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सुल्तानगंज की जनता कहती है कोरोना महामारी को इतना झेलना पड़ा की रूह कांप उठी

सुल्तानगंज में पहला चरण 28 अक्टूबर को वोट डाले जायेंगे। कुछ क्षेत्रों में लोगों से पूछा गया तो बताया कि निर्दलीय विधायक ललन कुमार यहां से सीट तो नहीं जीत सके, लेकिन यहां के जनता की सुख-दुख में अपना भागीदारी निभाते रहे।
सुल्तानगंज की जनता कहती है कोरोना महामारी को इतना झेलना पड़ा की रूह कांप उठी
बोलबंम का नारा है बाबा एक सहारा है पूरे दुनिया के लोग सुल्तानगंज उतरा वाहिनी गंगा से जल लेकर देवघर में भगवान शिव पर जलाभिषेक करने जाते हैं। मगर इस बार कोरोना महामारी को लेकर श्रावणी मेला फिका रहा। बाहर से भी मजदूर अपने घर पर आये उसे भी दो जून की रोटी मिलना मुश्किल हुआ। सरकार ने दावा किया कि हम जनवरी तक का खाना नि:शुल्क चावल-गेहॅू देंगे। मगर बहुत लोगों को राशन भी समय पर नहीं मिला। 2020 विधानसभा का चुनाव अदभूत है पहले तो बिहार की जनता को अनुमान नहीं था कि कोरोना महामारी में भी चुनाव होगा। क्योंकि अब भी सवारी गाडिय़ां बंद है। 
राजनीतिक पंडितों द्वारा चर्चा की जाती थी कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया जायेगा। मगर नीतीश कुमार के जीत के चलते बिहार में चुनाव कराना पड़ा। कोरोना महामारी में भी लाख समाजिक दूरियां बनाने को कहा जाये मगर अब भी हुजूम सराखों पर है। पिछले बार जदयू के विधायक सुबोध राय थे जो यहां पर एक दशक तक विधायक रहे। इस बार उनके जगह पर जदयू ने ललित नारायण मंडल को अपना प्रत्याशी बनाया है। महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस खाते में आ गया जिसका प्रत्याशी ललन कुमार यादव हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू के सुबोध राय को 63,345 वोट मिले थे, दूसरे नम्बर पर हिमांशु पटेल को 49,312 वोट मिले तो वहीं निर्दलीय प्रत्याशी ललन कुमार को 14,073 वोट पर ही संतोष करना पड़ा था। 
सुल्तानगंज में पहला चरण 28 अक्टूबर को वोट डाले जायेंगे। कुछ क्षेत्रों में लोगों से पूछा गया तो बताया कि निर्दलीय विधायक ललन कुमार यहां से सीट तो नहीं जीत सके, लेकिन यहां के जनता की सुख-दुख में अपना भागीदारी निभाते रहे। सुल्तानगंज के जातीय समीकरण मुस्लिम, यादव, भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, कुशवाहा, कुर्मी, दलित और आदिवासी ठीक ठाक हैं। वोट का प्रतिशत 45-50 का रहा। कुल वोटरों की संख्या लगभग 3 लाख 22 हजार है।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में 15 साल शासन किये वहीं 10 साल सुल्तानगंज की जनता ने अपना जनादेश उन्हीं को दिया ताकि क्षेत्र में विकास हो सके। बाढ़ के कारण क्षेत्र के अगल- बगल की स्थिति खराब रहती है। यहां के लोगों के पास रोजगार नहीं होने के कारण अन्य प्रदेश में रोजगार का सहारा लेना पड़ता है मगर कोरोना महामारी के कारण सभी लोग अपने-अपने घरों में आ गये हैं जिससे रोटी-रोटी की आफत  आ पड़ी है। 
सुल्तानगंज भागलपुर जिलान्तर्गत आता है जिसे अनुमंडल का दर्जा देने की घोषणा की गयी थी वह मात्र दिखावा रह गया। वहीं एक महिला अस्पताल का जीर्णोद्वार किया गया है लेकिन अस्पताल चालू नहीं हो सका। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम स्वाथ्य पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री आये और आश्वासन भी दिया लेकिन अस्पताल चालू नहीं हो सका। कुटीर उद्योग नहीं होने के कारण क्षेत्र के आमजन हर समस्या से घिरे हुए हैं।
जहां-जहां पत्रकारों का टीम गया वहां देखा गया कि लोगों में मायूसी छायी है।  लोगों का कहना है कि चावल-दाल से ही घर-परिवार नहीं चलता, कुछ लोग स्टेशन पर चना-भूजा बेचकर गुजारा करते थे लेकिन अभी बंद है। इस बार कोरोना महामारी पर वोट प्रतिशत भी कम होने का अंदेशा है। बिहारी मजदूर अपने घर पर हैं मगर वोट देने के लिए उत्साहित नहीं है।


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