अनुच्छेद 371 रद्द को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री बोले - अभी रद्द करने का कोई इरादा नहीं

08:45 PM Feb 20, 2020 | Shera Rajput
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान के अनुच्छेद 371 को निरस्त करने की बात को 'दुष्प्रचार' करार देते हुए गुरुवार को इसे खारिज कर दिया और पूर्वोत्तर की अनूठी संस्कृति की रक्षा के लिए फिर से सरकार की प्रतिबद्धता जतायी।
 
अनुच्छेद 371 के तहत विशेष दर्जा रखने वाले अधिकतर राज्य पूर्वोत्तर में हैं। इस अनुच्छेद का मकसद उनकी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कानूनों का संरक्षण है।

अरुणाचल प्रदेश के 34वें स्थापना दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था, उसके पहले पूर्वोत्तर शेष भारत के साथ सिर्फ भौगोलिक रूप से जुड़ा हुआ था। 
उन्होंने कहा, 'देश के बाकी हिस्सों के साथ इस क्षेत्र का वास्तविक भावनात्मक जुड़ाव केवल मोदी सरकार के तहत हुआ।'

शाह ने कहा, 'जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद गलत सूचना फैलाई गई कि अनुच्छेद 371 को भी खत्म कर दिया जाएगा। ऐसा कभी नहीं होगा। किसी का ऐसा कोई इरादा नहीं है।' 

क्षेत्र में उग्रवाद और अंतरराज्यीय सीमा विवादों की समस्याओं का जिक्र करते हुए, गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार उनके हल के लिए प्रतिबद्ध है। 

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए पहले ही विभिन्न उग्रवादी संगठनों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। इसने हाल ही में बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा ब्रू-रियांग मुद्दे को सुलझाया और मणिपुर में अनिश्चितकालीन नाकेबंदी को समाप्त किया।’’ 

शाह ने कहा, ‘‘2024 में जब हम आपसे वोट मांगने आएंगे, तो उस समय तक पूर्वोत्तर उग्रवाद और अंतरराज्यीय विवाद जैसी समस्याओं से मुक्त हो जाएगा।'
 
उन्होंने पूर्वोत्तर के विकास के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने पांच साल में 30 बार यानी साल में छह बार इस क्षेत्र का दौरा किया। 

शाह ने कहा कि जब संप्रग सत्ता में था, तब 13 वें वित्त आयोग द्वारा इस क्षेत्र को केवल 89,168 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। राजग के सत्ता संभालने के बाद 14 वें वित्त आयोग के तहत यह राशि 3,13,374 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गयी। 

उन्होंने कहा कि 32,000 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के अलावा पूर्वोत्तर परिषद के तहत इस क्षेत्र के लिए कुल 474 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। 2024 तक क्षेत्र में सभी राज्यों की राजधानियां सड़क और हवाई संपर्क से जुड़ जाएंगी। 

शाह ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश में 25 वर्षों में सड़क निर्माण पर केवल 47,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि पिछले पांच वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 

उन्होंने कहा कि राजग सरकार ने तीन नयी रेलवे लाइनों के सर्वेक्षण के अलावा 2,000 किलोमीटर लंबे अरुणाचल सीमांत राजमार्ग के निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। सरकार ने 400 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक आईआईटी स्थापित करने का भी प्रस्ताव किया है। 

उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त और विकासोन्मुखी सरकार देने के लिए मुख्यमंत्री पेमा खांडू की तारीफ की। उन्होंने चीन की सीमा से लगे इस राज्य के लोगों की देशभक्ति की भावना की भी सराहना की। 

शाह ने कहा, ‘‘कुछ जगहों पर लोग एक दूसरे से मिलने पर नमस्ते कहते हैं तो कुछ स्थानों पर राम राम। गुजरात में लोग केम छो कहते हैं। केवल अरुणाचल में लोग एक-दूसरे का जय हिंद से अभिवादन करते हैं। देशभक्ति की भावना का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता।’’ 

शाह ने समारोह में अरुणाचल प्रदेश औद्योगिक एवं निवेश नीति भी जारी की। केंद्रीय मंत्री ने रिमोट के जरिए टू-लेन सड़क परियोजना, नवनिर्मित एमएलए अपार्टमेंट और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक आवास परियोजना का भी उद्घाटन किया। 

उन्होंने राज्य के पुलिस मुख्यालय भवन की आधारशिला रखी और राज्य के शहरी क्षेत्रों के लिए 148 स्वच्छता वाहनों को हरी झंडी दिखाई। 

इस मौके पर केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद थे।

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