शुरू हो चुकी है Kinnaur Kailash Yatra, रजिस्ट्रेशन से ट्रेक तक जानें हर जरूरी अपडेट
Kinnaur Kailash Yatra Tour Package: देश में सावन का महीना शुरू होते ही सभी श्रद्धालु प्रसिद्ध शिव धामों पर दर्शन करने की योजना बनाने लगते हैं। ऐसे में कई श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश की किन्नौर कैलाश यात्रा पर भी जाने का प्लान करते हैं, क्योंकि यह धाम अपने आप में ही विशेष महत्व रखता है। यहां की यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ रोमांचक और कठिन ट्रेक के लिए भी जानी जाती है। अगर आप 2026 में दिल्ली से किन्नौर कैलाश जाने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा शुरू करने से पहले जरूरी जानकारी जरूर जान लें। जिला प्रशासन के अनुसार, साल 2026 में किन्नौर कैलाश यात्रा 30 जुलाई से 10 अगस्त तक आयोजित की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मौसम के हालात को देखते हुए यात्रा को शुरू किया जाता है। प्रशासन की अनुमति और रजिस्ट्रेशन के बिना किसी भी श्रद्धालु को ट्रेक पर जाने की परमिशन नहीं होती है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर कैलाश भगवान शिव का बेहद पवित्र स्थल माना जाता है। यहां प्राकृतिक रूप से बनी विशाल चट्टान को शिवलिंग का स्वरूप माना जाता है। सावन के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। लेकिन यह यात्रा आसान नहीं है। ऊंचाई और कठिन रास्तों की वजह से केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ लोगों को ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है।
दिल्ली से किन्नौर कैलाश कैसे पहुंचें?
दिल्ली से शिमला की दूरी करीब 350 किलोमीटर है। आप वोल्वो, हिमाचल रोडवेज की बस या अपनी कार से आसानी से शिमला पहुंच सकते हैं। शिमला से रिकांग पियो लगभग 220 किलोमीटर दूर है। यहां तक हिमाचल रोडवेज की नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं। रिकांग पियो से टांगलिंग गांव पहुंचना होता है। यही गांव किन्नौर कैलाश यात्रा का बेस कैंप माना जाता है और यहीं से ट्रेक की शुरुआत होती है।
किन्नौर कैलाश ट्रेक हिमालय के चुनौतीपूर्ण ट्रेक में शामिल है। रास्ते में मिलिंग खाटा और पार्वती कुंड जैसे पड़ाव आते हैं। इसके बाद श्रद्धालु पवित्र शिवलिंग तक पहुंचते हैं। ऊंचाई अधिक होने के कारण सांस फूलना और जल्दी थकान महसूस होना सामान्य बात है। इसलिए धीरे-धीरे चढ़ाई करें और शरीर पर ज्यादा दबाव न डालें।
यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन जरूरी
- प्रशासन ने यात्रा के लिए कुछ नियम तय किए हैं।
- बिना रजिस्ट्रेशन यात्रा की अनुमति नहीं मिलेगी।
- मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है।
- प्रतिदिन केवल 375 श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाती है।
- रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से कराया जा सकता है।
यात्रा में क्या सामान जरूर रखें?
पहाड़ों में मौसम कभी भी बदल सकता है। इसलिए इन जरूरी चीजों को साथ रखें।
- रेनकोट या पोंचो
- गर्म जैकेट
- मजबूत ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज
- टॉर्च
- पानी की बोतल
- जरूरी दवाइयां
- ट्रेकिंग स्टिक
- ड्राई फ्रूट्स या हल्के स्नैक्स
यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- यात्रा के दौरान कुछ सावधानियां भी आपकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।
- हमेशा तय किए गए रास्ते पर ही चलें और शॉर्टकट लेने से बचें। कोशिश करें कि अकेले ट्रेक न करें।
- रास्ते में कचरा या प्लास्टिक बिल्कुल न फेंकें और प्राकृतिक वातावरण को साफ रखें।
- अगर मौसम अचानक खराब हो जाए या तबीयत ठीक न लगे, तो आगे बढ़ने की बजाय सुरक्षित स्थान पर रुकें और प्रशासन या स्थानीय गाइड के निर्देशों का पालन करें।
- दिल्ली से किन्नौर कैलाश यात्रा के लिए कम से कम 5 से 6 दिन का समय निकालना चाहिए।
- अगर मौसम खराब होने की संभावना हो, तो एक एक्स्ट्रा दिन का समय भी अपने यात्रा कार्यक्रम में शामिल करना बेहतर रहेगा।
- सही योजना, अच्छी शारीरिक तैयारी और प्रशासन के सभी नियमों का पालन करके आप इस पवित्र यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और यादगार बना सकते हैं।

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