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आगरा में प्रदूषण पर अंकुश लगाने में विफल रहने पर 25 करोड़ रुपये जमा कराए उत्तर प्रदेश सरकार : एनजीटी 

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि आगरा में यमुना में कूड़ा और सीवेज डालकर बड़ा प्रदूषण फैलाया जा रहा है, ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार कर्तव्य निर्वहन में विफल रहने को लेकर 25करोड़ रुपये की परफार्मेंस गारंटी जमा करे। एनजीटी ने कहा कि आगरा छावनी रेलवे स्टेशन पर सड़कों पर यूं […]
आगरा में प्रदूषण पर अंकुश लगाने में विफल रहने पर 25 करोड़ रुपये जमा कराए उत्तर प्रदेश सरकार : एनजीटी 

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि आगरा में यमुना में कूड़ा और सीवेज डालकर बड़ा प्रदूषण फैलाया जा रहा है, ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार कर्तव्य निर्वहन में विफल रहने को लेकर 25करोड़ रुपये की परफार्मेंस गारंटी जमा करे। एनजीटी ने कहा कि आगरा छावनी रेलवे स्टेशन पर सड़कों पर यूं ही ठोस अपशिष्ट जलाया जा रहा है, जगह जगह कूड़े के ढेर हैं, नालों के जाम रहने से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो रही है। उसने कहा कि सीवर प्रणाली का 50 फीसद हिस्सा काम नहीं कर रहा है, अशोधित सीवेज खुली नालियों में डाला जा रहा है और निकास व्यवस्था 55 साल पुरानी हो गयी है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने राज्य सरकार को यह राशि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा करने का निर्देश दिया और कहा कि इस मामले पर आगे चलकर विचार किया जाएगा तबतक यह एक अंतरिम व्यवस्था है।

पीठ ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश को दोषी अधिकारियों और प्रदूषकों का उत्तरदायित्व तय करने तथा उनके विरुद्ध उपयुक्त कार्रवाई करने की छूट है। राज्य का संबंधित प्रशासन कानून के अनुसार चिह्नित प्रदूषकों से उपयुक्त मुआवजा हासिल करने के लिए कदम उठा सकता है और तीन महीने के अंदर कार्रवाई रिपोर्ट ईमेल के मार्फत दे सकता है। ’’ अधिकरण ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को 12 मार्च को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘वह (मुख्य सचिव) अपने आप को चीजों से अवगत करने तथा प्रगति पर निगरानी रखने एवं निजी सुनवाई के दौरान रिपोर्ट देने के लिए संबंधित व्यक्तियों की बैठक बुला सकते हैं।’’ एनजीटी ने कहा कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह की अगुवाई वाली निगरानी समिति की प्रगति रिपोर्ट भी दे सकते हैं। अधिकरण ने आगरा के निवासी डी के जोशी और एनजीओ सोशल एक्शन फार फारेस्ट एवं इनवायरनमेंट की अर्जी पर यह निर्देश दिया।

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