बेटी बनाती थी हवस का शिकार, पिता करता था वसूली! बस्ती में SO की मौत के बाद हनीट्रैप गैंग का भंडाफोड़
Basti Honey Trap Case: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में पुलिस ने कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस का दावा है कि गिरोह पहले लोगों से दोस्ती करता था और बाद में प्राइवेट बातचीत, फोटो और वीडियो के जरिए उन्हें डराकर पैसे की मांग करता था। पैसे देने से इनकार करने पर बदनाम करने की धमकी दिए जाने का आरोप है। मामले की जांच एक पुलिस अधिकारी की आत्महत्या के बाद सामने आए सुरागों से आगे बढ़ी। वाल्टरगंज थाने के इंचार्ज सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मौत के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया और घटना को लेकर कई सवाल उठे। सूर्य प्रकाश सिंह के बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली में FIR दर्ज कराई। शिकायत में कुछ लोगों पर कथित तौर पर आपसी मिलीभगत कर उन्हें परेशान करने और ऐसे हालात पैदा करने का आरोप लगाया गया, जिनसे उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। इसके बाद पुलिस ने सिंह के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और संपर्क में रहने वाले लोगों की जांच शुरू की। इसी दौरान जांच की कड़ियां प्रियंका चौधरी और उसके संपर्क में रहे लोगों तक पहुंचीं।
पहले दोस्ती, फिर प्राइवेट रिश्ते और ब्लैकमेलिंग का आरोप
बस्ती के DIG संजीव त्यागी के अनुसार, जांच में सामने आया कि प्रियंका चौधरी कथित तौर पर लोगों से संपर्क बनाती थी। बातचीत बढ़ने के बाद दोस्ती और फिर प्राइवेट संबंध बनाए जाने का आरोप है।
पुलिस का कहना है कि इसी दौरान प्राइवेट बातचीत, फोटो या वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे। बाद में इन्हीं चीजों को कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। पीड़ितों से पैसे मांगे जाते और रकम नहीं देने पर उनकी प्राइवेट फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी दिए जाने का आरोप है। पुलिस को शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि एक से ज्यादा लोगों को इस तरीके से निशाना बनाया गया।
पिता और वकील पर भी आरोप
पुलिस के अनुसार, इस मामले में प्रियंका अकेली नहीं थी। उसके पिता राम नयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी जांच में सामने आई है। आरोप है कि प्रियंका लोगों से संपर्क बनाने का काम करती थी, जबकि बाद में उसके पिता और वकील कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग और पैसों की वसूली में शामिल होते थे। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।
पुलिस के मुताबिक, 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गंधार गांव में अपने पिता के साथ रहती थी। पुलिस ने बताया कि वह करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही है। वह मुंबई में ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटर में भी काम कर चुकी है। जांच एजेंसियां अब उसके पुराने संपर्कों और गतिविधियों की भी जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित पीड़ितों से संपर्क कैसे किया गया और बाद में उनसे पैसे की मांग किस तरह की गई।
सूर्य प्रकाश सिंह से आखिरी कॉल की जांच
DIG संजीव त्यागी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच में सूर्य प्रकाश सिंह का प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया है। पुलिस के अनुसार, 29 अगस्त को दोपहर 1:41 बजे विजय प्रकाश यादव ने सिंह को आखिरी बार फोन किया था। अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस कॉल में क्या बातचीत हुई और क्या इसका संबंध उनकी मौत से पहले की परिस्थितियों से था। पुलिस को शक है कि सूर्य प्रकाश सिंह पर कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन, उनकी आत्महत्या और ब्लैकमेलिंग के बीच सीधा संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर शुरू हुई जांच
पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक सबूतों, कॉल डिटेल, आरोपियों की पूछताछ और संभावित पीड़ितों के बयानों को जोड़कर पूरे मामले की जांच कर रही है। DIG के मुताबिक, पुलिस ने प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को अस्पताल चौराहे से गिरफ्तार किया है।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपियों ने बस्ती के अलावा किसी दूसरे शहर में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया था।
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