चोर पकड़ने में फेल हुई पुलिस तो मदद लेने पहुंची तांत्रिक के पास, राजस्थान हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी की जम कर लगाई फटकार
Cop Turns to Tantrik in Theft Probe : राजस्थान में अजीबोंगरीब मामला सामने आया है जहां चोरी के एक केस की जांच कर रही पुलिस तांत्रिक की मदद लेने पहुंच गई. यह मामला इतना अजीबोंगरीब था कि हाईकोर्ट तक को पुलिस को फटकार लगानी पड़ गई. वहीं इस मामले में जांच अधिकारी को तुरंत बदलने का आदेश दे दिया गया. कोर्ट ने इस मामले में जांच अधिकारी को बदलने का आदेश देते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का निर्देश पुलिस को दिया.
मामला नागौर जिले का है है जहां राजस्थान हाईकोर्ट ने गहनों की चोरी के एक मामले की जांच में कथित तौर पर तांत्रिक की मदद लेने पर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है. इस दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले की जांच अंधविश्वास या तांत्रिक के इशारों पर नहीं की जा सकती. कोर्ट ने इस मामले में जांच अधिकारी को बदलने का आदेश देते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
सीनियर अधिकारी को सौंपी जाए जांच

कोर्ट ने इस मामले की जांच अब सीनियर अधिकारी को सौंपने को कहा है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मुन्नरी लक्ष्मण की सिंगल बेंच ने नागौर एसपी को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर जांच को किसी अन्य थाने के सब-इंस्पेक्टर या उससे सीनियर अधिकारी को सौंपा जाए. कोर्ट ने माना कि मौजूदा जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मामला 80 वर्षीय महिला द्वारा चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद शुरू हुआ. महिला ने 8 मार्च 2026 को पुलिस को इस मामले में शिकायत दी थी. शिकायत में बताया गया कि 7 मार्च की रात उनके घर से डेढ़ तोला सोना, 300 तोला चांदी और करीब 24 हजार रुपये नकद चोरी हो गए. महिला द्वारा पुलिस को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम भी बताए गए थे, लेकिन लंबे समय तक न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी और न ही चोरी का सामान बरामद हुआ.
तांत्रित के पास पहुंच गया जांच अधिकारी

शिकायत पर कोई खास कार्रवाई न होते देख याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में बताया गया कि जांच अधिकारी ने इस मामले में अन्धविश्वास का सहारा लिया. जांच अधिकारी शिकायतकर्ता की बहु के पिता और गांव के कुछ बुजुर्गों को लेकर अलवर जिले के तांत्रिक के पास पहुंचा, जहां तांत्रिक ने शिकायतकर्ता की बहु के पिता पर ही चोरी में शामिल होने की बात कह दी.
इसके बाद पुलिस की शक के दायरे में आ गए. इस मामले में कोर्ट ने साफ किया कि कानून व्यवस्था और आपराधिक जांच तथ्यों, साक्ष्यों और पेशेवर जांच पर आधारित होनी चाहिए, न कि तांत्रिकों की राय पर.

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