नए एमडी के सामने चुनौतियों का चक्रव्यूह, जल निगम में सुधार की बड़ी जिम्मेदारी
Lucknow, (पंजाब केसरी): उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक (एमडी) मासूम अली सरवर ने ऐसे समय में जिम्मेदारी संभाली है, जब प्रदेश के शहरों में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। शहरों की बढ़ती आबादी, पुरानी पाइपलाइन और सीवर व्यवस्था के साथ नई परियोजनाओं का दबाव जल निगम के सामने बड़ी चुनौती है।
मासूम अली सरवर अमृत योजना के स्टेट मिशन डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके सामने दोनों विभागों के कामकाज में बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी होगी। हालांकि, तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के साथ विभाग के अंदर की खींचतान और गुटबाजी से निपटना भी उनके लिए आसान नहीं होगा।
समय पर वेतन और पेंशन देना बड़ी चुनौती
जल निगम के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं। समय पर वेतन और पेंशन नहीं मिलने की शिकायतों के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर विरोध और कानूनी विवाद की स्थिति भी बनती रही है।
नए एमडी के सामने सबसे जरूरी काम कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान की व्यवस्था को मजबूत करना होगा। यदि इसके लिए स्थायी और स्पष्ट वित्तीय योजना तैयार की जाती है तो कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। साथ ही विभाग पर पड़ने वाले अनावश्यक कानूनी दबाव को भी कम किया जा सकता है।
पाइपलाइन और सीवर के काम की गुणवत्ता पर नजर
शहरी इलाकों में पानी की पाइपलाइन और सीवर लाइन बिछाने का काम बड़ी संख्या में चल रहा है। इन परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता और काम की समयसीमा को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। कई जगह ठेकेदारों की लापरवाही और काम पूरा होने के बाद दोबारा खुदाई जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
ऐसे में एमडी के सामने ठेकेदारों, कंसल्टेंट और थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसियों की जवाबदेही तय करना अहम होगा। निर्माण कार्य की नियमित जांच और गुणवत्ता में कमी मिलने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई से व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है।
सीएनडीएस के काम पर भी रहेगी नजर
सीएनडीएस से जुड़े निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, टेंडर प्रक्रिया और परियोजनाओं को समय पर पूरा करना भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। टेंडर में देरी होने से कई परियोजनाएं प्रभावित होती हैं, जबकि ठेकेदारों की मनमानी से लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं।
नए एमडी के लिए जरूरी होगा कि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। अधिकारियों और परियोजना प्रबंधकों की जिम्मेदारी तय करने के साथ शिकायतों की निष्पक्ष जांच की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी। किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कमीशनखोरी या अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करना जरूरी होगा।
कर्मचारियों की कमी से बढ़ रहा काम का दबाव
जल निगम (नगरीय) के सामने एक और बड़ी समस्या तकनीकी कर्मचारियों की कमी है। सहायक अभियंता और अवर अभियंता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रिक्तियां होने से मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी पड़ती है। इसका असर परियोजनाओं की निगरानी और काम की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
इस समस्या को दूर करने के लिए खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तेज करना जरूरी होगा। साथ ही कर्मचारियों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर भी ध्यान देना होगा। जीआईएस मैपिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और एआई आधारित जल प्रबंधन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भविष्य में जल व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
प्रशासनिक अनुभव का मिल सकता है फायदा
मासूम अली सरवर के पास प्रशासनिक अनुभव है और अमृत योजना के स्टेट मिशन डायरेक्टर के रूप में भी वे काम कर रहे हैं। ऐसे में जल निगम की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा होगी।
यदि वे कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेकेदारों की जवाबदेही और विभागीय समन्वय को बेहतर करने में सफल रहते हैं, तो जल निगम की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि विभाग को पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
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