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श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता बरकरार

सिख पंथ में श्री अकाल साहिब को सर्वोच्च माना जाता है जिसकी स्थापना छठे गुरु हरिगोबिन्द साहिब के द्वारा की गई थी…

09:46 AM Dec 04, 2024 IST | Sudeep Singh

सिख पंथ में श्री अकाल साहिब को सर्वोच्च माना जाता है जिसकी स्थापना छठे गुरु हरिगोबिन्द साहिब के द्वारा की गई थी…

सिख पंथ में श्री अकाल साहिब को सर्वोच्च माना जाता है जिसकी स्थापना छठे गुरु हरिगोबिन्द साहिब के द्वारा की गई थी। इसे श्री दरबार साहिब के ठीक सामने बनाने का उद्देश्य गुरु साहिब का यही था कि यहां बैठकर सिखों की धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियांे पर नजर रखी जा सके और जब कोई गल्ती करे तो उसे सजा भी सुनाई जा सके। इतिहास गवाह है कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के आगे महाराजा रणजीत सिंह ने भी सिर झुकाया और यहां से उन्हें शरीर पर कोड़े मारने का आदेश उस समय के जत्थेदार साहिब के द्वारा सुनाया गया था। सः बूटा सिंह, ज्ञानी जैल सिंह, सुरजीत सिंह बरनाला, जत्थेदार संतोख सिंह आदि अनेक राजनीतिक श​िख्सयतों ने भी श्री अकाल तख्त साहिब के आगे शीश झुकाया मगर पिछले कुछ समय से जिस प्रकार राजनीतिक लोगों के द्वारा अपनी राजनीति हेतु मन मुताबिक फैसले करवाए जाने लगे और तख्त पर विराजमान जत्थेदारों के द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा और वर्चस्व को नजरंदाज कर अपने आकाओं को खुश करने हेतु बिना वजह छोटी-छोटी बात पर हुक्मनामे जारी किये जाने लगे, तो आम सिखों में श्री अकाल तख्त साहिब की महानता दिन प्रतिदिन कम होने लगी। डेरा सच्चा सौदा गुरमीत राम रहीम के द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह के समान्तर पोशाक पहनकर किए अपराध के लिए उन्हें बिना श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश हुए माफीनामा दे दिया गया। मगर आज जिस प्रकार श्री अकाल तख्त साहिब से जत्थेदार साहिबान ने निष्पक्ष होकर फैसला सुनाया उससे एक बार फिर से श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता बरकरार होती दिख रही है। इतना ही नहीं जत्थेदार साहिबान ने समूचे पंथ को एकजुट करने हेतु ‘‘दागी और बागी’’ भाव सभी सिख जत्थेबं​िदयांे को एक होकर पंथ की चढ़दीकला के लिए कार्य करने को कहा है इससे आने वाले दिनों में निश्चित तौर पर सिख पंथ एकजुट होता दिख सकता है और शिरोमणी अकाली दल पुनः मजबूत हो सकता है। समाजसेवी दविन्द्रपाल सिंह पप्पू ने कहा जब भी किसी ने श्री अकाल तख्त साहिब से टकराव किया और वहां से आए आदेश की पालना नहीं की तो उसका हश्र बुरा हुआ है। उनकी मानें तो 2013 में सरना दल की हार का मुख्य कारण ही श्री अकाल तख्त साहिब से टकराव था अन्यथा दिल्ली में बादल दल का वजूद उसी समय खत्म हो चुका था।

आखिरकार सुखबीर सिंह बादल ने जुर्म कबूल किए

लम्बे समय से शिरोमणी अकाली दल को डेरा मुखी को माफी, गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी, बहबलकला में बेअदबी का इन्साफ मांगने वाले बेगुनाह सिखों पर की गई गोलीबारी के लिए दोषी माना जाता रहा है जिसके चलते ही आज पंजाब के लोगों ने शिरोमणी अकाली दल को सत्ता से पूरी तरह से बाहर कर दिया मगर आज तक अकाली नेता इसे मानने को तैयार नहीं थे। शायद उन्हंे लग रहा था कि मामला श्री अकाल तख्त साहिब पर जाएगा और वहां तो जत्थेदार उनके मुलाजिम ही हैं भलां वह उन्हें दोषी कैसे करार देंगे। मगर मौजूदा जत्थेदार साहिबान भले ही सिंह साहिब ज्ञानी हरप्रीत सिंह हों यां फिर ज्ञानी रघुबीर सिंह उन्हांेने अपनी जिम्मेवारी का बाखूबी निर्वाह करते हुए दोषियांे पर बिना किसी राजनीतिक दबाव में आए ऐसा फैसला सुनाया जिसकी शायद शिरोमणी अकाली दल नेताओं ने सोची भी नहीं होगी। राजनीतिक क्षेत्र में शिरोमणी अकाली दल के विरोधी भी जत्थेदार साहिबान के फैसलों को सही ठहराते दिखे। मगर आम जनता इससे अभी भी संतुष्ट नहीं है। सोशल मीडीया पर बहुत से लोग इसे अकाली नेताओं और जत्थेदारों के बीच पहले से ही तय रणनीति के तहत लिया गया फैसला बता रहे हैं। उनकी मानें तो सुखबीर सिंह बादल और उनके परिवार द्वारा सिख पंथ के साथ जो गद्दारी की गई जिसके चलते अनेक युवाओं की शहादतें हुई उसके लिए इतनी सजा काफी नहीं हो सकती। जत्थेदार साहिबान को चाहिए कोई सख्त सजा सुनानी चाहिए थी। हालांकि देखा जाए तो ज्ञानी हरप्रीत सिंह के द्वारा सजा सुनाते समय शिरोमणी अकाली दल के चीथड़े उधेड़ कर रख दिये मगर वहीं अन्य जत्थेदारों का रवैया बादल के प्रति नरम ही दिखा। सुखबीर सिंह बादल के द्वारा जत्थेदारों पर निरन्तर दबाव बनाया जा रहा था। अकाली नेताओं सहित वह लोग जिन पर खुद पर तरह तरह के आरोप लगे हों वह भी सुखबीर बादल की हिमायत करते दिख रहे थे। जिसके चलते ऐसा लग रहा था कि शायद सुखबीर सिंह बादल को कहीं दोषमुक्ति ना कर दिया जाए मगर नहीं जत्थेदार साहिबान के द्वारा भले ही कम सजा लगाई गई मगर उन्होंने साबित कर दिया कि श्री अकाल तख्त साहिबान आज भी सिखों की सर्वोच्च धार्मिक सस्था है और यहां से दोषी भले ही कितना भी प्रभावशाली क्यों ना हो उसे गल्ती करने पर सजा निश्चित तौर पर मिलेगी। जत्थेदार साहिबान के द्वारा दागी और बागी सभी अकालियों को एकसाथ मिलकर कौम की बेहतरी के लिए कार्य करने का निर्देष देकर सुखबीर बादल के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पहले सर्कल, जिला इकाई बनाने के बाद ही पार्टी प्रधान की बारी आएगी और उसका चुनाव भी अब पहले की तरह हाथ उठाकर नहीं होगा बल्कि जिसे समूची पार्टी के लोग वोट देंगे वहीं प्रधान बनकर अकाली दल की कमान संभालेगा।

