गुरू रविदास मंदिर को गिराए जाने के मामले में दिल्ली में आया पंजाब के लोगों का सेलाब

लुधियाना : दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित साढ़े 500 साल पुराने ऐतिहासिक और धार्मिक श्रद्धाकेंद्र श्री गुरू रविदास मंदिर को कुछ सियासी लोगों के षडयंत्र के तहत गिराए जाने के विरोध में पंजाब और अन्य सूबों से अलग-अलग वर्गो के लोग बड़ी संख्या में दिल्ली स्थित रामलीला मैदान में पहुंचे हुए है। 

इस अवसर पर बड़ी संख्या में पंजाब के दोआबा इलाके विशेषकर जालंधर, फगवाड़ा, नवांशहर और होशियारपुर से दलित भाईचारे के लोगों ने भी इस रोष प्रदर्शन में हिस्सा लिया। वही बड़ी संख्या में बसपा और अन्य पार्टियों के आगुओं का दिल्ली में हर तरफ सेलाब आया हुआ है। दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों से आए लोगों ने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द गुरू रविदास मंदिर की पुन: स्थापना करें।
वही केंद्र की भाजपा सरकार के कंट्रोल वाली दिल्ली विकास अथॉरिटी (डीडीए) की तरफ से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित साढ़े 5 सदियों पुराना ऐतिहासिक रविदास मंदिर गिराऐ जाने के विरोध में मोदी सरकार के विरुद्ध बुद्धवार को रामलीला मैदान में आयोजित रोष धरने में आम आदमी पार्टी के पंजाब और दिल्ली के सीनियर नेताओं, वर्करों व समर्थकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और गुरू रविदास जी के चरण स्पर्श उसी स्थान पर मंदिर का पुनर्निर्माण करने की मांग की।
आप के सीनियर नेताओं में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री रजिन्दरपाल गौतम, पंजाब में विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा, दिल्ली की डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला, विधायक अजय दत्त, मनोज कुमार, पंजाब से विधायक जै कृष्ण सिंह रोड़ी, मनजीत सिंह बिलासपुर, कुलवंत सिंह पंडोरी और यूथ नेता सन्दीप सिंगला प्रमुख हैं।
इस मौके मीडिया को संबोधन करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ऐतिहासिक मंदिर गिराऐ जाने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है, क्योंकि डीडीए सीधे रूप में केंद्र सरकार के अधीन है। चीमा ने कहा कि मंदिर गिराऐ जाने की कार्यवाही ने भाजपा की दलित और दबे-कुचले वर्गों के विरोधी सोच को जनतक कर दिया है। चीमा ने कहा कि आम लोगों को गुमराह करने के लिए अकाली दल बादल और भाजपा के नेता भी रोष धरने में शामिल होने का दिखावा कर रहे हैं, जबकि मंदिर गिराऐ जाने के लिए यह खुद ही जिम्मेदार हैं। 

चीमा ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और सोम प्रकाश को पूछा कि क्या उनके लिए वजीरियां श्री गुरु रविदास जी के प्रति आस्था और सम्मान की अपेक्षा इतनी बड़ी हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरिन्दर मोदी पर लकीर खींच कर दबाव बनाना भी जरूरी नहीं समझा। चीमा ने कहा कि यदि मोदी सरकार गुरू रविदास और करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान करती होती तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हल भी ढूंढ सकती थी।
केजरीवाल सरकार के मंत्री रजिन्दरपाल गौतम ने कहा कि डीडीए की इस कार्यवाही ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भाजपा दलितों, गुरू रविदास पंथियों को आज भी किस हद तक अछूत समझती है। उन्होंने मंदिर का उसी स्थान पर पुनर्निर्माण करवाने की मांग करते हुए कहा कि इस सभी विवाद की असली जड़ कांग्रेस है, यदि 1986 में राजीव गांधी सरकार डीडीए द्वारा गुरू रविदास के साथ सम्बन्धित इस 13 बीघे जमीन को अधीग्रहण न करती तो भाजपा को भी दलितों और रविदास पंथियों की धार्मिक भावनाओं के साथ खीलवाड़ करने का मौका न मिलता। रजिन्दर पाल गौतम ने स्पष्ट किया कि यदि डीडीए दिल्ली सरकार के अधीन होती तो केजरीवाल सरकार ने इस मसले का सार्थिक हल निकालते हुए करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को चोट लगने से बचा लेना था।
आप नेताओं ने कहा कि वह पार्टी स्तर से ऊपर उठ कर रविदास मंदिर का उसी स्थान पर पुनर्निर्माण के लिए संघर्षशील दलित समाज, रविदास पंथ संगठनों और मंदिर की प्रशास्निक समिति के साथ डट कर खड़े हैं। चीमा और रजिन्दरपाल गौतम ने बताया कि वह अपने अपने स्तर पर इस मसले के हल के लिए प्रधान मंत्री नरिन्दर मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं। इस के इलावा रजिन्दरपाल गौतम के नेतृत्व में भाजपा के राष्ट्रीय हैडक्वाटर के समक्ष रोष प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

- सुनीलराय कामरेड
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