विविधता में एकता भारत की पहचान : प्रणब मुखर्जी

करनाल : भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि विविधता में एकता भारत में सदियों से प्रचलित है और यह भारत की पहचान है। पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी आज करनाल में कलवेहडी स्थित बाबा राम दास विद्यापीठ के छात्रों को संबोधित कर रहे थे। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं आज यहां आकर बहुत खुश हूं कि एक बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी को संबोधित करने का मौका मिला। 

उन्होंने कहा कि आप भारत देश में रह रहे हैं जहां एक झंडा और एक संविधान हमारी एकता का गवाह है। भारत का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है और हमें इससे काफी कुछ सीखने की जरूरत है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के उदाहरण दिए और विद्यार्थियों से इनका अनुसरण करने का आग्रह किया। 

इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति का हवाई पट्टी पर स्कूल के चेयरमैन वैद्य देवेंद्र बत्तरा ने उनका स्वागत किया। मुखर्जी ने कहा कि भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ा आबादी वाला देश है। जिसमें लगभग सभी प्रमुख धर्म हैं। भारत में सात प्रमुख धर्मों का अभ्यास किया जाता है। 100 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं और भारत में कई बोलियों का उपयोग किया जाता है। इसके बावजूद हम भी एक हैं। अंत में उन्होंने छात्रों को अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए अनुशासन दृढ़ संकल्प और समर्पण के मार्ग पर चलने की सलाह दी। 

छात्र जीवन में जिज्ञासा बहुत जरूरी है और शिक्षकों को इनके सवालों का सही जवाब देकर इनकी जिझासा को शांत करना चाहिए। इससे पहले स्कूल की मैनेजर साबिया बत्रा ने उनका स्वागत किया। रूपा पब्लिकेशन दिल्ली के एमडी कपिश मैहरा ने उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उनका अभिनंदन किया। स्कूल की प्रिंसिपल नीनू चांदना ने स्कूल की गतिविधियों का उल्लेख किया।
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