आज है International Tea Day, जानिए कैसे चीन से होते हुए भारत में चाय घर-घर तक पहुंच गई?
International Tea Day 2026 : भारत में सुबह की शुरुआत अगर चाय से न हो तो सुबह सुबह नहीं मनाई जाती. चाय भारत का एक रिवाज की तरह है. जब कोई मेहमान घर में आता है तो सबसे पहले चाय पूछी जाती है. भारत समेत दुनियाभर में चाय का अपना इतिहास है. इतिहास भी ऐसा कि हैरानी हो जाए.
आज यानी 21 मई को दुनिया भर में 'चाय दिवस' के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है. 2020 में इसे यूनाइटेड नेशंस ने मान्यता दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य चाय के लंबे इतिहास, सांस्कृतिक महत्व, और इसके आर्थिक प्रभाव का जश्न मनाना है. इसके साथ ही यह दिन चाय श्रमिकों के अधिकारों, निष्पक्ष व्यापार (fair trade), और चाय उत्पादन से जुड़ी गरीबी व भुखमरी जैसी समस्याओं के समाधान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है.
लेकिन चाय की यह कहानी आज की नहीं है, न ही भारत जो सबसे ज्यादा चाय पीने वाला देश है उससे यह कहानी शुरू होती है, बल्कि यह उस देश से शुरू होती है जो भारत का पडोसी है और विश्व जीतने की जिद में आगे बढ़ रहा है.
Chai Culture India : चाय का इतिहास

बात करीब 5000 साल पुरानी है. चाय की शुरुआत चीन में एक औषधीय पेय के रूप में हुई थी. आज यह दुनिया में पानी के बाद सबसे अधिक पिया जाने वाला पेय बन चुका है, जिसने शाही दरबारों से लेकर आम लोगों की चौपाल तक का लंबा सफर तय किया है.
एक चीनी पौराणिक कथा के अनुसार, सम्राट शेन नुंग के गर्म उबलते पानी में गलती से कुछ जंगली पत्तियां गिर गईं. इससे पानी का रंग बदल गया और उसमें भीनी खुशबू आने लगी. जब राजा ने इसे पिया, तो उन्हें ताजगी महसूस हुई, इस तरह पहली बार चाय की खोज हुई. शुरुआत में चाय को दवाई के रूप में इस्तेमाल किया गया, मगर धीरे धीरे यह चीन का राष्ट्रीय पेय बन गया.
मगर यह वो समय था जब चाय वर्ल्ड वाइड प्रचलित नहीं थी लेकिन उपनिवेशवाद के चलते चीजें बदलने लगी. डच और पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा चाय चीन से यूरोप लाई गई. ब्रिटेन में महारानी कैथरीन ने इसे शाही दरबारों में फैशन और रईसी का प्रतीक बना दिया. इस तरह चाय एलीट से जुड़ गई.
Indian Tea Habits : भारत में शुरुआत

भारत में मूल रूप से चाय पीने की प्रथा ब्रिटिश काल में शुरू हुई. अंग्रेजों ने चीन के एकाधिकार को तोड़ने और सस्ता विकल्प खोजने के लिए असम और दार्जिलिंग के जंगलों में चाय के पौधे खोजे तथा चीन से पौधे लाकर खेती की शुरुआत की. माना जाता है कि 1823 में रॉबर्ट ब्रूस (Robert Bruce) नामक स्कॉटिश खोजकर्ता ने असम की पहाड़ियों पर जंगली चाय के पौधे खोजे. भारत में चाय की खोज 1820-1830 के दशक में शुरू हुई.
माना जाता है कि 1833 में लखीमपुर में पहला चाय बागान शुरू किया गया. 1839 में 'असम कंपनी' का गठन हुआ और 1838 में पहली भारतीय चाय सार्वजनिक बिक्री के लिए इंग्लैंड भेजी गई. चीन से अच्छी गुणवत्ता वाली चाय (कैमेलिया साइनेंसिस) प्राप्त करने के लिए अंग्रेजों ने जासूसी के माध्यम से चीन से चाय के बीज और पौधे भारत (मुख्य रूप से असम और दार्जिलिंग) मंगवाए.
Tea History India : भारत में लगी चाय की लत

19वीं सदी के अंत तक भारत में आम जनता चाय नहीं पीती थी. 1920 और 1930 के दशक में चाय की बिक्री बढ़ाने के लिए, ब्रिटिश टी बोर्ड और रेलवे ने भारतीयों को मुफ्त चाय पिलानी शुरू की. इसके बाद भारतीयों ने अपनी पसंद के अनुसार इसमें दूध, चीनी, और मसालों (अदरक, इलायची) का मिश्रण जोड़कर इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया. माना जाता है कि इसके बाद भारत में चाय इतनी तेजी से फैलनी शुरू हो गई कि घर घर की मुख्य पेय पदार्थ बन गई.
आज भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है और यहाँ उत्पादित होने वाली चाय का 70% से अधिक हिस्सा देश में ही खपत हो जाता है.
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