बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए TMC-कांग्रेस मिला सकती है हाथ

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विजय रथ को रोकने के लिए कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) साथ में गठबंधन कर सकती है। बीजेपी को रोकने के लिए दोनों पार्टियां अपना पूरा ज़ोर लगा रही है। टीएमसी और कांग्रेस ने अनौपचारिक बातचीत करनी शुरू कर दी है। 2021 में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए टीएमसी ये फैसला ले सकती है। 

सूत्रों के मुताबिक टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के साथ कांग्रेस ने बातचीत शुरू कर दी है। दरअसल, पिछले हफ्ते बजट सत्र के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने टीएमसी के लोकसभा चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी से लगभग आधे घंटे तक बातचीत की थी। 


इस मामले को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ही अंतिम फैसला लेंगी। राहुल गांधी और सीएम बनर्जी के बीच औपचारिक बातचीत तब हुई जब टीएमसी सांसद सुदीप बंधोपाध्याय और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इसी मुद्दे पर पहले बात की थी। 

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस को बंगाल में अपनी चुनावी रणनीति पर पुनर्विचार करना है, जो देश का तीसरा सबसे बड़ा चुनावी राज्य है और लोकसभा में 42 प्रतिनिधियों को भेजता है। 2016 विधानसभा चुनावों में हमने वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन कम्युनिस्ट अब खत्म हो चुकी है। 

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हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि कांग्रेस बंगाल में बीजेपी को अकेले नहीं हरा सकती है। गौरतलब है की लोकसभा चुनाव के दौरान तृणमूल को राज्य का 43.3 प्रतिशत वोट मिला। राहुल गांधी के साथ अपनी बैठक को लेकर कल्याण बनर्जी ने कहा, 'मैंने उनसे कहा कि कांग्रेस की तरह हम भी बीजेपी को मुख्य दुश्मन मानते हैं। लेकिन मैंने उनसे कहा कि जहां वे सहयोग बढ़ाना चाहते हैं वहीं कांग्रेस के लोकसभा नेता अधीर रंजन चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष सोमेन मित्रा सहित कई अन्य नेता तृणमूल के विरुद्ध हैं।' 

वहीं बीजेपी के हिस्से में लगभग 40.3 प्रतिशत वोट आए। ममता बनर्जी लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रही है। मोदी लहर को रोकने के लिए पहले भी कई विरोधी पार्टियां साथ आ चुकी है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाजवदी पार्टी (बीएसपी) साथ में आई थी। इससे पहले ये दोनों ही पार्टियां एक दूसरे की कट्टर विरोधी थी। हालाँकि इनके साथ आने का भी लोकसभा चुनाव में इन्हे कोई फायदा नहीं हुआ।


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