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Ukraine War: जर्मनी के कृषि मंत्रि बोले- पुतिन से लड़ना हो तो हमारे देशवासियों को कम मांस खाना चाहिए

जर्मनी के कृषि मंत्री सेम ओज्देमीर ने अपने देशवासियों को सलाह दी है कि अगर उन्हें रूस के खिलाफ लड़ना है तो वे कम मांस खायें और भोजन की बर्बादी से बचें, क्योंकि रूस खाद्य आपूर्ति को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

07:23 PM Mar 20, 2022 IST | Desk Team

जर्मनी के कृषि मंत्री सेम ओज्देमीर ने अपने देशवासियों को सलाह दी है कि अगर उन्हें रूस के खिलाफ लड़ना है तो वे कम मांस खायें और भोजन की बर्बादी से बचें, क्योंकि रूस खाद्य आपूर्ति को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

जर्मनी के कृषि मंत्री सेम ओज्देमीर ने अपने देशवासियों को सलाह दी है कि अगर उन्हें रूस के खिलाफ लड़ना है तो वे कम मांस खायें और भोजन की बर्बादी से बचें, क्योंकि रूस खाद्य आपूर्ति को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
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रूस खाद्य आपूर्ति को एक हथियार के रूप में रूप में इस्तेमाल कर
 जानकारी के मुताबकि, ओज्देमीर ने स्पीगल पत्रिका से की गयी बातचीत में यह दावा किया कि रूस खाद्य आपूर्ति को एक हथियार के रूप में रूप में इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूस अपनी निर्यात क्षमता का इस्तेमाल कर रहा है।ओज्देमीर ने कहा, मैं खुद एक शाकाहारी हूं और मैं सबको शाकाहारी होने की सलाह नहीं दूंगा। लेकिन चलिये इसे ऐसे समझते हैं कि कम मांस खाकर हम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ लड़ाई में योगदान करेंगे।गौरतलब है कि इससे पहले 16 मार्च को यूरोपीय आयोग में रूस के स्थायी प्रतिनिधि व्लादिमीर शिजोव ने कहा था कि यूरोपीय प्रायद्वीप के पश्चिमी हिस्से के लोगों के लिये ऊर्जा और भोजन की लागत काफी बढ़ गयी है।
रूस के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिनिधि मारिया जखारोव 
यूरोपीय आयोग के कूटनीति प्रमुख जोसेफ बोरेल ने नौ मार्च को सभी यूरोपीय देशों का आह्वान किया था कि वे हीटिंग सिस्टम का कम इस्तेमाल करें ताकि रूस से ऊर्जा आपूर्ति के कारण हुआ जुड़ाव पूरी तरह खत्म हो जाये।रूस के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिनिधि मारिया जखारोव ने जर्मनी के कृषि मंत्री के बयान का मजाक उड़ाते हुये कहा कि उन्होंने सच का बस एक ही हिस्सा बयान किया है।मारिया ने तंज करते हुये कहा,यह बहुत ही तरस आने की बात है कि उन्होंने जर्मनी के लोगों को पूरे अंत तक की कहानी कही है। लेकिन उनको फिर भी कम सांस लेने की जरूरत होगी, जिससे वे पर्यावरण का बचाव कर पायेंगे और हां रूस के खिलाफ लड़ पायेंगे। चलिये इसको ऐसे समझते हैं।
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