्यायालय ने पांच फरवरी को मराठा समुदाय के लिये आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी कानून को सही ठहराने वाले उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।
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