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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बोले- भारत के अतिसक्रिय, चरणबद्ध रुख से कोरोना मामलों के आंकड़ों की स्थिरता सुनिश्चित हुई

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बोले- भारत के अतिसक्रिय, चरणबद्ध रुख से कोरोना मामलों के आंकड़ों की स्थिरता सुनिश्चित हुई
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मंगलवार को कहा कि भारत के पूर्वानुमानित, अतिसक्रिय और चरणबद्ध रुख के कारण कोविड-19 के मामलों में स्थिरता और किसी भी समय स्वास्थ्य केंद्रों में काफी संख्या में खाली बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक वर्धन ने स्वीडन की स्वास्थ्य और समाजिक मामलों की मंत्री लेना हालेनग्रेन से डिजिटल वार्ता के दौरान यह टिप्पणी की। इसमें कहा गया कि स्वीडिश मंत्री ने स्वास्थ्य और औषधि के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा के लिये वर्धन से संपर्क किया था।

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा सीखे गए सबकों का जिक्र करते हुए वर्धन ने कहा, “एक अरब 35 करोड़ की आबादी के बावजूद भारत में महामारी से ठीक होने की दर 61 प्रतिशत से ज्यादा और मृत्युदर 2.78 प्रतिशत से भी कम है।” उन्होंने कहा कि रोजाना 2.5 लाख लोगों की जांच की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि चार महीने पहले कोविड-19 की जांच एक प्रयोगशाला से शुरू करने वाले देश में आज इस महामारी की जांच के लिये 1100 से ज्यादा प्रयोगशालाएं हैं। बयान में वर्धन को उद्धृत करते हुए कहा गया, “भारत के अतिसक्रियता, पूर्वानुमानित और चरणबद्ध दृष्टिकोण ने यह सुनिश्चित किया कि मामलों का ग्राफ स्थिर रहे और सरकार द्वारा तैयार त्रिस्तरीय कोविड स्वास्थ्य आधारभूत ढांचे में किसी भी समय पर्याप्त संख्या में पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध रहें।”

मंत्री ने कहा कि भारत ने नए कोरोना वायरस को एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया क्योंकि विभिन्न स्तरों पर ‘संपूर्ण सरकार’ के दृष्टिकोण को अपनाया गया। वर्धन ने कहा कि चीन द्वारा दुनिया को विषाणु के बारे में आगाह किये जाने के एक दिन बाद आठ जनवरी से सरकार ने अपनी विभिन्न शाखाओं से समन्वय किया जिससे समुद्र, जमीन और हवाई मार्ग से देश के प्रवेश बिंदुओं में निगरानी बरती जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने सामुदायिक निगरानी को मजबूत किया, विस्तृत स्वास्थ्य और यात्रा परामर्श जारी किये और हजारों नागरिकों और विदेशियों को सुरक्षित निकाला। 

वर्धन ने अपनी स्वीडिश समकक्ष को बताया, “भारत में अब पीपीई की 100 से ज्यादा निर्माण इकाइयां हैं जो रोजाना 5 लाख पीपीई किट का निर्माण कर रही हैं और इसी तरह एन-95 मास्क और वेंटिलेटरों का उत्पादन भी बढ़ाया गया है। भारत ने 100 से ज्यादा देशों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की आपूर्ति की।” मंत्रालय ने बयान में कहा कि हालेनग्रेन ने वर्धन को विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष चुने जाने पर भी बधाई दी और भारत द्वारा जांच क्षमता बढ़ाए जाने पर भी उसकी तारीफ की।

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