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नए हथियारों से यूक्रेन को मिली ताक़त, अब खेरसॉन पर पुन: नियंत्रण पाने की आस

नए हथियारों से यूक्रेन को मिली ताक़त, अब खेरसॉन पर पुन: नियंत्रण पाने की आस
हाल में यूक्रेन युद्ध में दोनों पक्षों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रणनीति में बदलाव आया है, जिसका मुख्य कारण नए हथियारों की आवक है। रूसी सैनिकों के 24 फरवरी को यूक्रेन में घुसने के बाद शुरुआत में यूक्रेनी सशस्त्र बलों ने रूसी हथियारों का मुकाबला करने के लिए ब्रिटेन निर्मित एनएलएडब्ल्यू टैंक-रोधी मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए कुशल रक्षात्मक रणनीति अपनाई, जिससे सैनिकों को कीव में प्रवेश करने से रोका जा सके।
हवा का रुख तब बदल गया जब रूसी सशस्त्र बलों ने विरोधी पक्ष के साथ-साथ नागरिकों को रणनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए अपने भारी आयुध भंडार का इस्तेमाल किया। डोनबास क्षेत्र पर केंद्रित रहने का निर्णय आंशिक रूप से आयुध भंडार पर ध्यान लगाकर रखने के रूसी निर्णय से जुड़ा था, क्योंकि इसके सशस्त्र बल 2014 से वहां तैनात हैं और क्षेत्र को अच्छी तरह से जानते हैं।
रूसी हमलों को कमजोर करने की स्थिति में यूक्रेन 
यूक्रेनी सशस्त्र बल अब मानते हैं कि वे दक्षिण में रूसी हमलों को कमजोर करने की स्थिति में हैं। यूक्रेन के दक्षिण में खेरसॉन की लड़ाई इस नई रणनीति में महत्वपूर्ण हो सकती है। यह यूक्रेनी सशस्त्र बलों को उन क्षेत्रों पर कब्जा शुरू करने का अवसर प्रदान कर सकती है जहां रूसी सैनिक तैनात हैं। यह संभवत: अन्य क्षेत्रों पर भी दावा करने का मौका दे सकती है जिन्हें स्थानीय रूस-समर्थक समूह उनके क्षेत्रों के रूप में चिह्नित करना चाहते हैं। आशा की यह नयी किरण यूक्रेन के बंदूकधारियों को अमेरिका द्वारा आठ हिमर मल्टीपल रॉकेट लांचर दिए जाने के बाद दिखी है। अमेरिका ने ऐसे और संसाधन देने का वादा किया है।
इसने यूक्रेन की सेना को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ने में सक्षम बनाया है। रूसी आयुध भंडार को देखकर छिपने के लिए मजबूर होने तथा पलटवार करने के लिहाज से सीमित हथियार रखने के बजाय यूक्रेन के लोग अब गोला-बारूद भंडारों, रडार, आयुध ठिकानों को लंबी दूरी से नष्ट करने में सक्षम हैं।
इस तरह की अफवाहें हैं कि रूस को यूक्रेन के खिलाफ आक्रमण के लिए सीरिया से अपने कुछ सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा। पश्चिमी मीडिया भी रूसी पक्ष में भारी नुकसान के अमेरिकी अनुमानों की खबरें जारी कर रहा है। ऐसे संकेत मिले हैं कि रूस के अधिकतर आयुध भंडार या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं या उनका सीमा से अधिक उपयोग किया जा चुका है।
इस बीच रूस की निजी सुरक्षा सैन्य कंपनी वागनेर ग्रुप से निपटने की यूक्रेन की योजना अधिक आक्रामक इरादों को पेश करती है। वहीं, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एंतोनिवस्की ब्रिज की तबाही यूक्रेन की नयी शस्त्र प्रणाली के प्रभाव का सफल प्रदर्शन है।
रूस के खेल का आखिरी चरण
इस लिहाज से खेरसॉन यूक्रेन के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है जिस पर मार्च 2022 से ही कब्जा है। यह शहर कई कारणों से बहुत अहम है। खेरसॉन पर नियंत्रण का सबसे पहले मतलब है कि उन बंदरगाहों तक पहुंच सुगम हो सकती है जहां से यूक्रेन फिर से अनाज समेत अन्य वस्तुओं का निर्यात कर सकता है। रूस के खेल का आखिरी चरण मोल्दोवा तक के क्षेत्र को नियंत्रित करने के लक्ष्य वाला प्रतीत होता है ताकि अलग हुए ट्रांसनिस्त्रिया गणराज्य से रूसी समर्थक अलगाववादियों को जोड़ा जा सके एवं यूक्रेन को काला सागर तक पहुंच से वंचित किया जा सके।
इसलिए महत्वपूर्ण है कि यूक्रेन इस रूसी खेल को खेरसॉन क्षेत्र में आक्रामक तरीके से रोक सकता है, जो ओडेसा सहित दक्षिण तट पर रूसी नियंत्रण होने से रोकेगा। गंभीर रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह वाले इस शहर पर हाल में रूसी हवाई हमलों द्वारा निशाना बनाया गया था। इससे कुछ ही समय पहले यूक्रेन और रूस के बीच अनाज की आपूर्ति को फिर से शुरू करने की अनुमति देने के लिए एक समझौता हुआ था।
खेरसॉन को वापस पाकर रूस को यह संकेत भी दिया जा सकेगा कि किसी इलाके पर कब्जा करना और उस पर नियंत्रण बनाकर रखना एवं प्रशासनिक रूप से उसे चलाना, दोनों में अंतर है। खेरसॉन के कब्जे वाले इलाकों से मानवीय आपात स्थिति पैदा होने के संकेत मिल रहे हैं। नागरिकों के अपहरण और उनके उत्पीड़न की खबरें हैं। इसके अलावा रूसी सेना में वयस्क पुरुषों को जबरन शामिल किये जाने के भी मामले आये हैं।
अंतत: कहा जा सकता है कि अगर यूक्रेन खेरसॉन पर फिर से नियंत्रण पा ले तो रूस का मनोबल काफी गिर सकता है। इसके लिए यूक्रेन को और अधिक हथियार, विशेष रूप से ड्रोनों की जरूरत होगी। यूक्रेन ने खेरसॉन में अब तक 44 गांवों और कस्बों को आजाद करा लिया है जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पश्चिमी देशों द्वारा दिये गये हथियारों का असर हुआ है।
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