W3Schools
Advertisement

Punjab News: इस स्वतंत्रता दिवस, स्वस्थ पंजाब: भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 6 लाख से अधिक उपचार

09:37 PM Aug 14, 2026 IST | Amit Kumar
punjab news  इस स्वतंत्रता दिवस  स्वस्थ पंजाब  भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 6 लाख से अधिक उपचार

Punjab News: जब भारत अपना 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तब आपातस्थिति में महँगी चिकित्सा के डर से मुक्ति भी जनकल्याण का एक महत्त्वपूर्ण पैमाना बनकर उभर रही है। पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है और पिछले सात महीनों में इस योजना के तहत छह लाख से अधिक उपचार दर्ज किए जा चुके हैं।

Advertisement

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आँकड़ों के अनुसार, 69,12,697 पात्र परिवारों के मुकाबले अब तक 26,18,712 लाभार्थियों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) किया जा चुका है। अब तक 3,02,906 मरीज़ों ने उपचार प्राप्त किया है, जिनमें 6,06,892 उपचार और 15,267 प्रक्रियाएँ शामिल हैं। योजना के तहत 880 सूचीबद्ध अस्पताल हैं, जबकि दर्ज औसत क्लेम राशि ₹14,628.04 है।

Advertisement

इस अवसर पर, पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “डायलिसिस से लेकर कैंसर उपचार तक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में छह लाख उपचार पूरे हो गए हैं। गंभीर और महँगी स्वास्थ्य सेवाओं में इस योजना का उपयोग विशेष रूप से देखने को मिल रहा है। क्रॉनिक हीमोडायलिसिस के 1,99,417 उपचार किए गए हैं, जबकि कैंसर के 60,504 मामले और 1,85,220 आपातकालीन मामले भी दर्ज किए गए हैं।”

Advertisement

इसके अतिरिक्त, हृदय संबंधी उपचार भी योजना का एक प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। आँकड़ों के अनुसार, डायग्नोस्टिक एंजियोग्राफी सहित 10,428 पीटीसीए प्रक्रियाएँ की गई हैं, जिन पर ₹100 करोड़ का ख़र्च आया है। कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग(सीएबीजी) के 611 उपचारों पर लगभग ₹8.20 करोड़ ख़र्च हुए, जबकि 507 पेसमेकर प्रक्रियाओं पर लगभग ₹6.79 करोड़ ख़र्च किए गए।

हड्डी एवं जोड़ संबंधी उपचारों में भी योजना का पर्याप्त उपयोग हुआ है। कुल 11,796 घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) किए गए, जिन पर ₹94.89 करोड़ ख़र्च हुए। योजना के तहत 1,092 कुल हिप रिप्लेसमेंट भी दर्ज किए गए, जिनकी लागत ₹10.75 करोड़ रही। इसके अलावा, फ्रैक्चर फिक्सेशन की 2,200 से अधिक प्रक्रियाएँ की गईं। कैंसर उपचार के 60,504 दर्ज मामलों पर लगभग ₹159.41 करोड़ ख़र्च हुए, जबकि 2,02,793 दर्ज डायलिसिस मामलों पर ₹33.14 करोड़ का ख़र्च हुआ।

इस योजना का लाभ सरकारी और निजी, दोनों अस्पतालों में पहुँच रहा है। निजी स्वास्थ्य संस्थानों में 3,36,161 मामलों का उपचार किया गया, जबकि सरकारी अस्पतालों में 2,70,731 मामलों का उपचार हुआ। दर्ज ख़र्च क्रमशः ₹614.08 करोड़ और ₹479.85 करोड़ रहा।

ज़िला स्तर के आँकड़ों में उपचार के उपयोग के अलग-अलग पैटर्न सामने आए हैं। पटियाला में सबसे अधिक 28,977 मरीज़ों का उपचार किया गया, इसके बाद बठिंडा में 23,446, लुधियाना में 22,620 और जालंधर में 20,193 मरीज़ों का उपचार हुआ। बठिंडा में सबसे अधिक ₹200 करोड़ का खर्च दर्ज किया गया, जिसके बाद पटियाला में ₹100 करोड़, अमृतसर में ₹99.23 करोड़ और जालंधर में ₹91.30 करोड़ ख़र्च हुए।

*आँकड़ों के पीछे, लाभार्थियों की कहानियाँ*

आँकड़े योजना के स्तर को दर्शाते हैं, लेकिन लाभार्थियों के अनुभव यह बताते हैं कि कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच परिवारों के लिए क्या मायने रखती है। पित्ताशय(गॉल ब्लैडर) और रीढ़ संबंधी समस्याओं का उपचार करवाने वाली संदीप कौर ने कहा कि उपचार ने उन्हें बेहतर जीवन की ओर लौटने में मदद की है। उन्होंने कहा, “सफल उपचार के बाद मैं पहले से बहुत बेहतर हूँ। मैं नई उम्मीद के साथ अपना जीवन जी रही हूँ।”

स्तन कैंसर का उपचार करवा रहीं निशि गुप्ता के लिए स्वास्थ्य कार्ड ने लंबे समय तक चलने वाले उपचार से जुड़े आर्थिक दबाव को कम किया है। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से मेरे स्तन कैंसर का उपचार नि:शुल्क शुरू हुआ है और बिना किसी ख़र्च के जारी है। इससे मुझे और मेरे परिवार को बहुत राहत मिली है।”

पटियाला के हाकम सिंह के लिए, यह योजना अचानक उत्पन्न हुई हृदय संबंधी आपात स्थिति के दौरान बेहद महत्त्वपूर्ण साबित हुई। अपने लक्षणों को याद करते हुए उन्होंने कहा, “अचानक मेरे सीने में दर्द होने लगा।” हृदय संबंधी बीमारी का नि:शुल्क उपचार मिलने के बाद हाकम सिंह ने सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि अब वह अधिक खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

एक अन्य लाभार्थी गुरचरण सिंह ने गंभीर बीमारी के साथ आने वाले आर्थिक डर को सीधे शब्दों में व्यक्त किया: उन्होंने कहा, “हम यह सोचते-सोचते ही मर जाते कि पैसे कहाँ से लाएँगे।”

इन लाभार्थियों के लिए, कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का महत्त्व सरकार द्वारा ख़र्च की गई राशि से कहीं अधिक है। इसका अर्थ है कि ऐसे समय में उनके परिवारों को उस धन की व्यवस्था नहीं करनी पड़ी, जब उनकी प्राथमिकता उपचार और स्वस्थ होने की थी।

जब देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, ऐसे में पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के आँकड़े जनकल्याण को देखने का एक और दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं—सिर्फ इस आधार पर नहीं कि कितने लोगों को स्वास्थ्य कवर मिला, बल्कि इस आधार पर भी कि कितने लोग गंभीर उपचार तक पहुँच बनाने में सक्षम हुए, जब उन्हें इसकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता थी।

Advertisement
Author Image

Amit Kumar

View all posts

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

Advertisement
Advertisement
×