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विश्वविद्यालयों को सामाजिक बदलाव के वाहक के रूप में काम करना चाहिए : राष्ट्रपति कोविंद

विश्वविद्यालयों को सामाजिक बदलाव के वाहक के रूप में काम करना चाहिए : राष्ट्रपति कोविंद
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कहा कि विश्वविद्यालय विचारों के महान केंद्र हैं और इन्हें सामाजिक बदलाव के वाहक के रूप में काम करना चाहिए। 

राष्ट्रपति ने कहा कि अकादमिक समुदाय को उन क्षेत्रों में शोध करना चाहिए जो न सिर्फ ज्ञान के लिए हो बल्कि उसका उपयोग मानव समाज के लिए भी हो सके । 

कोविंद ने यहां उत्कल विश्वविद्यालय के प्लेटिनम जुबली (75 वर्ष) समारोह के विदाई कार्यक्रम में कहा, ‘‘शिक्षा सामाजिक सशक्तिकरण का सर्वश्रेष्ठ औजार है। मैं इस मान्यता का न सिर्फ पैरोकार हूं बल्कि इसके सबूत के तौर पर आपके समक्ष खड़ा भी हूं। विश्वविद्यालय विचारों के महान केंद्र हैं लेकिन वे व्यावहारिक चीजों से कटे हुए स्थान नहीं हैं। वे समाज का हिस्सा हैं और इसलिए सामाजिक बदलाव में उन्हें लगे रहना चाहिए। ’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘कोई व्यक्ति पोथी या ग्रंथ पढ़ कर भी मूर्ख बना रह सकता है। असली विद्वान वही है जो अपने ज्ञान को उपयोग में लाता है। इसलिए, ज्ञान के लिए अपनी पिपासा में आप अपने आसपास की दुनिया में इसे उपयोग में लाना कभी नहीं भूलें और अपना ज्ञानवर्द्धन करें।’’ 

उन्होंने कहा कि संस्थानों को हिंसा, असहिष्णुता और शत्रुता से भरी दुनिया में महात्मा गांधी के मूल विचार ‘अहिंसा’ का प्रचार करना चाहिए। 

उन्होंने अध्यापकों एवं छात्रों से देश के हाशिये पर मौजूद तबके का सशक्तिकरण करने की जरूरत के प्रति संवेदनशील होने को कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी औजार है। 

राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर पूरी ऊर्जा के साथ ध्यान देना चाहिए तथा उत्कल विश्वविद्यालय जैसे संस्थान इस कार्य करने को करने के लिए बहु-विषयक संकाय से बखूबी लैस हैं। 

राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया ने देश की प्राचीन ज्ञान प्रणाली की संपन्नता पर गौर करना शुरू कर दिया है और विश्वविद्यालों को इस बात की जरूरत है कि वे इसका उपयोग करें। इस सिलसिले में उत्कल विश्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है। 
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