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देश की आर्थिक वृद्धि थोड़ी धीमी हुई है लेकिन ये मंदी नहीं है न होगी - सीतारमण

देश की आर्थिक वृद्धि थोड़ी धीमी हुई है लेकिन ये मंदी नहीं है न होगी - सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है और किसी को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। 

श्री सीतारमण ने सदन में ‘देश की आर्थिक स्थिति’ पर अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हाल की तिमाहियों में आर्थिक विकास दर में आयी गिरावट के तकनीकी कारण है और अर्थव्यवस्था की आधार बहुत मजबूत हैं। 

वित्त मंत्री के जवाब से असंतुष्ठ कांग्रेस, तूणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और वाम दलों ने सदन से बहिगर्मन किया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री अपनी तुलना पिछली सरकारों से कर रही है और वास्तविक सवालों का जवाब नहीं दे रही हैं। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए देशहित और आम जनता के हित में 32 बिंदुओं पर फैसले किये हैं जिनका प्रभाव जमीन पर दिखायी दे रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाने और आरोप लगाने की बजाय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग करना चाहिए। 

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि आर्थिक विकास दर धीमी है लेकिन यह मंदी नहीं हैं। इसके तकनीकी कारण है और सरकार इन कमियों को दूर करने के लिए कदम उठा रही है।

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2014 से 2019 की अवधि में भारतीय अर्थव्यस्था की औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत रही है जबकि इससे पिछले पांच वर्ष की अवधि में यह आंकडा 6.4 प्रतिशत था। 

उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में फैसले जनहित में होते हैं और इसी कारण से खुदरा महंगाई, थोक महंगाई और खाद्य मुद्रास्फीति न केवल नियंत्रण में हैं बल्कि वर्षों के निचले स्तर पर हैं। उन्होंने आंकडों का हवाला देते हुये कहा कि वर्ष 2019-20 में अभी तक विदेश प्रत्यक्ष निवेश 238 अरब डालर रहा है और देशी मुद्रा भंडार 440 अरब डालर से ऊपर पहुंच चुका है। 

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के अन्य संकेतक अच्छे संकेत दे रहे हैं। खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर 28 करोड 50 लाख टन तक पहुंच गया गया है। विनिर्माण क्षेत्र में मूल्य वर्धन 342 अरब डालर का रहा है। वाह्यू उधारी 23.9 प्रतिशत घटकर 19.7 प्रतिशत रह गयी है। 

वित्त मंत्री ने कहा कि जुलाई 2019 के बजट में बैंकों की मजबूती के लिए कदम उठायें गये हैं। बैंकों की समस्याओं को पहचाना गया है और उनका समाधान किया गया है। बैंकों के पूंजीकरण के लिए 70 हजार करोड़ रुपए डाले गये हैं और 10 बैंकों का विलय किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे बड़ परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध हो सकेगा।


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