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धर्मशाला में अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही, कहीं गिरे पेड़, तो कहीं बहे मकान और कार

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कांगड़ा जिले के ऊपरी हिस्से धर्मशाला में बाढ़ आ गई है। इस बाढ़ में पर्यटन स्थलों पर कई कारें और इमारतें बह गईं।
धर्मशाला में अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही, कहीं गिरे पेड़, तो कहीं बहे मकान और कार
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कांगड़ा जिले के ऊपरी हिस्से धर्मशाला में बाढ़ आ गई है। इस बाढ़ में पर्यटन स्थलों पर कई कारें और इमारतें बह गईं। इस आपदा से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने यहां सोमवार को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तैनाती की। धर्मशाला में पानी के सैलाब के साथ खड़ी कारें बहती हुई नजर आई और तेज बहाव ने घरों और होटलों को भी आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया है।
जिले में भारी बारिश के बाद दो लोगों के लापता होने की खबर है। राज्य की जमीनी स्थिति की समीक्षा करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से फोन पर बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की एक टीम तैनात की जाएगी। उन्होंने कहा कि संकट से निपटने के लिए केंद्र हर संभव सहायता मुहैया कराएगा।
राज्य की राजधानी शिमला से लगभग 250 किलोमीटर दूर धर्मशाला में 184 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो इस मानसून के दौरान अब तक की सबसे अधिक बारिश है। तिब्बती प्रवासियों के राजनीतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र मैक्लोडगंज के आसपास के गांवों में संपत्ति के नुकसान की सूचना मिली है। धर्मशाला के भागसूनाग में 10 से अधिक कारें, जिनमें से अधिकांश पर्यटकों की थीं, बह गईं।
कांगड़ा के साथ लगते क्षेत्रों में भी नुकसान की खबरें हैं। गग्गल क्षेत्र में मौसमी नाले के किनारे स्थित तीन घर और पांच दुकानें पानी के तेज बहाव से क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि संपत्ति का नुकसान मुख्य रूप से नालों पर अतिक्रमण के कारण हुआ है। जिले में बादल नहीं फटने का दावा करते हुए उपायुक्त निपुण जिंदल ने कहा कि शाहपुर उपमंडल का बोह गांव भूस्खलन के बाद अन्य क्षेत्रों से कट गया है और बचाव अभियान जारी है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि कांगड़ा जिले में कई स्थानों पर भारी से बेहद भारी बारिश दर्ज की गई। बारिश राज्य भर में व्यापक थी। कांगड़ा जिले के पालमपुर में 155 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो राज्य में सबसे अधिक है, जबकि डलहौजी में 48 मिमी, शिमला में 10 मिमी और सुरम्य पर्यटन स्थल मनाली में 55 मिमी बारिश हुई।
मुख्यमंत्री ने भारी बारिश से जान-माल के नुकसान पर दुख जताया है। उन्होंने जिला अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत और बचाव अभियान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए नदी किनारे के पास जाने से परहेज करने का आग्रह किया। मौसम ब्यूरो ने बुधवार तक राज्य में छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून 13 जून को ही हिमाचल प्रदेश पहुंच गया है, जो पिछले 21 वर्षों में सबसे पहले शुरू हुआ है। राज्य में इसका सामान्य आगमन 26 जून रहता है।
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