कौन हैं रील वाली DM दिव्या मित्तल? जिन्होंने प्रशासनिक सेवा को कहा अलविदा, मंजूर हुआ इस्तीफा
IAS Divya Mittal Resignation: उत्तर प्रदेश कैडर की फेमस IAS ऑफिसर दिव्या मित्तल का इस्तीफा आखिरकार सरकार ने मंजूर कर लिया है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की ओर से इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद दिव्या मित्तल अब भारतीय प्रशासनिक सेवा के सभी पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई हैं। उन्होंने 30 अगस्त को अपना इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद यूपी की ब्यूरोक्रेसी से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा तेज हो गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मित्तल अपने प्रशासनिक कार्यों, सख्त फैसलों और सोशल मीडिया पर सक्रियता के कारण लगातार सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने यूपी के कई अहम पदों पर काम किया और तीन जिलों की जिलाधिकारी भी रहीं। आइए जानते हैं उनके करियर से जुड़ी 10 खास बातें।
तीन जिलों की रह चुकी हैं DM
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के देवरिया, मिर्जापुर और संतकबीरनगर जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। इन जिलों में काम करने के दौरान उनकी पहचान सक्रिय और काम पर फोकस रखने वाली अधिकारी के रूप में बनी। वहीं, मिर्जापुर में उनके कार्यकाल का एक बड़ा काम लहुरीडीह गांव तक पानी पहुंचाना माना जाता है। इस गांव में आजादी के करीब 76 साल बाद पहली बार नल से पानी पहुंचा। इस पहल के बाद स्थानीय लोगों ने उनकी काफी सराहना की।
वहीं देवरिया में तैनाती के दौरान दिव्या मित्तल ने ‘मेरा गांव, मेरा गौरव’ अभियान शुरू किया। इसके तहत जिले के 800 से ज्यादा ग्राम प्रधानों को व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए प्रशासनिक अधिकारियों से जोड़ा गया, ताकि गांवों की समस्याओं का जल्दी समाधान हो सके।
रील वाली DM कहकर उड़ाया गया मजाक
दिव्या मित्तल सोशल मीडिया पर सरकारी कामों की जानकारी साझा करती थीं। इसी वजह से उनके विरोधियों ने उन्हें ‘रील वाली डीएम’ तक कहा। हालांकि, उनके समर्थकों का मानना था कि सोशल मीडिया के जरिए प्रशासन और आम जनता के बीच बेहतर संपर्क बना। संतकबीरनगर की डीएम रहते हुए उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान प्रशासन की जिम्मेदारी संभाली। मुश्किल हालात में स्वास्थ्य व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर कई फैसले लिए गए।
उनकी सख्त लेकिन संवेदनशील कार्यशैली की भी चर्चा हुई। इसके साथ ही दिव्या मित्तल फरवरी 2019 से सितंबर 2020 तक बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष रहीं। करीब 19 महीने के कार्यकाल में उन्होंने 32 करोड़ रुपये से ज्यादा का सरकारी कर्ज चुकाकर प्राधिकरण को डिफॉल्टर होने से बचाया।
विदाई में हुई फूलों की बारिश
मिर्जापुर से तबादले के समय स्थानीय लोगों ने उन्हें अलग अंदाज में विदाई दी थी। विदाई समारोह में उन्हें झूले पर बैठाया गया और फूलों की बारिश कर स्वागत किया गया। यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही थीं। वहीं दिव्या मित्तल ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी पढ़ाया है।
उन्होंने दो किताबें लिखी हैं। उनकी हालिया किताब ‘द क्राफ्टेड जीनियस’ में UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को लेकर उनके अनुभव और रणनीति साझा की गई है।
लंदन की नौकरी छोड़कर बनीं IAS
दिव्या मित्तल विभिन्न सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेती रही हैं। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा उन्हें प्रोत्साहित करने से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी सक्रियता देखी गई। वहीं मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं और उनका जन्म दिल्ली में हुआ।
उन्होंने दिल्ली में पढ़ाई की, बीटेक किया और इसके बाद IIM बेंगलुरु से MBA की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्हें और उनके पति गगनदीप सिंह को लंदन में अच्छी नौकरी मिली। दोनों ने विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया और बाद में प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए।
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