उन्नाव पीड़िता के परिवार की आरोपियों को दौड़ाकर मार डालने की मांग की

उन्नाव सामूहिक बलात्कार पीड़िता की दुखद मौत से पूरे देश में आक्रोश उत्पन्न हो गया है और इसके खिलाफ शनिवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। पीड़िता के परिवार ने मांग की कि आरोपियों को हैदराबाद घटना की तरह ‘‘दौड़ा कर मार दिया जाए’’ जबकि विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर यौन उत्पीड़न पीड़िताओं को सुरक्षा मुहैया कराने में असफल रहने का आरोप लगाया। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक संतप्त परिवार को त्वरित न्याय का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि एक त्वरित सुनवायी अदालत मामले पर सुनवायी करेगी और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बाद में परिवार के लिए 25 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की। 

विपक्ष ने आरोप लगाया कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति ‘‘पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है’’ और राज्य देश की ‘‘ दुष्कर्म राजधानी (रेप कैपिटल)’’ बन गया है। विपक्ष ने आदित्यनाथ सरकार को ‘‘हटाने’’ की मांग की।
 
इस मामले में 23 वर्षीय युवती 90 प्रतिशत झुलस गई थी और लगभग 40 घंटे तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद उसकी शुक्रवार रात में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई थी। युवती का परिवार उसका शव पोस्टमार्टम के बाद सड़क मार्ग से उन्नाव जिला स्थित उसके गांव ले गया। 

सफदरजंग अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि पोस्टमार्टम से पता चला की युवती की मौत अत्यधिक झुलसने के चलते हुई। 

चिकित्सक ने कहा, ‘‘आज सुबह पीड़िता का पोस्टमार्टम किया गया, जिसके मुताबिक उसके शरीर पर किसी संक्रमण, जहर देने या गला घोंटने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।’’
 
शाम को जब उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, कमल रानी वरुण और क्षेत्रीय भाजपा सांसद साक्षी महाराज पीड़िता के परिवार से मुलाकात करने पहुंचे तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने ‘‘वापस जाओ, वापस जाओ’’ के नारे लगाये और राज्य सरकार एवं साक्षी महाराज के खिलाफ भी नारेबाजी की। 

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए बलप्रयोग किया जिसमें कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं सहित कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आयीं। 

लखनऊ में पुलिस ने हजरतगंज में भाजपा मुख्यालय के बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया। 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने पीड़िता के परिवार के लिए न्याय की मांग का लेकर कैंडल मार्च निकाला। 

युवती के साथ पिछले वर्ष बलात्कार किया गया था और उसे बृहस्पतिवार को तब आग लगा दी गई थी जब वह स्वयं द्वारा दायर मामले के सिलसिले में रायबरेली जा रही थी। 

घटना के कुछ कुछ ही समय बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार करने वाले दो व्यक्ति भी शामिल थे। 

जिंदगी की जंग हार चुकी पीड़िता के पिता और भाई ने कहा कि जिसने उनकी बेटी को इस हालत में पहुंचाया है, उसे हैदराबाद मामले की तरह ही दौड़ा कर गोली मार देनी चाहिये या फिर तत्‍काल फांसी दी जानी चाहिये। 

पीड़िता के पिता ने उन्नाव स्थित अपने घर पर कहा, ‘‘मुझे रुपया-पैसा-मकान कुछ नहीं चाहिये। मुझे इसका लालच नहीं है, बस जिसने मेरी बेटी को इस हालत में पहुंचाया है, उसे हैदराबाद मामले की तरह ही दौड़ा कर गोली मार देनी चाहिये या फिर तत्‍काल फांसी दी जानी चाहिये।’’ 