रवनीत बिट्टू के प्रयासों से सिख संगत को राहत

पंजाब की जनता ने भले ही रवनीत सिंह बिट्टू को चुनावों में विजयी ना दिलाई हो मगर रवनीति सिंह बिट्टू जब से रेल राज्यमंत्री बने हैं सिख मसलों के समाधान हेतु निरन्तर तत्पर हैं। पिछले दिनों तख्त हजूर साहिब नांदेड़ से पांच तख्तों के दर्शनों हेतु चलाई गई विशेष रेलगाड़ी के समूचे प्रबन्ध में उन्हांेने अपना योगदान दिया और आज जब पंजाब से तख्त पटना साहिब जाने वाली श्री अकाल तख्त ट्रेन को अचानक रद्द कर दिया गया तो संगत में अचानक रोष पैदा हो गया क्योंकि श्री गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी पर्व मनाने हेतु अखण्ड कीर्तनी जत्थे की संगत ने पहुंचना था। वहीं जनवरी माह में गुरु गोबिन्द सिंह ंजी महाराज का प्रकाश पर्व मनाने के लिए भी संगत पहले से टिकट बुक करवा चुकी है। इतना ही नहीं इस ट्रेन से हजारों की गिनती में संगत हर माह तख्त पटना साहिब दर्शनों के लिए पहुंच रही है। इसकी सूचना जैसे ही तख्त पटना कमेटी के अध्यक्ष जगजोत सिंह सोही को मिली तो उन्होंने रवनीत बिट्टू से संपर्क किया जो कि एक मीटिंग में थे, उन्होंने वहीं से विभाग को आदेश जारी कर ट्रेन को पहले की भान्ति सुचारु रखने को कहा जिसके बाद संगत ने राहत की सांस ली है।

हरविन्दर सिंह सरना तनखैया करार

दिल्ली गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हरविन्दर सिंह सरना को जत्थेदार साहिबान के द्वारा उनके प्रति गलत शब्दावली का प्रयोग करने के लिए तनखैया करार दिया है। जत्थेदार अकाल तख्त के द्वारा सुखबीर सिंह बादल पर फैसला सुनाने से पहले बुद्धिजीवियों की राय मांगी गई थी जिसके बाद हरविन्दर सिंह सरना के द्वारा जत्थेदारांे पर टिप्पणी की थी कि क्या कौम के जत्थेदार इतने कमजोर हैं जो अपना फैसला स्वयं नहीं दे सकते। देखा जाए तो इसमें कुछ गलत भी नहीं कहा था, आज अगर सुप्रीम कोर्ट का जज आरोपियों को सजा सुनाने के लिए जनता की राय मांगने लगे तो, शायद उसे जज की कुर्सी पर बैठने का अधिकार ही नहीं होना चाहिए। हरविन्दर सिंह सरना ने साफ कहा है कि वह श्री अकाल तख्त साहिब को पूरी तरह से समर्पित हैं मगर सेवादारों के आगे कभी माथा नहीं टेका। दिल्ली कमेटी के मौजूदा प्रबन्धकों के द्वारा मनजीत सिंह जीके और परमजीत सिंह सरना को डेरा सच्चा सौदा मुखी मामले में श्री अकाल तख्त साहिब से सजा देने की मांग की गई है तो वहीं सः मनजीत सिंह जीके ने मनजिन्दर सिंह सिरसा पर श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश की अवहेलना के चलते उन पर कार्यवाही की मांग की है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में श्री अकाल तख्त साहिब दिल्ली के पंथक नेताओं पर किस तरह की कार्यवाही करता है।

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