पीड़िता के भाई ने भी इसी तरह की मांग की और कहा कि उसकी बहन को तब न्याय मिलेगा जब उसके साथ क्रूरता करने वाले उन सभी आरोपियों का भी वही हश्र हो जो ‘‘उसकी बहन ने झेला।’’ 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी संवेदना जताते हुए कहा, ‘‘उन्नाव की मासूम बेटी की दुखद एवं हृदय विदारक मौत, मानवता को शर्मसार करने वाली घटना से आक्रोशित एवं स्तब्ध हूं। एक और बेटी ने न्याय और सुरक्षा के आस में दम तोड़ दिया।’’ 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उन्नाव में पीड़िता के परिवार से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके चलते राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ गए हैं। 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने ऐसा माहौल बनाया है कि राज्य में अपराधियों के मन में कोई भय नहीं है। उन्होंने आदित्यनाथ सरकार से महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को गंभीरता से लेने का आग्रह किया। 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वह (भाजपा सरकार) कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के लिये कोई जगह नहीं है। यद्यपि जिस तरह से राज्य में अराजकता फैली है और महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं, मैं सोचती हूं कि क्या उनके द्वारा बनाये गए उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए कोई जगह है।’’ 

उन्होंने ट्वीट करके राज्य सरकार पर ‘‘खोखले कानून एवं व्यवस्था तंत्र’’ को लेकर निशाना साधा और कहा कि कहा, ‘‘यह हम सबकी नाकामी है कि हम उसे न्याय नहीं दे पाए।’’ 

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘उन्नाव सामूहिक बलात्कार पीड़िता को पिछली घटना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा क्यों नहीं दी गई? प्राथमिकी दर्ज करने से मना करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? महिलाओं के खिलाफ रोज रोज होने वाले अपराध रोकने के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाये जा रहे हैं?’’ 

प्रियंका गांधी वाड्रा का इशारा जिले में गत जुलाई में हुए ऐसे ही कथित हमले की ओर था जिसमें विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाने वाली युवती जिस कार में जा रही थी उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। 

उत्तर प्रदेश के मंत्री मौर्य ने दोहराया कि दोषी व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा। 

उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री मौर्य ने कहा, ‘‘कोई भी अपराधी अपराधी है। यदि कोई दोषी व्यक्तियों को बचाने की कोशिश करता है, तो उसके साथ भी कानून सख्ती से निपटेगा।’’ 

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ के विधानभवन के बाहर 'धरने' पर बैठे और महिला की मौत के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया और उसे ‘‘हटाये जाने’’ की मांग की। 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से पीड़ित परिवार को 'उचित न्याय' सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि युवती की मौत बहुत दुखद है और उनकी पार्टी दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ है। 

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए राज्य सरकारों को लोगों के बीच कानून का डर पैदा करना चाहिए और घटनाओं के मद्देनजर केन्द्र भी ऐसी घटनाओं को मद्देनजर रखते हुये दोषियों को निर्धारित समय के भीतर ही फांसी की सख्त सजा दिलाने का कानून जरूर बनाए।’’ 

उन्होंने उच्चतम न्यायालय से महिलाओं के खिलाफ अपराध की बढ़ती घटनाओं के बारे में स्वत: संज्ञान लेने और केंद्र को उन्हें प्रभावी रूप से जाँच करने के लिए शीघ्र कदम उठाने का निर्देश देने का आग्रह किया।
 
दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। 

उन्होंने कहा कि यह ‘‘यह पहला मामला नहीं है और आखिरी भी नहीं होगा यदि आप (उत्तर प्रदेश सरकार) नहीं जागे। ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश दुनिया की ‘रेप कैपिटल’ बनने की ओर बढ़ रहा है।'' 

उन्होंने कहा कि ‘‘उत्तर प्रदेश सरकार को आश्वासन से अधिक राज्य में कानून एवं व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। हमारा सवाल राज्य पुलिस से है कि चार महीनों में प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई और आरोपियों को जमानत पर क्यों छोड़ दिया गया।’’ 

दिल्ली महिला आयोग प्रमुख स्वाति मालीवाल ने मांग की कि उन्नाव मामले के आरोपियों को एक महीने के भीतर फांसी दी जाए। 
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